राजग के कार्यकारी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने बुधवार को सरकार से मांग की कि विदेशी बैंकों में जमा कथित रूप से 25 लाख करोड़ रु देश में वापस लाने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं और इस बारे में ेतपत्र जारी कर विदेशों में काला धन रखने वाले सभी लोगों के नाम भी बताए जाएं। लोकसभा में कार्यस्थगन प्रस्ताव के तहत काले धन पर चर्चा की शुरुआत करते हुए आडवाणी ने कहा, ‘सरकार काला धन रखने वालों की पूरी की पूरी सूची जारी करें। कोई भी नाम छिपाया नहीं जाना चाहिए। विदेशों में काला धन रखने वाले किसी व्यक्ति का बचाव न करें और अगर हमारा भी नाम हो तो भी उसे बताएं।’ उन्होंने कहा कि यह बात उनकी समझ से परे है कि सरकार को जब विदेशों में काला धन रखने वाले 600 से अधिक लोगों के नामों का पता चल गया है तो वह उन्हें देश को बताने में क्यों झिझक रही है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की उपस्थिति में भाजपा नेता ने कहा, ‘विदेशों में काला धन रखने वाले भारतीय लोगों से केवल कर लेकर बात खत्म नहीं कर देनी चाहिए, बल्कि ऐसे लोगों को दंडित किया जाना चाहिए।’ आडवाणी ने पूछा, सरकार ने अब तक विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन को वापस लाने के लिए क्या प्रयत्न किए हैं। आडवाणी ने कहा कि भाजपा के सभी सांसदों ने 9 दिसम्बर को भ्रष्टाचार विरोधी दिवस के अवसर पर संसद में हलफनामा दिया है कि विदेशों में उनका कोई अवैध खाता या संपत्ति नहीं है। उन्होंने सरकार से कहा कि वह ऐसा नियम बनाए जिसके तहत सभी सांसदों के लिए यह आवश्यक हो कि वे अपने अपने सदन में यह हलफनामा दें कि विदेशों में उसका कोई अवैध खाता या संपत्ति नहीं है। आडवाणी ने राजग शासन के दौरान विदेशों से काला धन वापस लाए जाने के प्रयास नहीं करने के आरोपों के संदर्भ में कहा, ‘कहा जाता है कि जब हम शासन में थे तो हमने क्यों नहीं किया। यह स्थिति पहले नहीं थी।’ उन्होंने यह भी जानना चाहा कि संयुक्त राष्ट्र की भ्रष्टाचार विरोधी संधि जब 2003 में अस्तित्व में आ चुकी थी तो सरकार ने उसका अनुमोदन करने में 2011 तक का विलंब क्यों किया। ‘आडवाणी ने हवाला मामले में जेल में बंद हसन अली का उल्लेख करते हुए सरकार से जानना चाहा कि आखिर यह कौन व्यक्ति है और उसके किस-किस से संबंध हैं। भाजपा नेता ने सरकार से आग्रह किया कि वह जल्द से जल्द विदेशों में काला धन रखने वाले भारतीयों के नामों को उजागर करे, वरना ऐसा न हो कि हमें 2012 में उस शर्मनाक स्थिति का सामना करना न पड़े जब विकिलीक्स की ओर से जूलियन असांजे ऐसा कर दे। जिस वक्त आडवाणी काले धन पर अपनी बात रख रहे थे उस समय सदन में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी उपस्थित नहीं थे। बीजू जनता दल के भृतुहरि मेहताब ने देश को काले धन से बचाने की जरूरत पर बल दिया था। शिवसेना के अनंत गीते ने सरकार से जानना चाहा कि वह काले धन को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। अन्नाद्रमुक के एम थंबिदुरई ने कहा कि काला धन रियल इस्टेट में बड़ी मात्रा में लगाया जा रहा है। तेलुगूदेशम पार्टी के एन नागेर राव ने कहा कि कालाधन पर नियंतण्रकी जिम्मेदारी सरकार की है और कांग्रेस सदस्य मनीष तिवारी के बयान से लगता है कि वह सरकार का बचाव कर रहे हैं । भाकपा के प्रबोध पांडा ने कहा कि अवैध खाताधारकों के नाम घोषित और उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं। ये चोरी का धन है -मुलायम : सपा के मुलायम सिंह यादव ने कहा, ‘काले धन को चोरी का धन कहना चाहिए। देश पर जितना कर्ज है, उसका दोगुना काला धन है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनेताओं पर काला धन रखने के आरोप लगते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सबसे अधिक काला धन नौकरशाहों के पास है। मुलायम ने सदन में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की मौजूदगी में चुटकी ली, ‘ काला धन वापस लाओगे तो फिर सरकार बनाओगे।’
