Tuesday, November 22, 2011

कारगिल घोटाले पर सरकार की चुप्पी से सुप्रीमकोर्ट खिन्न

सुप्रीमकोर्ट ने कारगिल युद्ध के दौरान उपकरणों व अन्य सामान की खरीद में हुए घोटाले में संलिप्त अफसरों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करने पर सोमवार को केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ऐसे नहीं चलेगा। न्यायमूर्ति आफताब आलम की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की हीलाहवाली पर नाराजगी जताते हुए कहा,वे सख्त नहीं होना चाहते। उदारता दिखा रहे हैं, लेकिन इस तरह नहीं चलेगा। पीठ ने ये टिप्पणियां अदालत के न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी की दलीलें सुनने के बाद कीं। इससे पहले द्विवेदी ने पीठ को बताया कि जब से इस घोटाले का पता चला है तब से अभी तक सरकार ने किसी के भी खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं की है। सरकार में राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी है, जबकि कैग की रिपोर्ट में 2000 करोड़ के रक्षा उपकरणों की खरीद में गड़बडि़यों की बात कही गई है। उनकी दलीलें सुनने के बाद पीठ ने केंद्र सरकार के वकील से कहा, वे इससे जरा भी खुश नहीं हैं। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा,सरकार कार्रवाई कर रही है और मामले पर विचार विमर्श चल रहा है। आज मामले में संक्षिप्त सुनवाई हुई। अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी। सुप्रीमकोर्ट में वर्ष 2004 से एक जनहित याचिका लंबित है जिसमें कारगिल युद्ध के दौरान चले आपरेशन विजय के लिए रक्षा उपकरणों की खरीद में हुई गड़बडि़यों का मामला उजागर किया गया है। इस याचिका में कैग की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के लिए 2163 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे गए, लेकिन इस खरीद का 75 फीसदी हिस्सा कारगिल संघर्ष समाप्त होने के बाद प्राप्त हुआ। लिहाजा इससे कारगिल अभियान में मदद नहीं मिली। पिछली सुनवाई पर भी कोर्ट ने कैग रिपोर्ट पर ध्यान नहीं देने पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर सरकारी विभाग कैग रिपोर्ट को दबाए रखेंगे और अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने से इनकार करते रहेंगे तो देश में अराजक स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। कैग ने रक्षा उपकरण खरीद के इस मामले में गड़बडि़यों के 35 मामले पाए थे, लेकिन रक्षा विभाग ने अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था 28 मामलों में कोई दम नहीं है।

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