Monday, October 31, 2011

जवाबदेही से सफल होगी मनरेगा

साढ़े पांच साल पहले शुरू हुई नरेगा (अब मनरेगा) शुरू से ही गड़बडि़यों का शिकार रही है। पिछले दिनों ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने उत्तर प्रदेश में मनरेगा के भ्रष्टाचार का खुलासा करते हुए प्रदेश के सात जिलों में मनरेगा के तहत हुए भ्रष्टामचार की सीबीआइ जांच के लिए राज्य सरकार को पत्र लिखा तो मामले ने तूल पकड़ लिया। उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कड़ा ऐतराज जताया और कहा कि जयराम रमेश का पत्र राजनीति से प्रेरित है। राजनीतिक विवादों से परे हटकर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में यह योजना अधिकारियों और नेताओं की अवैध कमाई का जरिया बनी हुई हैं। हालांकि मनरेगा के तहत होने वाले कार्यो की जांच-परख के लिए बहुस्तुरीय उपाय किए गए हैं, जिनमें आंतरिक व बाह्य दोनों उपाय शामिल हैं। केंद्र सरकार ने मनरेगा पर अमल के लिए राज्यों को दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं, लेकिन अभी तक कई राज्यों ने न तो इन्हें लागू करने के लिए नियम बनाए हैं और न ही ब्लॉक स्तिर पर पेशेवर कर्मियों की नियुक्ति की। यही कारण है कि भ्रष्टाचार का खेल बदस्तूर जारी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मनरेगा योजना के तहत 2010-11 में 5.49 करोड़ परिवारों को रोजगार मुहैया कराए गए, वहीं 257.15 करोड़ श्रम दिवस सृजित किए गए। जबकि 2009-10 में यह अनुपात क्रमश: 5.26 और 283.59 करोड़ का रहा है। गांव के गरीब-मजदूरों के लिए यह योजना एक तरह से संजीवनी का काम कर रही है। इसमें स्त्री-पुरुष दोनों को बराबर की मजदूरी मिलती है। योजना में प्रावधान है कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को एक वित्त वर्ष के अंदर कम से कम 100 दिन के रोजगार के मौके मुहैया कराए जाएं, ताकि उनकी जीविका को सुरक्षित किया जा सके। जहां मनरेगा पर बेहतर तरीके से अमल हुआ, वहां इसके चलते पलायन और भुखमरी को रोकने में एक सीमा तक सफलता मिली। लेकिन संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया है कि मनरेगा के तहत किसी भी राज्य में जरूरतमंदों को न तो सौ दिन का काम मिल पाया और न ही पूरी दिहाड़ी मिल सकी। रिपोर्ट के मुताबिक 2006-07 में 100 दिन के मुकाबले 43 दिन का रोजगार और 100 रुपये के मुकाबले 65 रुपये की औसतन दिहाड़ी मिल पाई। 2007-08 में 42 दिन और 75 रुपये का औसत रहा तो 2008-09 मे 48 दिन और 84 रुपये की दिहाड़ी का। जबकि 2009-10 में 54 दिन और 90 रुपये की दिहाड़ी मिली। समय से जॉब कार्ड न बनाना या पैसे लेकर बनाना, कम हाजिरी व कम भुगतान मनरेगा में भ्रष्टाजचार के प्रमुख रूप हैं। इसी का परिणाम है कि शुरू किए काम के पूरा होने का रिकॉर्ड 50 फीसदी से भी कम है। साढ़े पांच साल पहले जब यह योजना शुरू की गई थी, तभी कुछ अर्थशास्ति्रयों ने आगाह करते हुए कहा था कि यदि इसके अमल पर कड़ी निगरानी नहीं रखी गई तो इसका भी वही हश्र हो सकता है, जो काम के बदले अनाज योजना का हुआ था। गौरतलब है कि काम के बदले अनाज योजना को लेकर भ्रष्टाचार की इतनी शिकायतें सामने आई कि उसे बंद कर देना पड़ा। इस अनुभव को देखते हुए ही रोजगार गारंटी योजना पर नजर रखने के लिए विधिवत एक निगरानी समिति बनाई गई, लेकिन देश के प्रशासन तंत्र में हर स्तर पर पैठ बना चुके भ्रष्टाचार ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। कई राज्यों में मनरेगा से जुड़ी गड़बडि़यां और अनियमितताएं सामने आई हैं, उनसे साफ पता चलता है कि यह योजना न केवल गहरी खामियों की शिकार है, बल्कि इस पर निगरानी रखने वाला तंत्र भी निष्कि्रय है। विडंबना यह है कि यदि किसी सामाजिक कार्यकर्ता ने इस योजना के नाम पर किए जा रहे घोटालों का पर्दाफाश करने की कोशिश की तो उस पर जानलेवा हमले किए गए और कई मामलों में उसकी हत्या भी कर दी गई। मनरेगा में व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए इसे और प्रभावी बनाने के लिए कई उपाय किए जा रहे हैं। जैसे, प्रबंध और प्रशासनिक मदद संरचना को सुदृढ़ बनाना, राज्य रोजगार गारंटी कोष का गठन आदि। अब तक का अनुभव रहा है कि जिन राज्यों में पंचायत स्तर तक कामकाज में सरकारी जवाबदेही तय की गई, वहां इसके काफी सकारात्मक नतीजे आए हैं। यदि मनरेगा का कार्यान्वयन सही ढंग से किया जाए तो सामाजिक सुरक्षा को एक नया आयाम मिल सकता है। (लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)