Friday, December 16, 2011
वापस लाओ काला धन
Monday, December 5, 2011
एनआरएचएम की ठेकेदारी में उजागर हुए बड़े चेहरे
एनआरएचएम घोटाले की जांच के घेरे में आए ठेकेदार नमित टंडन के आत्महत्या के प्रयास के बाद भले ही परिजनों ने सीबीआइ पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हों, लेकिन इस मसले ने एनआरएचएम की ठेकेदारी में शामिल बड़े लोगों का चेहरा भी उजागर कर दिया है। दरअसल, नमित टंडन ठेके में मोहरा मात्र थे। असली ठेकेदारी पीसीएफ के चेयरमैन, एमएलसी रामचंद्र प्रधान की पत्नी की फर्म पर उनके खास सहयोगी आगा रिजवान कर रहे थे। जांच एजेंसी नमित टंडन पर इन सबका नाम उजागर करने के लिए दबाव बना रही थी, लेकिन टंडन को मुंह खोलने का खामियाजा बखूबी मालूम था। रमा इंटरप्राइजेज के जरिए नमित टंडन ने जननी सुरक्षा योजना के तहत 27 एएनएम केंद्र बनवाने का काम पैक्सफेड से लिया। इस कार्य में श्रेया इंटरप्राइजेज भी शामिल है। सूत्रों के अनुसार, काम दिलाने की भूमिका पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के सबसे करीबी पीसीएफ चेयरमैन और एमएलसी रामचंद्र प्रधान ने निभाई। प्रधान के करीबी आगा रिजवान इसमें माध्यम थे। सूत्रों के मुताबिक, 22 फरवरी 2010 से दिसंबर 2010 तक रमा इंटरप्राइजेज के खाते में एक करोड़ रुपये आए। नमित ने 50 लाख रुपये नकद और कई लोगों के नाम के चेक से 50 लाख रुपये आगा रिजवान को ही दे दिए। सीबीआइ को खबर मिली है कि पैसे रामचंद्र प्रधान को दिए गए। इस मामले में नमित से 28 नवंबर और 2 दिसंबर को पूछताछ की गई, तो सबसे बड़ा सवाल श्रेया इंटरप्राइजेज पर उठा। चूंकि पैसों का लेनदेन फर्म के नाम पर भी है, इसलिए सीबीआइ इनकी घेरेबंदी के लिए नमित की गवाही चाहती थी, लेकिन नमित पर प्रधान की फर्म का नाम नहीं लेने का दबाव था। एक तरफ सीबीआइ और दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के दबंग नेताओं के दबाव में नमित परेशान हो गए। फिलहाल वह ट्रामा सेंटर में हैं। पीसीएफ चेयरमैन रामचंद्र प्रधान का कहना है कि मैं तो नमित टंडन को जानता ही नहीं हूं। आगा रिजवान मेरे परिचित हैं और उन्होंने मेरी पत्नी के फर्म पर कुछ काम किया था। मेरी हैसियत तो सबको पता है कि अगर मुझे काम करना रहता तो 50-100 करोड़ रुपये का करता। मैं एक करोड़ के काम के लिए ठेका करने नहीं जा सकता। मैंने एनआरएचएम में ठेके के लिए किसी अधिकारी को फोन भी नहीं किया। लिखा-पढ़ी में ली श्रेया फर्म : रिजवान आगा रिजवान ने कहा कि मेरे पास कोई फर्म नहीं थी। इसलिए मैंने रामचंद्र प्रधान की पत्नी अनीता प्रधान की फर्म से काम किया और यह फर्म बाकायदा लिखा-पढ़ी में ली है। रमा इंटरप्राइजेज भी हमने ही बनवाई। नमित मेरे दोस्त हैं। शुरू में मैं उनका मौखिक पार्टनर था, लेकिन बाद में लिखित तौर पर मैं उनका बराबर का पार्टनर बन गया। रमा फर्म के अस्तित्व में आने के बाद श्रेया से काम करना बंद कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि काम के सभी रिकार्ड दुरुस्त हैं।
Friday, December 2, 2011
एयरटेल पर तीन करोड़ का जुर्माना रीजनल मैनेजर सहित चार गिरफ्तार
