सरकार के कई मंत्रालय व विभाग संसद से मंजूर राशि से कहीं अधिक खर्च कर रहे हैं। नियमों का उल्लंघन कर 21703.12 करोड़ रुपये की राशि सरकारी खजाने से निकालने को लेकर भारत के नियंत्रक व महा लेखा परीक्षक(कैग) ने मंत्रालयों व विभागों को फटकार लगाई है। कैग का कहना है कि रेलवे व रक्षा मंत्रालय तथा डाक जैसे विभागों ने 2010-11 में इस बढ़े हुए खर्च के लिए संसद की मंजूरी ही नहीं ली। संसद में मंगलवार को पेश कैग की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इस अवधि में रेलवे, डाक विभाग और रक्षा समेत कुछ अन्य मंत्रालयों व विभागों ने संसद की मंजूरी बिना11,043 करोड़ खर्च कर डाले, जबकि संविधान की धारा 114 (3) साफ कहती है कि बिना संसद की मंजूरी लिए सरकारी खजाने से एक भी पैसा नहीं निकाला जा सकता। इस मामले में वित्त मंत्रालय का केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) भी पीछे नहीं है। विभाग ने 2010-11 में रिफंड पर ब्याज का भुगतान करने को खजाने से 10499 करोड़ रुपये लिए। विभाग ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। गत पांच साल में वो ब्याज भुगतान के लिए 37365 करोड़ इसी तरह निकाल चुका है। कैग का कहना है कि सरकार ने कभी अपने बजट में ब्याज भुगतान का प्रावधान नहीं किया। हालांकि अपने जवाब में विभाग ने कहा है कि ब्याज का भुगतान वैधानिक जिम्मेदारी है लिहाजा संसद की अनुमति जरूरी नहीं है, लेकिन कैग ने सीबीडीटी की दलील ठुकरा दी है। कैग के अनुसार, नियमों के मुताबिक ब्याज का भुगतान खर्च मद में आता है और इसके लिए आवश्यक राशि नियम मुताबिक ही ली जा सकती है।
Monday, April 30, 2012
मंत्रालयों ने बिना अनुमति खर्च कर दिए 22 हजार करोड़
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