घपले-घोटालों के शोर के बीच महाराष्ट्र के पशुधन मंत्री नितिन राउत भी जमीन कब्जाने के मामले में घिर गए हैं। बांबे हाईकोर्ट ने नागपुर के बेजनबाग इलाके में हुए इस अतिक्रमण पर सख्त नाराजगी जताते हुए राउत व अन्य के खिलाफ कार्रवाई में देरी पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हाईकोर्ट के न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी और प्रमोद कोडे की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह अतिक्रमण को हटाने और कब्जा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में एक अगस्त से पहले हलफनामा दायर करे। पशुपालन मंत्री नितिन राउत के खिलाफ न केवल जमीन को हड़पने का आरोप है बल्कि 9013 वर्ग मीटर के अन्य तीन भूखंडों पर भी कब्जा करने का आरोप है। इसमें से 80.90 एकड़ जमीन बंद पड़ी मिल की है, जो कि मिल कर्मचारियों के आवास के लिए आरक्षित है। कंपनी के बंद होने के बाद यह जमीन सरकार और मिल कर्मियों की हाउसिंग सोसाइटी ने अपने कब्जे में ले ली और यहां आवास का निर्माण कराया। नियमों के तहत, भूखंड के कुल क्षेत्रफल का 15 प्रतिशत क्षेत्र खुला छोड़ना था और पांच फीसदी क्षेत्र जनहित कार्यो के लिए आरक्षित था। आरोप है कि मंत्री व अन्य लोगों ने इसी बीस प्रतिशत क्षेत्र पर कब्जा जमा रखा है। स्थानीय निवासियों ने इस बारे में राज्य सरकार को तमाम शिकायतें भेजीं, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। इस पर निवासियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस मामले में उच्च न्यायालय के निर्देश पर जिलाधिकारी ने मामले की जांच तो की, लेकिन अपनी रिपोर्ट में कहा कि आवासीय समिति के पदाधिकारियों ने कथित रूप से इस जमीन को अन्य लोगों को बेच दिया है। उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने गत वर्ष जुलाई में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह जमीन से मंत्री व अन्य लोगों के कब्जे हटाए।
Monday, July 18, 2011
भूमि कब्जाने वाले मंत्री पर कार्रवाई न करने पर महाराष्ट्र सरकार को फटकार
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