Sunday, October 2, 2011
राष्ट्रमंडल खेल रियल ही नहीं रील में भी उलझन
नई दिल्ली सालभर पहले ठीक आज के ही दिन को जरा याद कीजिए। जिस तरह सुना था कि खेल के आयोजन से एकता और भाईचारे की भावना बढ़ती है, बिल्कुल वैसा ही हुआ। राष्ट्रमंडल खेल की तैयारियों पर लगे प्रश्नचिह्न को भूल 3 अक्टूबर को पूरी दिल्ली एक हो गई। शान से राष्ट्रमंडल खेल की शुरुआत हुई और 14 अक्टूबर को समापन भी हो गया। देश में पहली बार आयोजित राष्ट्रमंडल खेल की याद को संजोने के लिए खेल आयोजन समिति ने फिल्म तैयार करने का फैसला लिया। अक्टूबर में ही फिल्म बनाने का काम शुरू हुआ जो इस वर्ष मार्च में पूरा हो गया। किंतु खेल के आयोजन में वाहवाही से ज्यादा घोटाले को लेकर जिस तरह बदनामी हुई, तैयार फिल्म को रिलीज करने की जहमत कोई नहीं उठाना चाहता। आयोजन समिति में सूचना एवं प्रसार की जिम्मेदारी निभा चुकी प्रिया पॉल कहती हैं कि समिति ने खेल के आयोजन को बेहतर से बेहतर दिखाने के लिए फिल्म तैयार करवाई। इसके बनने के बाद आज तक कोई उपयुक्त माहौल नहीं मिला जिसके चलते फिल्म रिलीज नहीं हो सकी। चूंकि 30 सितंबर को कार्यकाल समाप्त होने से सूचना एवं प्रसार विभाग के सभी अधिकारी आयोजन समिति से विदा हो गए तो तैयार फिल्म समिति के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जरनैल सिंह को सौंप दी गई है। आयोजन समिति के निर्देश पर फिल्म निर्देशक रमेश शर्मा ने राष्ट्रमंडल खेल पर 50 मिनट की फिल्म बनाई है। सूत्र बताते हैं कि उन्होंने ऐसा किया ही किया। बिहाइंड द सीन नामक 50 मिनट की फिल्म में यह दिखाने की कोशिश की गई है कि खेल का आयोजन बहुत ही सलीके से और सफलतापूर्वक किया गया है। जिस आयोजन समिति ने राष्ट्रमंडल खेल के थीम सांग के लिए करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान किया था, उसके द्वारा फिल्म बनाने में करीब 60 लाख रुपये खर्च किए जाने की बात कही गई है। फिल्म के कलाकार भी ज्यादातर आयोजन समिति के सदस्य हंै। फिल्म की ज्यादातर शूटिंग जयसिंह मार्ग स्थित आयोजन समिति के मुख्यालय में हुई। फिल्म निर्माण के दौरान मुख्यालय के आठवें और नौवें मंजिल पर तमाम जांच अधिकारी खेल में हुए घोटालों को लेकर समिति के आला अधिकारियों से पूछताछ कर रहे थे तो वहीं अन्य मंजिलों पर फिल्म की शूटिंग भी चल रही थी
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