Saturday, October 15, 2011

भाजपा ने येदियुरप्पा से किया किनारा

घोटालों और पुत्रमोह में फंस जेल पहुंचे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा से भाजपा ने पूरी तरह से किनारा कर लिया है। पार्टी का कहना है कि भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह जीरो टोलरेंस का रुख अपनाएगी। येदियुरप्पा के आत्मसमपर्ण करने के बाद भाजपा ने प्रतिक्रिया व्यक्त की कि कानून अपना काम करेगा। येदियुरप्पा के पास कानूनी लड़ाई लड़ने का अधिकार है। लेकिन भाजपा भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। पार्टी ने उनसे इस्तीफा ले लिया था। पार्टी ने पंजाब सरकार में भी अपने मंत्रियों से इस्तीफा ले लिया था और जम्मू-कश्मीर के विधायकों को संस्पेंड किया था। लेकिन कांग्रेस अपने दागी मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को बचा रही है। दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर कॉमनवेल्थ गेम्स में घपले का आरोप है तो गोवा के मुख्यमंत्री कामत पर गैर कानूनी खनन का आरोप है। पी चिदंबरम पर 2जी घोटाले का आरोप है। कांग्रेस इन तीनों को बचा रही है। पार्टी प्रवक्ता जेपी नड्डा ने कहा कि भाजपा भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस रुख अपनाती रहेगी।

येदियुरप्पा के आत्मसमर्पण करने के बाद भाजपा ने प्रतिक्रिया व्यक्त की कि कानून अपना काम करेगा पार्टी ने कहा, येदियुरप्पा के पास कानूनी लड़ाई लड़ने का अधिकार है

येदियुरप्पा पहुंचे जेल

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने विशेष लोकायुक्त न्यायालय के जमीन को गैरअधिसूचित करने के एक मामले में शनिवार को गैरजमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने के उपरांत शुरुआती ढिलाई के बाद अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद अदालत ने उन्हें 22 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत के इस फैसले से राज्य में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की साख को तगड़ा झटका लगा है। येदियुरप्पा इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। इससे पहले लोकायुक्त अदालत ने सरकारी भूमि को गैर अधिसूचित करने में कथित अनियमितता के मामले में आज उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। कोर्ट ने येदियुरप्पा मंत्रिमंडल में मंत्री रहे एसएन कृष्णैया शेट्टी की भी जमानत याचिका खारिज कर दी लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री के पु़त्र बी वाई राघवेंद्र और बी वाई विजयेंद्र तथा दामाद सोहन कुमार समेत 14 अन्य आरोपियों को राहत दी। कोर्ट ने शेट्टी को 22 अक्टूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। कोर्ट में जैसे ही फैसला सुनाया गया, वहां मौजूद शेट्टी गिर पड़े। इसके बाद न्यायाधीश ने जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि उनका समुचित उपचार कराया जाए। खचाखच भरी अदालत में अपना आदेश सुनाते हुए न्यायाधीश एनके सुधींद्र राव ने जमानत पर छोड़े गए लोगों में से प्रत्येक को निर्देश दिया कि वे पांच लाख रुपए की जमानत राशि भरें, सबूतों के साथ छेड़छाड़ न करें और देश छोड़कर न जाएं। कोर्ट ने येदियुरप्पा और शेट्टी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया। येदियुरप्पा खराब सेहत के कारण अदालत में मौजूद नहीं थे पर अदालत ने इसे ध्यान देने योग्य नहीं मानते हुए उन्हें आज ही अदालत में पेश करने का आदेश दिया। इसके बाद येदियुरप्पा ने कानूनी विचार विमर्श किया तथा अदालत में समर्पण करने का निर्णय लिया। भूमि को गैर अधिसूचित करने में अनियमितता का आरोप लगाने वाली शिकायतें अधिवक्ता सिराजिन बाशा ने दर्ज कराई थीं। कोर्ट का आदेश भाजपा और येदियुरप्पा के लिए परेशान करने वाला है। कर्नाटक के इतिहास में पहली बार किसी पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। येदियुरप्पा को दक्षिण भारत में पार्टी की पहली सरकार बनाने का श्रेय जाता है। येदियुरप्पा को गत जुलाई में पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया था। (शेष पेज 2)

