Sunday, October 2, 2011

अनिल अंबानी को क्लीनचिट के बाद सीबीआइ का यू टर्न

सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट में 2जी मामले में दायर स्टेटस रिपोर्ट में एडीएजी चेयरमैन अनिल अंबानी को विभिन्न कंपनियों के पुनर्गठन और स्पेक्ट्रम हासिल करने वाली कंपनी स्वान टेलीकाम को हस्तांतरित किए गए धन के मामले में बेदाग बताने के बाद यू टर्न ले लिया है। रविवार को जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया वह घोटाले में अब भी अनिल अंबानी की भूमिका की जांच कर रही है और उसने अब तक उन्हें कोई क्लीन चिट नहीं दी है। इससे पहले सीबीआइ ने जेल में बंद रिलायंस कम्युनिकेशंस के तीनों अफसरों के सरकारी गवाह बनने की संभावना जताई थी। अनिल को क्लीन चिट की खबरों के बाद सीबीआइ सूत्रों ने जांच एजेंसी के वकील द्वारा दो दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट में दिए गए बयान पर सफाई दी। कोर्ट में सीबीआइ वकील ने कहा था कि स्वान टेलीकॉम में 9.9 फीसदी शेयर के मामले को लेकर अनिल और अन्य कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। ये शेयर मॉरीशस स्थित डेल्फी कंपनी को बेचे गए थे। सीबीआइ ने यह जवाब इस मामले में याचिका दायर करने वाले वकील प्रशांत भूषण की ओर से अदालत में दिए एक पत्र के जवाब में दिया है। वैसे सीबीआइ ने कोर्ट में दायर स्टेटस रिपोर्ट में कहा है, जांच में ऐसा कोई मौखिक या लिखित सबूत नहीं मिला है जिससे लगता हो कि विभिन्न कंपनियों के पुनर्गठन और धन के हस्तांतरण में अनिल अंबानी संलिप्त हैं। सीबीआइ ने कहा कि समग्र सेवा लाइसेंस के लिए दूरसंचार विभाग में आवेदन करने के समय स्वान टेलीकाम प्रा. लि. में मैसर्स टाइगर ट्रेडर्स प्रा. लि. और मैसर्स रिलायंस टेलीकाम 9.1-9.1 फीसदी की हिस्सेदार थीं। टाइगर ट्रेडर्स में जेब्रा कंसल्टेंट्स और मैसर्स पैरट कंसल्टेंट्स की हिस्सेदारी थी। ये तीनों कंपनियां एक दूसरे में हिस्सेदार थीं। स्वान के शेयर खरीदने के लिए टाइगर ट्रेडर्स ने जो धन लगाया उसका स्रोत मैसर्स एडीएई वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड था। दो मार्च, 2007 को टाइगर ट्रेडर्स ने स्वान टेलीकाम में 95.50 करोड़ रुपये का निवेश किया था। यह पैसा सोनाटा इन्वेस्टमेंट से आया था। इसके अलावा टाइगर ट्रेडर्स को कुछ पैसा एएए कंसल्टेंसी सर्विसेज प्रा. लि. से भी मिला था। जांच एजेंसी ने कहा कि अनिल व उनकी पत्नी टीना अंबानी एएए कंसल्टेंसी और एडीएई वेंचर्स के मूल प्रवर्तक थे पर उन्होंने मार्च-अप्रैल 2006 में इन कंपनियों के शेयर टाइगर ट्रेडर्स, जेब्रा कंसल्टेंट्स और पैरट कंसल्टेंट्स को हस्तांतरित कर दिए थे। इस तरह स्वान टेलीकाम द्वारा यूएएस लाइसेंस के आवेदन के समय (2-3-2007) इन कंपनियों के साथ अनिल अंबानी या उनकी पत्नी का न तो शेयरधारक का संबंध था और न ही वे इनके प्रबंधन से संबद्ध थे

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