पांच करोड़ रुपये के गबन में 15 के खिलाफ मामला दर्ज नागपुर
महाराष्ट्र के नागपुर में एक निजी स्कूल के शिक्षकों समेत 15 लोगों के खिलाफ 5.17 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों में शिक्षा अधिकारी केएम चौधरी और उनके सहयोगी एसटी केदार, एस फर्कादे और अर्चना हजारे शामिल हैं। वर्ष 1979 और वर्ष 2010 के बीच एक सेवानिवृत्त महिला प्रधानाचार्य और उसके भाई (स्कूल के क्लर्क) ने जिला शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर सेवानिवृत्त शिक्षकों के फर्जी हस्ताक्षर कर उनकी तनख्वाह हड़प ली। दोनों ने इस दौरान अयोग्य शिक्षकों की भर्ती कर धन की हेराफेरी भी की। इमामबाड़ा पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
और भ्रष्ट हुआ भारत
भ्रष्टाचार से लड़ने के भारत सरकार के खोखले दावों की गुरुवार को तब और पोल खुल गई जब ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भ्रष्ट देशों की सूची जारी कर यह बताया कि भारत आठ पायदान खिसककर भ्रष्टतम देशों की ओर बढ़ गया है। पिछले वर्ष इस सूची में 87वें स्थान पर रहे भारत को इस बार 95वां स्थान मिला है। इसका मतलब है कि वह और भ्रष्ट हो रहा है। भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल की चर्चा के बीच सामने आई ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की सूची भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर बट्टा लगाने वाली है, क्योंकि सरकार यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह भ्रष्टाचार का सख्ती से सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष के मामले में इस साल भारत को 10 अंकों में केवल 3.1 अंक ही मिल सके। 2007 में भारत 3.5 अंकों के साथ 72वें स्थान पर था। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इस आधार पर भ्रष्ट देशों की रैकिंग करती है कि किसी भी देश में कोई भी सार्वजनिक उपक्रम लोगों के बीच कितना भ्रष्ट समझा जाता है और विभिन्न विशेषज्ञ उस देश में भ्रष्टाचार के बारे में क्या राय रखते हैं? भारत की यह दागदार छवि विश्व बैंक संबंद्ध देश प्रदर्शन और संस्थागत आंकलन, विश्व आर्थिक मंच कार्यकारी आंकलन और वैश्विक राष्ट्रीय जोखिम मूल्यांकन समेत 13 संस्थाओं की अध्ययन रिपोर्ट और सर्वेक्षण के आधार पर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक न्यजीलैंड 9.5 अंक के साथ पहले स्थान पर है। फिनलैंड और डेनमार्क क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीडन चौथे, सिंगापुर पांचवें, ब्रिटेन 16वें, अमेरिका 24 वें, चीन 75वें, श्रीलंका 86वें, बांग्लादेश 120वें, पाकिस्तान 134वें स्थान पर है। सोमालिया, उत्तरी कोरिया, म्यांमार और अफगास्तिान जैसे देश अग्रणी हैं, जो अस्थिर सरकारों और गृहयुद्ध जैसे हालात से जूझ रहे हैं। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारत का गलत नक्शा पेश किया है। इस नक्शे में गुलाम कश्मीर को भारत का हिस्सा न दिखाते हुए पाकिस्तान में दिखाया गया है।
Saturday, November 26, 2011
देश और विदेशों में काले धन का अध्ययन करा रही सरकार : प्रणब