Tuesday, October 11, 2011

लोकपाल पर चर्चा के आडियो टेप जारी

सरकार ने लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनी संयुक्त समिति की बैठकों के नौ ऑडियो टेप सोमवार को जारी कर दिए। इन टेप के जरिए टीम अन्ना और पांच केंद्रीय मंत्रियों के बीच प्रस्तावित भ्रष्टाचार निरोधक कानून के दायरे में प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को रखने जैसे विभिन्न प्रावधानों को लेकर तीखे मतभेदों की बात जाहिर होती है। ये टेप आरटीआइ कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल को एक सीडी के जरिए मुहैया कराए गए हैं। बातचीत के एक अंश में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को यह कहते सुना जा सकता है कि किसी मामले में प्रधानमंत्री के दोषी होने की बात जांच पूरी होने के बाद ही साबित हो पाएगी लेकिन जांच के दौरान उनके अंतरराष्ट्रीय रुतबे और जनता की नजर में उनके ओहदे के बारे में भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री को अपना कार्यकाल पूरा करने दिया जाए और उनके खिलाफ कोई भी जांच या अभियोजन उनके पदमुक्त होने के बाद ही हो। सिब्बल की इस बात का टीम अन्ना के सदस्य और कर्नाटक के तत्कालीन लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने कड़ा विरोध किया और कहा, प्रधानमंत्री, उच्च न्यायपालिका और निचली नौकरशाही को बाहर रखने से भ्रष्टाचार निरोधी निकाय के पास काम करने लायक कोई क्षेत्र नहीं बचेगा। वकील प्रशांत भूषण ने कहा, न तो संविधान और न ही किसी कानून के तहत प्रधानमंत्री को रियायत प्राप्त है। भूषण ने बैठकों के दौरान कहा, अगर मामला बनता है तो जांच होगी। वर्तमान में भी सीबीआई जांच कर सकती है लेकिन व्यावहारिक रूप से ऐसा नहीं हो पाता और ऐसा नहीं किया जाता। ऑडियो टेप के अनुसार, बातचीत में केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को हजारे पक्ष के सदस्यों से लोकपाल को अभियोजन के अधिकार दिए जाने के बारे में सवाल करते सुना गया है। वह सवाल कर रहे हैं कि अभियोजन की मंजूरी लोकपाल की पीठ देगी या जांच अधिकारी। खुर्शीद ने कहा, अगर ऐसा लोकपाल की पीठ करेगी तो यह एक अलग बात है। अगर ऐसा अधिकारी करेंगे तो यह अलग होगा। तो अभियोजन शुरू कौन करेगा? आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने जवाब दिया शुरुआत में हमने मंत्रिपरिषद, न्यायाधीशों, प्रधानमंत्री और संसद सदस्यों के बारे में यह कहा है कि अभियोजन की मंजूरी लोकपाल की पीठ देगी। यह लोकपाल की सात सदस्यीय पूर्ण पीठ होगी, लेकिन अन्य के लिए लोकपाल किसी एक अधिकारी से मंजूरी देने को कह सकेगा। इस पर सिब्बल ने सवाल किया, नौकरशाही काम नहीं कर पाएगी। आपको किसी न किसी तरह से अधिकारियों का संरक्षण करना होगा। टेप में हेगड़े को भ्रष्टाचार निरोधी कानून के प्रावधानों और उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए यह कहते सुना जा सकता है कि अभियोजन की मंजूरी देने वाला प्राधिकार यह देख सकता है कि क्या अपराध कर्तव्य निर्वहन के दौरान हुआ है। इस पर सिब्बल ने कहा,बुनियादी रूप से समस्या यही है कि हम यहां इस बात पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। हम एक ऐसी समानांतर एजेंसी बनाने जा रहे हैं जो किसी के प्रति भी जवाबदेह नहीं रहेगी। टेप में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को यह कहते सुना जा सकता है, मैं चर्चा के लिए दोनों ही मसौदे पेश करूंगा, विचार के लिए नहीं। विचार संसद में ही होगा। सरकार को उसे पेश करने के लिए मंजूरी देने से पहले उस पर गौर करना होगा। इस पर केजरीवाल ने कहा, कैबिनेट इनमें से एक को चुनेगी। मुखर्जी ने कहा, या फिर दोनों के मिश्रण को।

Monday, October 10, 2011

मनरेगा से उद्योग बेहाल

गांवों में करोड़ों हाथों को रोजगार मुहैया कराने वाली मनरेगा उद्योग जगत और कृषि क्षेत्र के निशाने पर आ गई है। सरकार की इस प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना के चलते उद्योग श्रमिकों की कमी और मजदूरी बढ़ने से बेहाल हैं। देश के प्रमुख उद्योग चैंबर फिक्की की सर्वे रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। खेती-बाड़ी पर पड़ रहे असर के कारण कृषि मंत्री शरद पवार पहले ही मनरेगा को खेती के मौसम में रोकने का सुझाव दे चुके हैं। फिक्की ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के उद्योग और कृषि क्षेत्र पर पड़ने वाले असर का सर्वेक्षण किया है। सर्वे में पाया गया कि मनरेगा के चलते मजदूरी 10 फीसदी से ज्यादा बढ़ी है। साथ ही मजदूरों की कमी के कारण उद्योगों को संभावित नुकसान भी दस फीसदी आंका गया है। इस योजना की वजह से कंपनियों के खर्च में खासी बढ़ोतरी हुई है। साथ ही उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। इस सर्वे रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि औद्योगिक यूनिटों में किए जाने वाले काम को मनरेगा के तहत शामिल किया जाए। यह उन क्षेत्रों के लिए खासतौर पर फायदेमंद रहेगा, जहां औद्योगिक गतिविधियां ज्यादा हैं। यह सिफारिश भी की गई है कि जब खेती-बाड़ी का काम जोरों पर हो तो इसे बंद कर देना चाहिए। सर्वे में 10 उद्योग संघों के अलावा चमड़ा, कपड़ा, हैंडीक्राफ्ट, रत्न-आभूषण और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र तक फैली सौ से ज्यादा कंपनियों को शामिल किया गया। इससे पहले कृषि मंत्री ने भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर यह सुझाव दिया था कि जब खेती का काम जोरों पर हो तो मनरेगा की योजना निलंबित कर देनी चाहिए। हालांकि, इस योजना को चलाने वाली नोडल एजेंसी के तौर पर काम कर रहा ग्रामीण विकास मंत्रालय इन प्रस्तावों से कतई सहमत नहीं है। चालीस हजार करोड़ रुपये के सालाना बजट वाली मनरेगा के तहत ग्रामीण कामगारों को वर्ष में कम से कम 100 दिनों का रोजगार मुहैया कराया जाता है। इसमें काम करने वाले बेरोजगारों को अलग-अलग राज्यों में रोजाना सौ से डेढ़ सौ रुपये तक मुहैया कराए जाते हैं।

