Monday, July 18, 2011

दैनिक जागरण,जमशेदपुर संस्करण, 18-07-2011

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने सीबीआइ को निर्देश दिया है कि वह अपने उन अधिकारियों का नाम सार्वजनिक करे जिनकी ईमानदारी संदिग्ध है। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि सीबीआइ अपने उन अधिकारियों की सूची भी सार्वजनिक करे जिनके खिलाफ शिकायतें दर्ज हैं और जांच का सामना कर रहे हैं। सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने 10 अगस्त से पहले सीबीआइ को मांगी गई सूचनाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। मामला पोर्ट ब्लेयर निवासी एक वकील सुजीत कुमार मजूमदार का है। उन्होंने सूचना के अधिकार (आरटीआइ) कानून के तहत याचिका दायर कर सीबीआइ से उन अधिकारियों का ब्योरा मांगा था जिन्हें वर्ष 2006 से अब तक संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाली सूची में रखा गया है। सीबीआइ ने इसके जवाब में कहा था कि ऐसी कोई सूची नहीं बनाई गई है। मजूमदार ने उन अधिकारियों का नाम भी बताने को कहा था कि जिनके खिलाफ जांच चल रही है। सीबीआइ ने इस आधार पर यह बताने से इंकार कर दिया था कि यह एक व्यक्तिगत सूचना है और किसी सार्वजनिक गतिविधि से इसका कोई लेना देना नहीं है। सीबीआइ की इस दलील को खारिज करते हुए सीआइसी ने कहा कि प्रत्येक सार्वजनिक प्राधिकरण के लिए आवश्यक है कि वह अपने अधिकारियों के बारे में सूचनाएं रखे। इनमें किसी के खिलाफ दर्ज शिकायत हो या किसी के खिलाफ जांच शुरू की गई हो तो उसका रिकॉर्ड रखना जरूरी है क्योंकि ये अधिकारी लोक सेवक हैं और जनता का काम करते हैं। सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने कहा कि कोई शिकायत दर्ज हो और उसपर संज्ञान लिया गया हो या किसी भी अधिकारी ने जांच की हो तो निश्चित तौर पर वह सार्वजनिक क्रिया कलाप है। संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले अधिकारियों का नाम सार्वजनिक करे सीबीआइ आरटीआइ का कमाल 6 सीआइसी ने 10 अगस्त से पहले मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने को कहा

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