सरकार ने आज बताया कि देश के बाहर और भीतर बेहिसाब धन और आय से अधिक संपत्ति का अनुमान लगाने और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके पड़ने वाले प्रभाव के आकलन के लिए अध्ययन शुरू किया गया है। यह रिपोर्ट सितंबर 2012 तक तैयार होगी। सरकार ने बताया कि पिछले दो वर्षो में अंतरण मूल्य निर्धारण निदेशालय ने 66,085 करोड़ की गलत जानकारी देने का पता लगाया है तथा अंतरराष्ट्रीय कराधान कार्यालय ने सीमापारीय लेनदेन से 33,784 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं। लोकसभा में शैलेंद्र कुमार और पीसी गद्दीगौदर के प्रश्न के लिखित जवाब में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सदन को जानकारी दी कि सरकार ने वित्त संबंधी स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर देश के बाहर और भीतर बेहिसाब धन और आय से अधिक संपत्ति का अनुमान लगाने और राष्ट्रीय सुरक्षा पर इसके पड़ने वाले प्रभाव के लिए एक अध्ययन शुरू किया है। उन्होंने कहा कि यह अध्ययन तीन सरकारी संस्थाओं राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (एनआइपीएफपी), राष्ट्रीय वित्तीय प्रबंधन संस्थान (एनआइएफएम) और राष्ट्रीय अनु प्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) द्वारा अलग अलग किया जाएगा। प्रणब ने कहा, इन संस्थाओं को अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए सितंबर 2012 तक का समय दिया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि फ्रांस और स्विटजरलैंड सहित कुछ देशों ने दोहरे कराधान निषेध संधि (डीटीएए) और सूचना विनिमय करार (टीआइईए) के तहत विशिष्ट मामलों में भारत के साथ बैंकिंग सूचनाएं साझा करने कच् इच्छा जताई है। भारत ने इनसे कर संबंधी सूचनाएं प्राप्त भी की हैं। प्रणब ने कहा, भारत सरकार का 81 देशों के साथ डीटीएए संबंधी करार है, जिसमें 75 करार में बैंकिंग सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए विशिष्ट उपबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि इन सभी 75 करारों को फिर से वार्ता के संदर्भ में लिया गया और 22 मामलों में पुनर्वार्ता की प्रक्रिया पूरी हो गई है। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने विदेश में देश का अवैध रूप से जमा धन वापस लाने के लिए पांच सूत्री रणनीति तैयार की है। इनमें कालेधन के विरुद्ध विश्वव्यापी संघर्ष में शामिल होना, एक उपयुक्त विधाई रूपरेखा तैयार करना, अवैध निधियों के निपटारे के लिए संस्थाएं गठित करना, कार्यान्वयन के लिए प्रणाली विकसित करना और प्रभावी कार्रवाई के लिए मानव संसाधन कौशल को उन्नत बनाना शामिल हैं। कालेधन पर श्वेत पत्र विचाराधीन विदेशों में जमा भारतीयों के कालेधन को स्वदेश लाने के लिए श्वेत पत्र लाने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन है। लोकसभा में चंद्रकांत खैरे और अर्जुन राम मेघवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री एसएस पलानीमणिक्कम ने यह जानकारी दी। मंत्री से पूछा गया था कि क्या सरकार विदेशों में जमा भारतीयों के कालेधन को स्वदेश वापस लाने के संदर्भ में उठाने जाने वाले कदमों पर श्वेत पत्र लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है।
Friday, November 25, 2011
कोयले की दलाली से खेल रहा था करोड़ों में
| भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) के ठेकेदार लाल बहादुर सिंह के झरिया स्थित आवास समेत अन्य ठिकानों पर आयकर विभाग ने छापा मारकर करीब 100 करोड़ रुपये की सम्पत्ति जब्त की है। साथ ही एक ही बैंक में दर्जनों खातों में 80 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा होने के प्रमाण मिले हैं। इसके अलावा धनबाद, रानीगंज एवं झरिया के डाकघरों में पैसा जमा होने की बात भी सामने आई है। बैंक ऑफ इंडिया की ऐना शाखा में जमा 75 करोड़ रुपये आयकर विभाग के अधिकारियों ने जब्त कर लिये। बताया जा रहा है कि