गोवा में खनन घोटाले पर शुक्रवार को बड़ा धमाका करेंगे पार्रिकर

गोवा में अवैध खनन पर लोक लेखा समिति (पीएसी) की रिपोर्ट के राज्य विधानसभा में पेश किए जाने के अध्यक्ष के इंकार और पीएसी अध्यक्ष पद से हटाए गए भाजपा नेता मनोहर पार्रिकर ने शुक्रवार को एक नई रिपोर्ट पेश करने का एलान किया है। पार्रिकर ने दावा किया है कि ठोस दस्तावेजी सबूत पेशकर वह अवैध खनन मामले में कांग्रेस सरकार की पोल पट्टी खोलने को तैयार हैं। विपक्ष के नेता पार्रिकर ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पर उसी के हथियार से वार करने का संकेत देते हुए कहा कि वह इस विवादास्पद मुद्दे पर पार्रिकर लेखा समिति रिपोर्ट लिखेंगे। दरअसल कांगे्रस विधायक उनकी पीएसी रिपोर्ट को हमेशा पार्रिकर लेखा समिति रिपोर्ट बताकर खारिज करते रहे हैं। पार्रिकर ने कहा कि कांग्रेस ने इस रिपोर्ट को विधानसभा में पेश नहीं होने दिया, इसलिए अब वह पार्रिकर लेखा समिति रिपोर्ट तैयार करेंगे जो अवैध खनन का पर्दाफाश करेगी। मनोहर पार्रिकर ने कहा कि रिपोर्ट में अवैध खनन घोटाले से संबंधित दस्तावेज के साथ विस्तृत जांच रिपोर्ट होगी। भाजपा नेता ने कहा कि वह शुक्रवार को इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने दावा किया कि यह रिपोर्ट पीएसी रिपोर्ट जैसी ही वास्तविक होगी और इसमें उपयुक्त प्रमाण भी होंगे।

देश को जगाने का प्रयास करेंगे आडवाणी

वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने रविवार को कहा कि देश भर में उनकी भ्रष्टाचार विरोधी जनचेतना यात्रा के दौरान विदेश में अवैध तरीके से जमा काले धन को भारत में वापस लाने का मुद्दा प्रभावी तरह से रहेगा। अपनी यात्रा के माध्यम से वह देश को जगाने का प्रयास करेंगे और यह बताएंगे कि दुनिया में पहले नंबर का देश बनने के लिए भारत के पास प्रचुर संसाधन और क्षमताएं हैं। उन्होंने कहा, मैं अपनी जनचेतना यात्रा के दौरान देश में व्याप्त भ्रष्टाचार, महंगाई और अत्यधिक गरीबी के मुद्दे को उठाऊंगा। इसके अलावा विदेश में जमा काले धन का मुद्दा भी प्रभावी तरह से छाया रहेगा। आडवाणी ने अपने आवास पर दिल्ली के ग्रामीण इलाकों के लोगों को संबोधित करते हुए यह बात कही। 11 अक्टूबर से शुरू हो रही आडवाणी की यात्रा से पहले उनके सम्मान के लिए समारोह का आयोजन किया गया था। आडवाणी ने कहा, पिछले कई साल से मैं कहता आ रहा हूं कि विदेशी बैंकों में खासतौर पर स्विट्जरलैंड में बड़ी मात्रा में काला धन जमा है। उन्होंने पूर्ववर्ती राजग शासन का जिक्र करते हुए कहा कि स्विस अधिकारियों के साथ विषय को उठाया गया था लेकिन स्विस सरकार ने अपने बैंकिंग गोपनीयता कानूनों के चलते जानकारी देने या धन वापस करने में असमर्थता जताई थी। आडवाणी ने कहा, लोग अकसर हमसे पूछते हैं कि छह साल तक जब हम सत्ता में थे तो काले धन के बारे में हमने क्या किया। मैं उन्हें बताता हूं कि इससे पहले स्विस सरकार ने कभी हमें सूचना की अनुमति नहीं दी। हालांकि अमेरिका और यूरोपीय देशों के दबाव के कारण कानूनों में बदलाव किया गया और स्विट्जरलैंड ने इन खातों का ब्योरा देने की मंजूरी दे दी। आडवाणी ने कहा, वर्ष 2009 में लोकसभा चुनावों के दौरान मैंने पुरजोर तरीके से काले धन का मुद्दा उठाया था। उससे पहले मैंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर कहा था कि स्विट्जरलैंड में बैंक अपने गोपनीयता कानूनों के बावजूद अमेरिका तथा जर्मनी जैसे देशों को धन लौटा रहे हैं तो भारत को उसका काला धन वापस क्यों नहीं मिल सकता।

