Saturday, July 30, 2011

हाईकोर्ट से गिरफ्तारी पर रोक लगते ही सामने आए बालकृष्ण

सीबीआइ और खुफिया विभाग के लिए चार दिन से रहस्य बने आचार्य बालकृष्ण शुक्रवार को हरिद्वार में पतंजलि योगपीठ में अचानक सामने आ गए। उन्होंने वहां योग गुरु रामदेव के साथ यज्ञ किया। इस बीच, नैनीताल हाईकोर्ट ने आचार्य की गिरफ्तारी पर 29 अगस्त तक रोक लगा दी। साथ ही तीन अगस्त को सीबीआइ के सामने पेश होने को कहा है, हालांकि हरिद्वार में शाम को जारी एक बयान में आचार्य ने चार अगस्त को पेश होने की बात कही। अदालत ने उन्हें अपना पासपोर्ट हाईकोर्ट में जमा करने के भी आदेश दिए हैं। सीबीआइ को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है। इधर, बालकृष्ण बगैर पासपोर्ट के बुलावे पर भी शुक्रवार को सीबीआइ के समक्ष पेश नहीं हुए, उन्होंने वकीलों की व्यस्तता का हवाला देकर फैक्स के जरिए दस दिन की मोहलत मांगी। सीबीआइ ने आचार्य को छह दिन का वक्त देते हुए चार अगस्त से पहले किसी भी दिन कार्यालय में हाजिर होने को कहा है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट हासिल करने के आरोपों से घिरे आचार्य बालकृष्ण सीबीआइ के मुकदमा दर्ज करने के दो रोज बाद यानी मंगलवार से भूमिगत थे। सामने न आने के कारण खुफिया एजेंसियां उनके नेपाल चले जाने आशंका तक जाहिर करने लगी थीं। चार दिन से सीबीआइ और खुफिया तंत्र उनके संभावित ठिकानों पर नजर गड़ाए था, लेकिन आचार्य की लोकेशन नहीं मिल पाई। शुक्रवार शाम बालकृष्ण अचानक पतंजलि योगपीठ फेज वन की यज्ञशाला में योग गुरु रामदेव के साथ प्रकट हो गए। बाबा ने उस वक्त पत्रकारों को बातचीत करने के लिए वहां बुला रखा था। बाबा ने अपनी बात रखी, लेकिन बालकृष्ण मीडिया से दूरी बनाए रखी। पूरे समय वह यज्ञ करते दिखे। इस बीच, हाईकोर्ट ने सीबीआइ को झटका देते हुए आचार्य की गिरफ्तारी पर 29 अगस्त तक रोक लगा दी है। गुरुवार को बालकृष्ण के पैरोकार की ओर से याचिका दायर कर सीबीआइ की प्राथमिकी निरस्त करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आग्रह किया गया था। शुक्रवार को हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस तरुण अग्रवाल की एकल पीठ में याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि उनके खिलाफ दर्ज मामले राजनीति से प्रेरित हैं और बाबा रामदेव का सहयोगी होने के कारण सीबीआइ उन्हें झूठे मुकदमे में गिरफ्तार करना चाह रही है। कोर्ट में सीबीआइ के अधिवक्ता द्वारा अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के पक्ष में कई तर्क पेश किए गए। कोर्ट ने जानना चाहा कि राज्य सरकार एवं पुलिस से सहयोग मांगे बिना मामला किन कारणों से सीधे सीबीआइ के सुपुर्द किया गया।प्राथमिकी में लगाई गई धारा 120 बी के साथ ही आचार्य के पासपोर्ट की वैधता के मसले पर भी कोर्ट ने सीबीआई अधिवक्ता से सवाल किए। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक आचार्य की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी, जबकि सीबीआइ को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। बालकृष्ण को सीबीआइ के समक्ष 3 अगस्त को पक्ष रखने और आचार्य को 5 अगस्त तक अपना पासपोर्ट हाईकोर्ट में जमा करने के निर्देश दिए हैं।

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