बीसीसीएल ठेकेदार के खाते से पटना के एक युवक के खाते में गलती से 15 करोड़ रुपये क्रेडिट हो गया था। एक खाते में इतनी बड़ी राशि जमा होने पर पटना के बैंक प्रबंधन को शक हुआ। बैंक प्रबंधक ने खाताधारी से रुपये के बारे में पूछताछ की। पूछताछ में खाताधारी ने इतनी बड़ी रकम के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की। इसके बाद बैंक प्रबंधक ने इसकी सूचना आयकर विभाग को दी। बैंक प्रबंधक की सूचना के आधार पर आयकर विभाग ने जब जांच पड़ताल की तो पता चला कि यह राशि झरिया के बीसीसीएल ठेकेदार लाल बहादुर सिंह के खाते से ट्रांसफर हुआ है। इसका खुलासा होने के बाद आयकर विभाग की निगाहें ठेकेदार पर तिरछी हो गई। आयकर विभाग के एडिशनल डायरेक्टर अजीत कुमार सिंह ने धनबाद एवं जमशेदपुर की टीम को रांची बुलाया और इस मामले की जांच व छापेमारी के लिए पटना के एडीआई सुमन कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित की। इसके बाद आयकर विभाग की टीम ने बुधवार को ठेकेदार के झरिया सिमलाबहाल स्थित आवास समेत सभी संभावित ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यहां तक कि ठेकेदार के सीए और चालक भी नहीं बच पाए। जांच पड़ताल के क्रम में बैंक ऑफ इंडिया की ऐना शाखा में 75 करोड़ की राशि जमा होने का पता चला। यह राशि देर रात इनकम टैक्स कमिश्नर धनबाद के एकाउंट में ट्रांसफर कर दी गई। मालूम हो कि हाल ही में कोयला स्टॉक की मापी में गड़बड़ी पकड़ी जाने पर सीबीआई इंस्पेक्टर को पांच लाख रुपये घूस देने के आरोप में जीएम एसके सिंह को गिरफ्तार किया गया था। जीएम को तुरंत पांच लाख रुपये कहां से मुहैया कराये गये इसकी भी जांच सीबीआई कर रही है और इस मामले में ठेकेदार लाल बहादुर सिंह भी शक के घेरे में हैं। बीसीसीएल ठेकेदार के पास इतनी बड़ी रकम होने के पीछे बीसीसीएल के चंद अधिकारियों की भी मिलीभगत की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि ठेकेदार को काम दिया जाता था और बिना काम कराये बिल का भुगतान कर दिया जाता था। आयकर विभाग को कई अचल सम्पत्ति के बारे में भी जानकारी मिली है जिसकी जांच की जा रही है। |
Tuesday, November 22, 2011
2जी पर जसवंत से पूछताछ
राजग के कार्यकाल में स्पेक्ट्रम आवंटन पर जांच का दायरा बढ़ाने वाली सीबीआइ ने 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सोमवार को वरिष्ठ भाजपा नेता जसवंत सिंह का बयान दर्ज किया। जसवंत का बयान दूरसंचार मामलों पर 2003 में गठित मंत्रिसमूह के अध्यक्ष के नाते दर्ज किया गया है। इस समूह का गठन अनेक मुद्दों के अलावा स्पेक्ट्रम आवंटन की निगरानी के लिए किया गया था। जांच एजेंसी ने राजग सरकार में विदेश और वित्त मंत्री रहे सिंह से पहले आओ, पहले पाओ की नीति के बारे में पूछताछ की। गौरतलब है कि सीबीआइ ने तीन पूर्व दूरसंचार मंत्रियों, ए. राजा, दयानिधि मारन और प्रमोद महाजन (दिवंगत) के कार्यकाल के संबंध में मामले दर्ज किए हैं। सीबीआइ ने न्यायमूर्ति शिवराज पाटिल आयोग की उस टिप्पणी के बाद ये केस दर्ज किया, जिसमें कहा गया था कि 29 जनवरी 2003 से मई 2004 तक के काल को भी जांच के दायरे में रखा जाए। इस दौरान अरुण शौरी सूचना व तकनीक मंत्री थे। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि ट्राई के निर्देशों को नजरअंदाज करते हुए 2003 में पहले आओ, पहले पाओ की नीति पर 2001 की कीमतों पर नए लाइसेंस जारी कर दिए गए।
मारन ब्रदर्स पर कसेगा सीबीआई का शिंकजा