अन्ना संसद से ऊपर, बना सकते हैं दबाव : केजरीवाल

टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अन्ना हजारे संसद से ऊपर हैं और एक नागरिक की हैसियत से संसद पर दबाव डाल सकते हैं। एक चैनल को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, निश्चित रूप से अन्ना खुद को संसद से ऊपर मानते हैं। हमारे संविधान में लिखा है नागरिक संसद से ऊपर है। यही नहीं हर नागरिक के पास यह अधिकार है कि संसद को बताए कि वो ठीक से काम नहीं कर रही। वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या अन्ना खुद को संसद से ऊपर समझते हैं और जन लोकपाल विधेयक को पारित कराने के लिए बार-बार अनशन की धमकी देना कितना उचित हैं? उन्होंने हिसार उपचुनाव में कांगे्रस के खिलाफ प्रचार के फैसले को न्यायोचित ठहराया। उन्होंने कहा कि जन लोकपाल विधेयक को पारित कराना सत्तारूढ़ दल की जिम्मेदारी है। साथ ही यह भी कहा कि जब अन्ना ने कहा कि वह कांग्रेस के खिलाफ प्रचार करेंगे तो उनका आशय पूरी संप्रग से है। कांग्रेस विरोधी रुख अपनाने पर आलोचनाओं का सामना कर रहे केजरीवाल ने कहा कि अगर भाजपा जन लोकपाल विधेयक के समर्थन के अपने वादे को पूरा नहीं करती तो टीम अन्ना उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उसके खिलाफ भी अभियान चला सकती है। जब उनसे पूछा गया कि भाजपा नेता अरुण जेटली ने कहा है कि उनकी पार्टी लोकपाल विधेयक में शामिल सभी प्रावधानों का समर्थन नहीं करती, इस बाबत केजरीवाल ने कहा, फिलहाल मैं भाजपा अध्यक्ष गडकरी के पत्र को सामने रख रहा हूं। आप कैसे कह सकते हैं कि जेटली सही हैं या गलत हैं अथवा गडकरी सही हैं या गलत हैं। उन्होंने कहा कि कोई पार्टी अपना वादा पूरा करती है या नहीं यह संसद में साबित हो जाएगा। हजारे द्वारा कांग्रेस पर निशाना साधने के सवाल पर केजरीवाल ने कहा कि जिन पांच राज्यों में निकट भविष्य में चुनाव होने हैं वहां गठबंधन के सहयोगी दलों की हिस्सेदारी कम है। हजारे ने हिसार उपचुनाव में जनता से कांग्रेस के उम्मीदवार को वोट नहीं डालने की अपील की है। अन्ना टीम ने सपा या बसपा के खिलाफ प्रचार की घोषणा क्यों नहीं की, जिन्होंने पहले ही हजारे के विधेयक पर आपत्ति जताई है? केजरीवाल ने कहा कि यह पार्टियां विधेयक पारित कराने में शामिल नहीं हैं। कांग्रेस विरोधी रुख से क्या दागी छवि वाले अन्य उम्मीदवारों को मदद नहीं मिलेगी, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हजारे किसी उम्मीदवार को चरित्र प्रमाणपत्र नहीं दे रहे कि कौन अच्छा है या खराब। अन्ना को मनाने में जुटी है कांग्रेस हिसार (हरियाणा), एजेंसी : समाजसेवी अन्ना हजारे की टीम के प्रमुख सहयोगी अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि हिसार लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के मद्देनजर दोनों पक्षों के बीच चल रहे विवाद को समाप्त करने के लिए कांग्रेस के कुछ लोग अन्ना को मनाने में जुटे हैं। हिसार में केजरीवाल ने संवाददाताओं से कहा कि मुझसे किसी ने संपर्क नहीं किया है, लेकिन मेरा मानना है कि कांग्रेस के कुछ लोग अन्ना से संपर्क कर रहे हैं इसके लिए कुछ लोग शनिवार को अन्ना से मिलने भी गए थे। हिसार में कांग्रेस के खिलाफ जोर शोर से चुनाव प्रचार कर रहे केजरीवाल ने कहा कि प्रभावी लोकपाल विधेयक आने तक हमें किसी से समझौता करने की आवश्यकता नहीं है। केजरीवाल ने कहा कि मैं हिसार के लोगों से अपील करता हूं कि वे इस लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस को करारा जवाब दें। दम हो तो चुनाव लड़कर दिखाएं केजरीवाल जागरण संवाददाता, मथुरा : कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल को चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। उन्होंने नसीहत भी दी कि लक्जरी गाडि़यों में घूमने वाले टीम अन्ना के सदस्य कांग्रेस को बदनाम करने की कोशिश न करें। कांग्रेस महासचिव रविवार को आगरा से दिल्ली जाते समय यहां पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के खिलाफ प्रचार कर रहे अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़कर अपना जनसमर्थन दिखाएं। टीम अन्ना के दुष्प्रचार से कांग्रेस की लोकप्रियता पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

