Monday, April 16, 2012

यूपी में निजी कालेजों ने फर्जी प्रवेश दिखा कर हड़पे 700 करोड़

छात्रों की बेरुखी से उजड़ रहे प्रबंधन एवं तकनीकी संस्थानों ने फलने-फूलने के लिए भ्रष्टाचार की राह पकड़ ली है। संस्थानों पर केंद्र और राज्य सरकार के खजाने में सात अरब रुपये की सेंधमारी का आरोप लगा है। यह खेल शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के नाम किया गया है। इसमें अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थी प्रभावित हुए हैं। ज्यादातर कालेजों ने फर्जीवाड़ा कर धन भी प्राप्त कर लिया है। प्रदेश में गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) और महामाया प्राविधिक विश्वविद्यालय (एमटीयू) से संबद्ध इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेजों की संख्या करीब 800 है। इनमें प्रवेश के लिए इस बार एमटीयू ने राज्य प्रवेश परीक्षा कराई थी। काउंसिलिंग में 600 से अधिक कॉलेजों की सीटें नहीं भर सकीं, कुछ कालेजों का तो खाता तक नहीं खुला। इस प्रकार न तो फर्जी छात्र परीक्षा में शामिल हुए और न ही इनका रिजल्ट बना। कॉलेजों ने केवल कागजों पर इन खाली सीटों पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों का प्रवेश दिखा दिया। इस श्रेणी के बीटेक छात्र को 4400 रुपये छात्रवृत्ति और 72,400 रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति (कुल 76,800 रुपये) जबकि मैनेजमेंट के छात्र को 4400 रुपये छात्रवृत्ति और 78800 से एक लाख बीस हजार रुपये शुल्क प्रतिपूर्ति (कुल 83200 रु.) दी जाती है। बानगी के तौर पर उन्नाव स्थित एक कॉलेज ने 120 छात्र संख्या में 108 छात्र अनुसूचित जाति के दिखाकर छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति के एक करोड़ दस लाख रुपये का गबन कर लिया। मोहनलालगंज स्थित लखनऊ मॉडल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट और लखनऊ मॉडल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट एक ही परिसर में चल रहा है। यहां एमबीए में 120 विद्यार्थियों का प्रवेश लिया गया है, इनमें 101 अनुसूचित जाति के हैं। परीक्षा में कुल 120 छात्रों में केवल 22 ही शामिल हुए जबकि बाकी का अता-पता नहीं है। इसी प्रकार बीटेक में 227 विद्यार्थियों का प्रवेश लिया गया। इनमें 109 एससी और 88 ओबीसी के छात्र हैं। परीक्षा में 67 विद्यार्थी शामिल नहीं हुए। इन छात्रों के दस्तावेज 10-10 हजार रुपये में खरीदे गए और केवल दस्तावेजों में प्रवेश दिखाया गया। कॉलेज ने सभी छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति के मद सवा करोड़ रुपये समाज कल्याण से मांगे। जागरण के जानकारी मांगने के बाद प्रबंधन ने समाज कल्याण विभाग में उपस्थित छात्रों के मद का धन देने की अर्जी लगा दी। कॉलेज के चेयरमैन अवधेश सिंह का कहना है कि कई कॉलेजों ने तो फर्जी प्रवेश करके पैसा ले लिया है। उन्होंने तो केवल परीक्षा में उपस्थित छात्रों को ही प्रतिपूर्ति शुल्क देने का प्रार्थना पत्र विभाग को दिया है। काकोरी प्रबंधन संस्थान के मैनेजिंग ट्रस्टी नवशाद ने बताया कि छात्र आए नहीं तो कॉलेज क्या कर सकता है, अगली बार से ध्यान देंगे। समाज कल्याण विभाग के निदेशक मिश्री लाल पासवान ने कहा कि कॉलेजों की ओर से विद्यार्थियों की सूची दी गई है उसमें इस बार एससी व एसटी छात्रों की संख्या अधिक है। कुछ कॉलेजों से इस बाबत अतिरिक्त जानकारी मांगी भी गई है। अगर गबन का मामला प्रकाश में आता है तो दोषी कालेजों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराई जाएगी। गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो.वीके सिंह ने कहा कि पूरा मामला खुला तो एनआरएचएम से बड़ा घोटाला निकलेगा। हर पहलू की पड़ताल करने के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।

No comments:

Post a Comment