सीबीआई एयरसेल-मैक्सिस डील के मामले में सीबीआई पूर्व संचार मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन पर शिंकजा कसने की तैयारी कर रही है। इसकी पहली कड़ी के रूप में जल्द ही 629 करोड़ रुपए के खेल को जानने के लिए दोनों भाइयों को पूछताछ के लिए सम्मन भेजने वाली है। उधर प्रवर्तन निदेशालय भी इन लोगों से पूछताछ के लिए ताल ठोंक रहा है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई द्वारा हाल ही में एयरसेल और मैक्सिस डील के मामले में पूर्व संचार मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई कलानिधि मारन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। अब सीबीआई उनसे पूछताछ की तैयारी करने में जुट गई है। ऐसी संभावना है कि दिसम्बर माह में किसी भी दिन दोनों भाइयों को सम्मन भेज कर या फिर सूचना देकर पूछताछ के लिए बुला सकती है। उधर प्रवर्तन निदेशालय ने भी पूर्व संचार मंत्री दयानिधि मारन और उनके भाई से पूछताछ की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई दयानिधि मारन के कार्यकाल के दौरान के संचार विभाग के उन सभी अधिकारियों को पूछताछ के लिए बुलाएगी जिनकी भूमिका स्पेक्ट्रम आवंटन में महत्त्वपूर्ण थी। सूत्रों के अनुसार दोनों जांच एजेंसियां सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय इस बात की जांच में लग गई हैं कि आखिर मॉरिशस स्थित एक कम्पनी से 629 करोड़ रुपया मलेशिया कैसे गया। दोनों जांच एजेंसी मारन ब्रदर्स से इस मामले में पूछताछ के लिए खास प्रकार के सवाल तैयार करने में जुटीं हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों जांच एजेंसी इस मामले में अलग-अलग एलआर भेजने की भी तैयारी कर रही हैं। इस बीच शनिवार को सीबीआई ने पूर्व संचार मंत्री स्व. प्रमोद महाजन के कार्यकाल में स्पेक्ट्रम आवंटन में हुई गड़बड़ी को लेकर मामला दर्ज किया था और अब अधिकारियों से पूछताछ के लिए बुलाने का काम शुरू करने वाली है। सूत्रों के अनुसार उनका बयान दर्ज करने के साथ-साथ उनमें से कुछ की गिरफ्तारी की भी संभावना है। दोनों जांच एजेंसियों ने जस्टिस पाटिल की रिपोर्ट का गहन अध्ययन शुरू कर दिया है। ईडी इस मामले में सबको पीएमएलए में बुक करेगा। सूत्रों के अनुसार ईडी बहुत जल्दी ही 629 करोड़ रुपए की जांच करेगा जो ट्रांजेक्शन मॉरीशस स्थित साउथ एशिया होल्डिंग कम्पनी ने मलेशिया स्थित कम्पनी मैक्सिस में निवेश के लिए किया था। इसके बाद उन 629 करोड़ रुपए का भारत की कम्पनियों में निवेश किया गया। ईडी इस बात को भी खोजेगा कि सन टीवी में कितना निवेश किया गया। ईडी इस बात की जांच करेगी कि मॉरीशस स्थित साउथ एशिया होल्डिंग में कहां-कहां से धन आया। सूत्रों के अनुसार ईडी को पहली नजर में 629 करोड़ के ट्रांजेक्शन में रित और प्रीवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट की बू आ रही है। इसलिए ईडी भारतीय रिजर्व बैंक से इस बात का पता लगाने के लिए कागजात तैयार कर रहा है कि अगर इस मामले में रिजर्व बैंक से स्वीकृति ली गई तो उसका उद्देश्य क्या था और कौन से मूल दस्तावेज जमा किए गए थे और उसे क्या अनुमति मिली थी। सीबीआई ने अपनी जांच में यह साबित किया है कि एयरसेल-मैक्सिस डील में काम करवाने के लिए धन का लेनदेन हुआ है। ईडी इस मामले में इन दोनों देशों की एजेंसियों को एलआर भेज कर कम्पनी के व्यवसाय और कम्पनी की पूंजी के बारे में पता लगाएगी। ईडी यह भी जानना चाहेगा कि इन दोनों कम्पनियों में कब-कब और कहां-कहां से इतना धन आया और इसका रूट क्या था।
कारगिल घोटाले पर सरकार की चुप्पी से सुप्रीमकोर्ट खिन्न