दूरसंचार फैसलों से जुड़ीं कई अहम फाइलें गायब

2जी घोटाले की बहुआयामी जांच में एक अप्रत्याशित मोड़ आ गया है। दूरसंचार क्षेत्र में पिछले डेढ़ दशक के दौरान हुए कई अहम और संवेदनशील नीतिगत फैसलों की फाइलें लापता हैं। दूरसंचार घोटाले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति को दूरसंचार विभाग ने लिखित में यह बताया है कि करीब एक दर्जन जरूरी फैसलों और कार्यवाही से जुड़ी फाइलें नदारद हैं। इनमें 1999 में कंपनियों की लाइसेंस फीस माफ करने, अटार्नी जनरल की राय, टीआरएआइ की सिफारिशें, सेवाओं की दरें तय करने और अदालती विवादों से जुड़े कागजात शामिल हैं। कंपनी मामलों का विभाग भी संसदीय समिति को बता चुका है कि प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के इक्विटी ढांचे में फेरबदल के पिछले रिकार्ड उपलब्ध नहीं हैं। जागरण के पास उपलब्ध दस्तावेजों के मुताबिक दूरसंचार विभाग ने संसदीय समिति को अपने उत्तरों में फाइलों के नदारद होने की जानकारी दी है। संसदीय समिति और विभाग के बीच 23 सितंबर के ताजे संवाद में तमाम ऐसी फाइलों का संदर्भ दर्ज है, जो गायब हैं। सरकार में संवेदनशील दस्तावेजों का इस तरह नदारद होना अनदेखा और अनसुना है। लापता दस्तावेजों की पड़ताल से पिछले एक दशक में हुए कई बडे़ फैसलों को लेकर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आ सकते हैं। संसदीय समिति इन फाइलों का इंतजार मई से कर रही है। सरकार ने 1999 में दूरसंचार कंपनियों की लाइसेंस फीस माफ कर दी थी और कंपनियों को राजस्व भागीदारी की प्रणाली के तहत लाया गया था। जिसके तहत कंपनियां अपनी कमाई में एक हिस्सा लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को दे रही हैं। इस फैसले पर तत्कालीन अटार्नी जनरल की राय काफी चर्चित रही थी, इससे जुड़ी फाइलें लापता दर्ज हुई हैं। राजस्व भागीदारी को अपनाने के तर्क, प्रक्रिया और इस पर मंत्रियों व अधिकारियों की राय को बताने वाले दस्तावेज भी गायब हैं। संसदीय समिति ने जानना चाहा था कि आखिर मोबाइल कंपनियों के लाइसेंस की अवधि दस साल और बेसिक फोन कंपनियों के लाइसेंस की अवधि 15 साल क्यों रखी गई। दूरसंचार विभाग के पास इस फैसले से जुड़ी फाइलें भी उपलब्ध नहीं हैं। इसी क्रम में टाटा को तमिलनाडु के सर्किल के लाइसेंस की फाइल भी गायब बताई गई है। दूरसंचार विभाग के पास टीआरएआइ की विभिन्न स्वीकृत और अस्वीकृत सिफारिशों का तारीखवार ब्योरा देने वाले दस्तावेज भी नहीं हैं। इसी तरह चार महानगरों में मोबाइल सेवा की शुरुआती दरों के निर्धारण और कई जरूरी अदालती विवादों के कागजात भी नहीं मिल रहे हैं। हैरत की बात है कि दूरसंचार विभाग के पास 1994 से आज तक फोन कनेक्शन की मांग और आपूर्ति का ब्योरा भी उपलब्ध नहीं हैं।

