Monday, November 7, 2011

विमान खरीद में एक दर्जन अफसरों पर एफआइआर की तैयारी

2जी स्पेक्ट्रम व राष्ट्रमंडल खेल घोटाले के बाद अब एयरबस और पूर्ववर्ती इंडियन एयरलाइंस के बीच हुआ विमान खरीद डील यूपीए सरकार के लिए नई मुसीबत बन सकती है। 43 विमान खरीद के करीब 9000 करोड़ रुपये के इस सौदे में हेराफेरी के पुख्ता सबूत सीबीआइ को मिले हैं। जांच एजेंसी इसे लेकर नागरिक उड्डयन मंत्रालय के संयुक्त सचिव व उससे ऊपर के लगभग एक दर्जन अफसरों के खिलाफ एफआइआर करने जा रही है। इसके लिए वह सरकार से अनुमति मांगेगी, क्योंकि इन पद वाले अफसरों के खिलाफ बिना अनुमति केस दर्ज नहीं किया जा सकता। कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में इस डील पर सवाल उठाए थे। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, एयरबस व इंडियन एयरलाइंस डील की प्रारंभिक जांच में बड़े स्तर पर आपराधिक साजिश के ठोस सबूत मिले हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक दर्जन से अधिक अफसरों की भूमिका संदेह के घेरे में है। सीबीआइ इनके खिलाफ एफआइआर दर्ज मामले की जांच करना चाहती है। इसके लिए सरकार से पूर्व अनुमति मांगने जा रही है। 2006 में इंडियन एयरलाइंस ने एयरबस के साथ 9000 करोड़ रुपये से अधिक के 43 हवाई जहाज खरीदने का फैसला किया था। इसे उच्चाधिकार प्राप्त मंत्रिसमूह ने हरी झंडी दी थी। डील पर हस्ताक्षर करते समय इसके प्रावधानों को बदल दिया गया। मंत्रिसमूह नेजिस डील को हरी झंडी दी थी, उसके तहत हवाई जहाजों की मरम्मत व रखरखाव के लिए एयरबस को भारत में 18 करोड़ डालर का निवेश करना था, पर अंतिम समझौते में इसे गोलमोल कर दिया गया। सीबीआइ जांच में इस गड़बड़ी में उड्डयन मंत्रालय के कई वरिष्ठ अफसरों की भूमिका सामने आई है। ये अधिकारी संयुक्त सचिव या इससे ऊपर के पदों पर बैठे हैं। यही वजह है कि सीबीआइ को इनके खिलाफ एफआइआर के लिए सरकार से अनुमति लेनी पड़ रही है। अनुमति मिलते ही एफआइआर दर्ज कर इनके खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। वैसे कैग की रिपोर्ट में पूर्ववर्ती एयर इंडिया व बोइंग के बीच हुए 68 विमानों के सौदे पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इन दोनों सौदों पर कैग की रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला था। विपक्ष का आरोप है कि एयर इंडिया की बदहाली के पीछे इन सौदों की बड़ी भूमिका है, क्योंकि पैसे न होते हुए भी अनावश्यक रूप से फालतू विमानों की खरीद की गई। तत्कालीन उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने तब कहा था कि उस समय के हालात में यह सौदा जरूरी था।

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