Tuesday, July 12, 2011

सीबीआइ चाहे तो करे सिब्बल की जांच

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सुप्रीम कोर्ट ने दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल को फौरी राहत देते हुए अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन की पेनाल्टी घटाने का आरोप लगाने वाली गैर सरकारी संगठन की याचिका पर आदेश पारित करने से मना कर दिया। अदालत ने कहा कि सिब्बल के मामले को 2जी मामले से नहीं जोड़ा जा सकता। हालांकि अदालत ने यह जरूर कह दिया कि सीबीआइ चाहे तो इसकी जांच कर सकती है। 2जी मामले की निगरानी कर रही न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी व न्यायमूर्ति एके गांगुली की पीठ ने कहा कि इस मामले में आदेश पारित करने की कोई जरूरत नहीं है। हालांकि जब केंद्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रोहिंग्टन नरीमन ने कहा कि गैर सरकार संगठन सीपीआइएल के आरोप लगाने वाले हलफनामे को कोर्ट रिकार्ड पर न ले तो पीठ ने कहा कि हलफनामा रिकार्ड पर आ चुका है। गैर सरकारी संगठन सीपीआइएल ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर आरोप लगाया था कि दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन को अनुचित लाभ पहंुचाते हुए उस पर लगी 50 करोड़ की पेनाल्टी को घटाकर 5 करोड़ कर दी थी। सोमवार को याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि रिलायंस कम्युनिकेशन ने बिना किसी नोटिस के सेवाएं बंद कर दीं थीं। सेवाएं ठप करना लाइसेंस की शर्तो का उल्लंघन है। इसीलिए दूरसंचार विभाग की यूएसओएफ शाखा ने रिलायंस को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 50 करोड़ की पेनाल्टी लगाने की संस्तुति की थी। एडवाइजर फाइनेंस व मेंबर फाइनेंस ने भी इसे मंजूरी दे दी थी, लेकिन सिब्बल ने 18 फरवरी तक फाइल रोके रखी। इस बीच 16 फरवरी को रिलायंस की ओर से उन्हें पत्र भेजा गया। उस पत्र के आधार पर दूरसंचार मंत्री ने रिलायंस को सेवा बंद करने का दोषी मानने के बजाय सिर्फ सेवा बाधित करने का दोषी माना, जिसका परिणाम हुआ कि रिलायंस पर लगी 50 करोड़ की पेनाल्टी घटकर 5 करोड़ हो गई। भूषण की मांग थी कि सिब्बल के इस फैसले की जांच सीबीआइ से कराई जाए। उनका कहना था कि सिब्बल ने मामले की तहकीकात किए बगैर ही पेनाल्टी घटा दी। पीठ ने भूषण की मांग ठुकराते हुए कहा कि अगर आरोप के मुताबिक दूरसंचार से संबंधित कोई अनियमितता हुई है तो भी उसे 2जी से नहीं जोड़ा जा सकता। सीबीआइ चाहे तो इस मामले की जांच कर सकती है, लेकिन वे ऐसा कुछ नहीं कह रहे। कोर्ट ने कहा कि पीडि़त पक्षकार चाहें तो कानून के मुताबिक राहत पाने के लिए याचिका दाखिल कर सकते हैं। इस बीच प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। ईडी ने कहा कि कलैंगनर टीवी को दी गई 200 करोड़ की रिश्वत की रकम एक महीने में जब्त कर ली जाएगी।

पृष्ठ संख्या 01, दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण), 12 जुलाई, 2011

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