Sunday, October 2, 2011

भ्रष्टाचार विरोधी जंग में पिछड़े आगे आएं

लखनऊ भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने यहां रविवार को पिछड़े व अति पिछड़े समाज से एकजुट हो भ्रष्टाचार विरोधी जंग में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने सत्ता में आने पर अतिपिछड़ों की भागीदारी सुनिश्चित किए जाने का आश्र्वासन भी दिया। वह गोमती के तट पर झूलेलाल पार्क में रविवार को हुए सामाजिक न्याय महासम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इसे पिछड़े वर्ग की वोट हासिल करने की बेकरारी ही माने जो राजधानी में चार दिन के भीतर भाजपा के शीर्ष नेताओं ने खुद को पिछड़ों व अतिपिछड़ों का शुभचिंतक साबित करने के लिए कई घोषणाएं की। बीते 29 सितंबर को भी पार्टी ने चारबाग स्थित बाल मंदिर में पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ द्वारा सामाजिक न्याय सम्मेलन का आयोजन किया था। उसमें राजनाथ सिंह, उमा भारती, सूर्यप्रताप शाही, सुशील शाक्य व लाल जी टंडन जैसे वरिष्ठ नेताओं ने सपा और बसपा को पिछड़ा विरोधी करार देते हुए भाजपा सरकारों में हुए कार्यो की जानकारी दी थी। ठीक तीन दिन बाद गोमती तट पर भाजपा ट्रेड एंड इंडस्ट्री प्रकोष्ठ एवं साहू राठौर चेतना समिति के संयुक्त तत्वावधान में उन्हीं भाजपा नेताओं ने कमोवेश वहीं बातें दोहराई। पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने साहू समाज को महात्मा गांधी से जोड़ते हुए देश निर्माण में उनकी भूमिका को सराहा। कहा कि गांधी जी के नाम पर राजनीति करने वाली कांग्रेस उन्हें भूल चुकी है, जबकि भाजपा ही उनके स्वदेशी, स्वराज और ग्रामोत्थान के सिद्धांतों को बढ़ावा दे रही है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने खुद को पिछड़े वर्ग की बेटी होने पर गर्व की बात दोहराते हुए कहा कि प्रदेश को उत्तम प्रदेश व भारत को विश्र्व शक्ति बनाने के लिए पिछड़ों को आगे आकर अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने गऊ व गंगा अभियान में भी पिछड़ों से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रदेश की राजनीति भी मैली हो चुकी है। इसके शुद्धिकरण की भी जरूरत है। सपा बसपा ने लोहिया व अंबेडकर जैसे महापुरुषों को भूल अपराधियों व भ्रष्टाचारियों को शामिल कर लिया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र का कहना था कि दीनदयाल उपाध्याय के सिद्धांतों पर चलने वाले भाजपा ही समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास चाहती है। प्रदेशाध्यक्ष सूर्यप्रताप शाही व सांसद लालजी टंडन ने पिछड़ों व दलितों के नाम पर वोट की राजनीति करने वाले विपक्षी दलों को आड़े हाथों लिया। पिछड़ों को पार्टी में भरपूर सम्मान का आश्र्वासन दिया। प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी व पूर्व सांसद रामनारायण साहू ने आगंतुकों का आभार जताते हुए भाजपा की सत्ता में वापसी को पिछड़ा वर्ग को एक जुट कर कंधे से कंधा मिला सहयोग करने का एलान किया

राष्ट्रमंडल खेल रियल ही नहीं रील में भी उलझन

नई दिल्ली सालभर पहले ठीक आज के ही दिन को जरा याद कीजिए। जिस तरह सुना था कि खेल के आयोजन से एकता और भाईचारे की भावना बढ़ती है, बिल्कुल वैसा ही हुआ। राष्ट्रमंडल खेल की तैयारियों पर लगे प्रश्नचिह्न को भूल 3 अक्टूबर को पूरी दिल्ली एक हो गई। शान से राष्ट्रमंडल खेल की शुरुआत हुई और 14 अक्टूबर को समापन भी हो गया। देश में पहली बार आयोजित राष्ट्रमंडल खेल की याद को संजोने के लिए खेल आयोजन समिति ने फिल्म तैयार करने का फैसला लिया। अक्टूबर में ही फिल्म बनाने का काम शुरू हुआ जो इस वर्ष मार्च में पूरा हो गया। किंतु खेल के आयोजन में वाहवाही से ज्यादा घोटाले को लेकर जिस तरह बदनामी हुई, तैयार फिल्म को रिलीज करने की जहमत कोई नहीं उठाना चाहता। आयोजन समिति में सूचना एवं प्रसार की जिम्मेदारी निभा चुकी प्रिया पॉल कहती हैं कि समिति ने खेल के आयोजन को बेहतर से बेहतर दिखाने के लिए फिल्म तैयार करवाई। इसके बनने के बाद आज तक कोई उपयुक्त माहौल नहीं मिला जिसके चलते फिल्म रिलीज नहीं हो सकी। चूंकि 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त होने से सूचना एवं प्रसार विभाग के सभी अधिकारी आयोजन समिति से विदा हो गए तो तैयार फिल्म समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जरनैल सिंह को सौंप दी गई है। आयोजन समिति के निर्देश पर फिल्म निर्देशक रमेश शर्मा ने राष्ट्रमंडल खेल पर 50 मिनट की फिल्म बनाई है। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने ऐसा किया ही किया। बिहाइंड द सीन नामक 50 मिनट की फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि खेल का आयोजन बहुत ही सलीके से और सफलतापूर्वक किया गया है। जिस आयोजन समिति ने राष्ट्रमंडल खेल के थीम सांग के लिए करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान किया था, उसके द्वारा फिल्म बनाने में करीब 60 लाख रुपये खर्च किए जाने की बात कही गई है। फिल्म के कलाकार भी ज्यादातर आयोजन समिति के सदस्य हंै। फिल्म की ज्यादातर शूटिंग जयसिंह मार्ग स्थित आयोजन समिति के मुख्यालय में हुई। फिल्म निर्माण के दौरान मुख्यालय के आठवें और नौवें मंजिल पर तमाम जांच अधिकारी खेल में हुए घोटालों को लेकर समिति के आला अधिकारियों से पूछताछ कर रहे थे तो वहीं अन्य मंजिलों पर फिल्म की शूटिंग भी चल रही थी

