Monday, April 30, 2012

भ्रष्टाचार की शिकार विदेशी सहायता

प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के माध्यम से भारत में अरबों डॉलर आता है जो न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेशित होता है, बल्कि उसके विकास की दिशा में सहायक होता है, लेकिन सामाजिक विकास के लिए जो विदेशी सहायता मिलती है उसके बारे में यह सच नहीं है। विदेशी सहायता या सामाजिक उत्थान के लिए दी गई विदेशी मदद जिस मकसद के लिए लिए दी जाती है शायद ही वह कभी अपने उस उद्देश्य को पूरा कर पाती हो। अधिकतर इस मद में मिली सहायता राशि का किसी दूसरी जगह इस्तेमाल कर लिया जाता है। बहुधा तो यह भ्रष्ट अधिकारियों के खाते में ही चली जाती है। विश्व बैंक की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, सहायता कार्यक्रम भ्रष्टाचार, खराब प्रशासन और अल्पभुगतान जैसी बुराइयों से घिरी हुई है। गरीबी उन्मूलन के लिए मिली विशाल धनराशि को राष्ट्रमंडल खेलों के लिए निर्माण कार्यो में झोंक दी गई जहां वह एक बार फिर फिर भ्रष्टाचार के चंगुल में फंस गई। ब्रिटेन स्थित एक स्वयंसेवी संगठन एक्शन एड ने सुनामी पीडि़तों के लिए आवास निर्माण के लिए सहायता के बारे में अनियमितताएं पाई और उसने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भारत में सुनामी प्रभावित क्षेत्रों में कुल 98,447 घरों का निर्माण होना था पर घर बने लक्ष्य से महज 28 फीसदी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में जहां 9,174 घरों की मरम्मत की जरूरत थी वहां अब तक पुनर्निर्माण का काम केवल एक प्रतिशत ही हो सका है। बाढ़ की वजह से हर साल कितना नुकसान होता है इससे हर भारतीय वाकिफ है। आपदा का बेहतर उपयोग कैसे कर सकते हैं यह बात हमारे अधिकारियों से ज्यादा और कौन जान सकता है। वास्तव में प्रशासकों को तो आपदा का इंतजार रहता है कि कब आपदा आए और वे उसका भरपूर लाभ उठा सकें। शिक्षा और सर्वशिक्षा अभियन के बारे में तो यह शर्मिदगी ीमाओं को पार कर गई है। एक जांच रिपोर्ट में पाया गया कि शिक्षा और सर्व शिक्षा अभियान के लिए ब्रिटेन द्वारा दी गई लाखों पाउंड की सहायता राशि भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई और गरीब बच्चों को इससे कोई लाभ पहुंच पाता उससे पहले ही यह गायब हो गई। अधिकारियों ने बड़ी बेशर्मी से 340 मिलियन पौंड के आसपास की धनराशि हड़प ली और विलासिता की ऐसी शानदार वस्तुएं खरीदने में इसको खर्च किया जिसका शिक्षा के साथ दूर तक का भी कोई रिश्ता न था। दान की राशि में घोटाले के बाद ब्रिटेन सरकार ने भारत को दी जाने वाली विदेशी सहायता राशि में कटौती का फैसला किया। मंथन ब्लॉग में प्रसून एस मजूमदार

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