सुप्रीमकोर्ट ने कारगिल युद्ध के दौरान उपकरणों व अन्य सामान की खरीद में हुए घोटाले में संलिप्त अफसरों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करने पर सोमवार को केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ऐसे नहीं चलेगा। न्यायमूर्ति आफताब आलम की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की हीलाहवाली पर नाराजगी जताते हुए कहा,वे सख्त नहीं होना चाहते। उदारता दिखा रहे हैं, लेकिन इस तरह नहीं चलेगा। पीठ ने ये टिप्पणियां अदालत के न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी की दलीलें सुनने के बाद कीं। इससे पहले द्विवेदी ने पीठ को बताया कि जब से इस घोटाले का पता चला है तब से अभी तक सरकार ने किसी के भी खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं की है। सरकार में राजनीतिक इच्छा शक्ति की कमी है, जबकि कैग की रिपोर्ट में 2000 करोड़ के रक्षा उपकरणों की खरीद में गड़बडि़यों की बात कही गई है। उनकी दलीलें सुनने के बाद पीठ ने केंद्र सरकार के वकील से कहा, वे इससे जरा भी खुश नहीं हैं। हालांकि केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा,सरकार कार्रवाई कर रही है और मामले पर विचार विमर्श चल रहा है। आज मामले में संक्षिप्त सुनवाई हुई। अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी। सुप्रीमकोर्ट में वर्ष 2004 से एक जनहित याचिका लंबित है जिसमें कारगिल युद्ध के दौरान चले आपरेशन विजय के लिए रक्षा उपकरणों की खरीद में हुई गड़बडि़यों का मामला उजागर किया गया है। इस याचिका में कैग की रिपोर्ट को आधार बनाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के लिए 2163 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे गए, लेकिन इस खरीद का 75 फीसदी हिस्सा कारगिल संघर्ष समाप्त होने के बाद प्राप्त हुआ। लिहाजा इससे कारगिल अभियान में मदद नहीं मिली। पिछली सुनवाई पर भी कोर्ट ने कैग रिपोर्ट पर ध्यान नहीं देने पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर सरकारी विभाग कैग रिपोर्ट को दबाए रखेंगे और अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने से इनकार करते रहेंगे तो देश में अराजक स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। कैग ने रक्षा उपकरण खरीद के इस मामले में गड़बडि़यों के 35 मामले पाए थे, लेकिन रक्षा विभाग ने अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था 28 मामलों में कोई दम नहीं है।
Monday, November 21, 2011
चिदंबरम की सहमति से कंपनियों ने अरबों कमाए
तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम चाहते तो 2जी घोटाला करने वाली कंपनियों को इक्विटी बेचकर हजारों करोड़ (अरबों) की कमाई करने से रोक सकते थे। दरअसल 2जी लाइसेंस पाने वाली कंपनियों के इक्विटी बेचने पर चिदंबरम ने सहमति दी थी। 5 नवंबर 2008 को ए. राजा द्वारा लिखे गए नोट से यह तथ्य उजागर हुआ है। यह नोट सीबीआइ द्वारा सुब्रह्मण्यम स्वामी को सौंपी 400 पेजों की फाइल का हिस्सा है। नोट के सामने आने से चिदंबरम की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 2जी घोटाले में चिदंबरम की भूमिका को लेकर यह दूसरा बड़ा खुलासा है। इससे पहले वित्त मंत्रालय के उस नोट से बवाल मचा था जिसमें कहा गया था कि चिदंबरम चाहते तो वित्तमंत्री रहते घोटाले को रोक सकते थे। घोटाले के बाद भी चिदंबरम के पास इन कंपनियों को इक्विटी बेचकर हजारों करोड़ रुपये कमाने से रोकने का दूसरा मौका था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। 