रामदेव समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई की जांच से पीछे हटा आयोग

रामलीला मैदान पर रामदेव समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई की जांच मानवाधिकार आयोग और नहीं करेगा। सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान में लेने पर आयोग जांच से पीछे हट गया है। दिल्ली पुलिस ने अपनी पेशी के दौैरान आयोग को सूचना दी थी कि रामलीला मैदान की घटना की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हो रही है। दिल्ली पुलिस की इस सूचना के बाद ही आयोग ने अपनी जांच आगे न बढ़ाने का फैसला किया है। मानवाधिकार आयोग ने रामलीला मैदान में योग गुरु रामदेव के समर्थकों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान राजबाला के गंभीर रूप से जख्मी होने (और बाद में मृत्यु) पर चिंता जताई थी। आयोग ने दिल्ली के मुख्य सचिव से 23 सितंबर तक राजबाला के स्वास्थ्य और उसे दी जाने वाली अनुग्रह राशि के बारे जानकारी देने को कहा था। दिल्ली सरकार इस तिथि तक जानकारी उपलब्ध कराने में विफल रही। पिछले सप्ताह गंभीर रूप से घायल राजबाला की 26 सितंबर को अस्पताल में ही मौत हो गई थी

अनिल अंबानी को क्लीनचिट के बाद सीबीआइ का यू टर्न

सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में 2जी मामले में दायर स्टेटस रिपोर्ट में एडीएजी चेयरमैन अनिल अंबानी को विभिन्न कंपनियों के पुनर्गठन और स्पेक्ट्रम हासिल करने वाली कंपनी स्वान टेलीकाम को हस्तांतरित किए गए धन के मामले में बेदाग बताने के बाद यू टर्न ले लिया है। रविवार को जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया वह घोटाले में अब भी अनिल अंबानी की भूमिका की जांच कर रही है और उसने अब तक उन्हें कोई क्लीन चिट नहीं दी है। इससे पहले सीबीआइ ने जेल में बंद रिलायंस कम्युनिकेशंस के तीनों अफसरों के सरकारी गवाह बनने की संभावना जताई थी। अनिल को क्लीन चिट की खबरों के बाद सीबीआइ सूत्रों ने जांच एजेंसी के वकील द्वारा दो दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट में दिए गए बयान पर सफाई दी। कोर्ट में सीबीआइ वकील ने कहा था कि स्वान टेलीकॉम में 9.9 फीसदी शेयर के मामले को लेकर अनिल और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। ये शेयर मॉरीशस स्थित डेल्फी कंपनी को बेचे गए थे। सीबीआइ ने यह जवाब इस मामले में याचिका दायर करने वाले वकील प्रशांत भूषण की ओर से अदालत में दिए एक पत्र के जवाब में दिया है। वैसे सीबीआइ ने कोर्ट में दायर स्टेटस रिपोर्ट में कहा है, जांच में ऐसा कोई मौखिक या लिखित सबूत नहीं मिला है जिससे लगता हो कि विभिन्न कंपनियों के पुनर्गठन और धन के हस्तांतरण में अनिल अंबानी संलिप्त हैं। सीबीआइ ने कहा कि समग्र सेवा लाइसेंस के लिए दूरसंचार विभाग में आवेदन करने के समय स्वान टेलीकाम प्रा. लि. में मैसर्स टाइगर ट्रेडर्स प्रा. लि. और मैसर्स रिलायंस टेलीकाम 9.1-9.1 फीसदी की हिस्सेदार थीं। टाइगर ट्रेडर्स में जेब्रा कंसल्टेंट्स और मैसर्स पैरट कंसल्टेंट्स की हिस्सेदारी थी। ये तीनों कंपनियां एक दूसरे में हिस्सेदार थीं। स्वान के शेयर खरीदने के लिए टाइगर ट्रेडर्स ने जो धन लगाया उसका स्रोत मैसर्स एडीएई वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड था। दो मार्च, 2007 को टाइगर ट्रेडर्स ने स्वान टेलीकाम में 95.50 करोड़ रुपये का निवेश किया था। यह पैसा सोनाटा इन्वेस्टमेंट से आया था। इसके अलावा टाइगर ट्रेडर्स को कुछ पैसा एएए कंसल्टेंसी सर्विसेज प्रा. लि. से भी मिला था। जांच एजेंसी ने कहा कि अनिल व उनकी पत्नी टीना अंबानी एएए कंसल्टेंसी और एडीएई वेंचर्स के मूल प्रवर्तक थे पर उन्होंने मार्च-अप्रैल 2006 में इन कंपनियों के शेयर टाइगर ट्रेडर्स, जेब्रा कंसल्टेंट्स और पैरट कंसल्टेंट्स को हस्तांतरित कर दिए थे। इस तरह स्वान टेलीकाम द्वारा यूएएस लाइसेंस के आवेदन के समय (2-3-2007) इन कंपनियों के साथ अनिल अंबानी या उनकी पत्नी का न तो शेयरधारक का संबंध था और न ही वे इनके प्रबंधन से संबद्ध थे