Monday, April 9, 2012

हिमाचल में भी धड़ल्ले से चल रहा अवैध खनन का कारोबार

प्रदेश में जाली एम फार्म के माध्यम से अवैध खनन का कारोबार खूब चल रहा है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग ) रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि पहाड़ी राज्य की नदियों एवं वन भूमि पर अवैध खनन का धंधा जारी है। प्रदेश में अवैध खनन कर रहे ठेकेदारों ने बिना एम फार्म के ही वाहन, पशु एवं परिवहन के अन्य साधनों से लघु खनिजों की सप्लाई की। बिना एम फार्म से इस तरह की अनुमति नहीं मिलती है। रिपोर्ट में कहा है कि सोलन, बिलासपुर, कांगडा, मंडी, शिमला, किन्नौर, ऊना व हमीरपुर में अवैध खनन पर रोक लगाने में भू-विज्ञान व सरकार नाकाम है। प्रदेश के आठ जिलों में कैग के करवाए सर्वेक्षण से पता चला है कि नदियों एवं नालों से अवैध रूप से खनिज संसाधनों का कारोबार 2006 से चला हुआ है। खनन अधिकारी बिलासपुर, शिमला व सोलन, लोनिवि मंडल बिलासपुर, सोलन व ठियोग के अधिशाषी अभियंताओं ने ने ठेकेदारों को फार्म एम दिए बिना रेत, पत्थर व बजरी की सप्लाई करने की अनुमति दी है। 2006 से 2010 के दौरान आठ जिलों से 160472.51 मीट्रिक टन अवैध खनिज संसाधनों का कारोबार हुआ। इससे सरकार को रायल्टी में 8.02 करोड़ की हानि हुई। यही नहीं खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई न करने पर सरकार को 23.03 करोड़ की कंपाउंड फीस नसीब नहीं हो सकी। कैग रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 2006 से अब तक 10 हजार 379 मामले अवैध खनन के पकड़ गए, जिनसे 164.23 लाख रुपये का जुर्माना उद्योग एवं खनन विभाग ने वसूला। हालांकि सरकार ने अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए लोनिवि, आइपीएच, वन विभाग एवं खंड विकास अधिकारियों को जिम्मा सौंपा है, बिलासपुर, मंडी व सोलन जिलों में ऐसा नहीं हुआ।

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