2जी स्पेक्ट्रम पाने के बाद ही स्वान और यूनिटेक ने विदेशी कंपनियों को 2008 की कीमत पर इक्विटी बेचकर हजारों करोड़ कमाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। संचार और वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारियों ने इसका विरोध भी किया था। 30 जनवरी 2008 को वित्त और संचार मंत्रालय की बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। इसमें कंपनियों की खरीद-फरोख्त होने पर लाइसेंस रद करने जैसे उपायों पर भी चर्चा हुई थी, पर बैठक में इसे टाल दिया गया। दूरसंचार सचिव को भेजे गए ए. राजा के नोट के अनुसार प्रधानमंत्री के साथ बैठक के दौरान वित्तमंत्री (चिदंबरम) ने लाइसेंस पाने वाली कंपनियों में विदेशी निवेश को सही ठहराया था। राजा के अनुसार वित्तमंत्री का मानना था कि विदेशी कंपनियों को इक्विटी बेचने को लाइसेंस बेचने के समान नहीं माना जा सकता। लिहाजा कंपनियां चाहें तो अपनी इक्विटी विदेशी कंपनियों को बेच सकती हैं। इसी के बाद स्वान ने दुबई की एतिसलात और यूनिटेक ने नार्वे की टेलीनॉर को इक्विटी बेची थी। सीबीआइ की चार्जशीट में आरोप है कि स्वान और यूनिटेक के प्रमोटरों को लाइसेंस फीस वगैरह के सारे खर्चे काटने के बाद भी इक्विटी बेचने से क्रमश: 2818 करोड़ और 2342 करोड़ का फायदा हुआ।
Friday, November 18, 2011
राजीव गांधी ट्रस्ट मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा
हरियाणा सरकार द्वारा गुड़गांव में करोड़ों की जमीन राजीव गांधी ट्रस्ट को 33 साल के लिए लीज पर दिए जाने का मामला एक बार फिर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने गुड़गांव के उल्हावास क्षेत्र के निवासियों की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 25 नवंबर तक जवाब देने को कहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सरकार ने कुछ लोगों को खुश करने के लिए नियमों का उल्लंघन कर करोड़ों की जमीन तीन लाख रुपये एकड़ के हिसाब से ट्रस्ट को लीज पर दे दी। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के मुताबिक, राज्य मंत्रिमंडल की 21 अगस्त 2009 को बैठक हुई, जिसमें विधानसभा भंग कर नए चुनाव कराने का फैसला हुआ। इसी बैठक में मंत्रिमंडल ने गुडगांव के उल्हावास गांव की जमीन राजीव गांधी ट्रस्ट को बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर देने का निर्णय कर डाला। चूंकि पंचायत विभाग मुख्यमंत्री के पास था इसलिए अफसरों ने जमीन से जुड़े सभी काम जल्दी किए। अत: सरकार द्वारा भू अधिग्रहण की अधिसूचना को रद किया जाये। इसी याचिका में सरकार द्वारा चर्च गेट मेडिकल सोसायटी को नौ कनाल जमीन जारी करने के आदेश को भी रद करने की मांग की गई है। साथ ही अनुरोध किया गया है कि जब तक मामला अदालत में विचाराधीन है, यथास्थिति के आदेश जारी किए जाए। राजीव गांधी ट्रस्ट को भू-आवंटन मामले में अगस्त में भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने पूछा था कि इस मामले में धांधली क्या हुई है। याची की दलील थी कि ट्रस्ट को जमीन देने में जल्दबाजी की गई तो कोर्ट ने पूछा, क्या सरकार कोई काम कम समय में नहीं कर सकती। इसके बाद कोर्ट ने याची से तीन सवालों के जवाब देने को कहा था, पहला यह जमीन राजीव ट्रस्ट से पहले जिसे लीज पर दी गई थी उसे किस मूल्य पर दी गई थी। दूसरा अगर अब इस जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो इसका मूल्य क्या होगा, तीसरा यह मामला जनहित का कैसे है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने याची को अर्जी वापस लेने को कहा था।
