सरकार ने लोकपाल विधेयक का मसौदा तैयार करने के लिए बनी संयुक्त समिति की बैठकों के नौ ऑडियो टेप सोमवार को जारी कर दिए। इन टेप के जरिए टीम अन्ना और पांच केंद्रीय मंत्रियों के बीच प्रस्तावित भ्रष्टाचार निरोधक कानून के दायरे में प्रधानमंत्री और न्यायपालिका को रखने जैसे विभिन्न प्रावधानों को लेकर तीखे मतभेदों की बात जाहिर होती है। ये टेप आरटीआइ कार्यकर्ता सुभाष अग्रवाल को एक सीडी के जरिए मुहैया कराए गए हैं। बातचीत के एक अंश में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल को यह कहते सुना जा सकता है कि किसी मामले में प्रधानमंत्री के दोषी होने की बात जांच पूरी होने के बाद ही साबित हो पाएगी लेकिन जांच के दौरान उनके अंतरराष्ट्रीय रुतबे और जनता की नजर में उनके ओहदे के बारे में भी विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री को अपना कार्यकाल पूरा करने दिया जाए और उनके खिलाफ कोई भी जांच या अभियोजन उनके पदमुक्त होने के बाद ही हो। सिब्बल की इस बात का टीम अन्ना के सदस्य और कर्नाटक के तत्कालीन लोकायुक्त संतोष हेगड़े ने कड़ा विरोध किया और कहा, प्रधानमंत्री, उच्च न्यायपालिका और निचली नौकरशाही को बाहर रखने से भ्रष्टाचार निरोधी निकाय के पास काम करने लायक कोई क्षेत्र नहीं बचेगा। वकील प्रशांत भूषण ने कहा, न तो संविधान और न ही किसी कानून के तहत प्रधानमंत्री को रियायत प्राप्त है। भूषण ने बैठकों के दौरान कहा, अगर मामला बनता है तो जांच होगी। वर्तमान में भी सीबीआई जांच कर सकती है लेकिन व्यावहारिक रूप से ऐसा नहीं हो पाता और ऐसा नहीं किया जाता। ऑडियो टेप के अनुसार, बातचीत में केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद को हजारे पक्ष के सदस्यों से लोकपाल को अभियोजन के अधिकार दिए जाने के बारे में सवाल करते सुना गया है। वह सवाल कर रहे हैं कि अभियोजन की मंजूरी लोकपाल की पीठ देगी या जांच अधिकारी। खुर्शीद ने कहा, अगर ऐसा लोकपाल की पीठ करेगी तो यह एक अलग बात है। अगर ऐसा अधिकारी करेंगे तो यह अलग होगा। तो अभियोजन शुरू कौन करेगा? आरटीआई कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल ने जवाब दिया शुरुआत में हमने मंत्रिपरिषद, न्यायाधीशों, प्रधानमंत्री और संसद सदस्यों के बारे में यह कहा है कि अभियोजन की मंजूरी लोकपाल की पीठ देगी। यह लोकपाल की सात सदस्यीय पूर्ण पीठ होगी, लेकिन अन्य के लिए लोकपाल किसी एक अधिकारी से मंजूरी देने को कह सकेगा। इस पर सिब्बल ने सवाल किया, नौकरशाही काम नहीं कर पाएगी। आपको किसी न किसी तरह से अधिकारियों का संरक्षण करना होगा। टेप में हेगड़े को भ्रष्टाचार निरोधी कानून के प्रावधानों और उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला देते हुए यह कहते सुना जा सकता है कि अभियोजन की मंजूरी देने वाला प्राधिकार यह देख सकता है कि क्या अपराध कर्तव्य निर्वहन के दौरान हुआ है। इस पर सिब्बल ने कहा,बुनियादी रूप से समस्या यही है कि हम यहां इस बात पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। हम एक ऐसी समानांतर एजेंसी बनाने जा रहे हैं जो किसी के प्रति भी जवाबदेह नहीं रहेगी। टेप में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को यह कहते सुना जा सकता है, मैं चर्चा के लिए दोनों ही मसौदे पेश करूंगा, विचार के लिए नहीं। विचार संसद में ही होगा। सरकार को उसे पेश करने के लिए मंजूरी देने से पहले उस पर गौर करना होगा। इस पर केजरीवाल ने कहा, कैबिनेट इनमें से एक को चुनेगी। मुखर्जी ने कहा, या फिर दोनों के मिश्रण को।
Tuesday, October 11, 2011
लोकपाल पर चर्चा के आडियो टेप जारी
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