Friday, November 25, 2011

कोयले की दलाली से खेल रहा था करोड़ों में

भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के ठेकेदार लाल बहादुर सिंह के झरिया स्थित आवास समेत अन्य ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापा मारकर करीब 100 करोड़ रुपये की सम्पत्ति जब्त की है। साथ ही एक ही बैंक में दर्जनों खातों में 80 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा होने के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा धनबाद, रानीगंज एवं झरिया के डाकघरों में पैसा जमा होने की बात भी सामने आई है। बैंक ऑफ इंडिया की ऐना शाखा में जमा 75 करोड़ रुपये आयकर विभाग के अधिकारियों ने जब्त कर लिये। बताया जा रहा है कि बीसीसीएल ठेकेदार के खाते से पटना के एक युवक के खाते में गलती से 15 करोड़ रुपये क्रेडिट हो गया था। एक खाते में इतनी बड़ी राशि जमा होने पर पटना के बैंक प्रबंधन को शक हुआ। बैंक प्रबंधक ने खाताधारी से रुपये के बारे में पूछताछ की। पूछताछ में खाताधारी ने इतनी बड़ी रकम के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। इसके बाद बैंक प्रबंधक ने इसकी सूचना आयकर विभाग को दी। बैंक प्रबंधक की सूचना के आधार पर आयकर विभाग ने जब जांच पड़ताल की तो पता चला कि यह राशि झरिया के बीसीसीएल ठेकेदार लाल बहादुर सिंह के खाते से ट्रांसफर हुआ है। इसका खुलासा होने के बाद आयकर विभाग की निगाहें ठेकेदार पर तिरछी हो गई। आयकर विभाग के एडिशनल डायरेक्टर अजीत कुमार सिंह ने धनबाद एवं जमशेदपुर की टीम को रांची बुलाया और इस मामले की जांच व छापेमारी के लिए पटना के एडीआई सुमन कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित की। इसके बाद आयकर विभाग की टीम ने बुधवार को ठेकेदार के झरिया सिमलाबहाल स्थित आवास समेत सभी संभावित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यहां तक कि ठेकेदार के सीए और चालक भी नहीं बच पाए। जांच पड़ताल के क्रम में बैंक ऑफ इंडिया की ऐना शाखा में 75 करोड़ की राशि जमा होने का पता चला। यह राशि देर रात इनकम टैक्स कमिश्नर धनबाद के एकाउंट में ट्रांसफर कर दी गई। मालूम हो कि हाल ही में कोयला स्टॉक की मापी में गड़बड़ी पकड़ी जाने पर सीबीआई इंस्पेक्टर को पांच लाख रुपये घूस देने के आरोप में जीएम एसके सिंह को गिरफ्तार किया गया था। जीएम को तुरंत पांच लाख रुपये कहां से मुहैया कराये गये इसकी भी जांच सीबीआई कर रही है और इस मामले में ठेकेदार लाल बहादुर सिंह भी शक के घेरे में हैं। बीसीसीएल ठेकेदार के पास इतनी बड़ी रकम होने के पीछे बीसीसीएल के चंद अधिकारियों की भी मिलीभगत की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि ठेकेदार को काम दिया जाता था और बिना काम कराये बिल का भुगतान कर दिया जाता था। आयकर विभाग को कई अचल सम्पत्ति के बारे में भी जानकारी मिली है जिसकी जांच की जा रही है।

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