सरकार की कल्याणकारी योजनाओं में कैसे बजट ठिकाने लगाया जाता है, यह देखना हो तो हरिद्वार जिले के बहादरपुर खादर गांव चले आइए। संपूर्ण स्वच्छता अभियान के बजट से स्वजल महकमे के कारिंदों ने पात्रता के मानकों को धता बताते हुए अपनों का जमकर कल्याण किया। सरकारी धन का बंदरबांट करने के लिए मुर्दो तक को नहीं छोड़ा। इस कारस्तानी में कई तो दोहरा लाभ भी पा गए। ऐसे भी लोगों के नाम सूची में हैं, जो गांव में रहते ही नहीं। सूचना अधिकार अर्जी के जवाब से योजनाओं का सच सामने आ गया। बहादरपुर खादर निवासी कुलदीप सिंह ने स्वजल परियोजना विभाग से 2011-12 में संपूर्ण स्वच्छता अभियान के तहत गांव में बने शौचालयों के संबंध में सूचना मांगी थी। उपलब्ध कराई गई सूचना के मुताबिक, एक फरवरी 2011 से 23 फरवरी 2012 तक 21 बीपीएल लाभार्थियों को 2700 रुपये और 126 लाभार्थियों को 3200 रुपये के हिसाब से शौचालय निर्माण के लिये प्रदान किए गए। लाभार्थियों की सूची में डेढ़ दर्जन ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो 2003-04 में भी इस योजना का लाभ ले चुके हैं। मुखराम नामक एक व्यक्ति को लाभार्थी दर्शाया गया है, जबकि इस नाम का कोई व्यक्ति गांव में है ही नहीं। एक दर्जन ऐसे नाम हैं, जो बीपीएल श्रेणी के हैं ही नहीं। उन्हें 2700 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से योजना की राशि देना दर्शाया गया है। एक लाभार्थी तो पिछले दो दशकों से गांव में रहता ही नहीं है। रेलवे विभाग से पेंशन प्राप्त कर रहे आठ लोगों के नाम भी सूची में शामिल हैं। इतना ही नहीं, दुनिया से विदा हो चुके तीन लोगों के नाम भी योजना के लाभार्थियों में है। स्वजल परियोजना के प्रबंधक एएच खान ने कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो यह गंभीर मामला है। पूरे मामले की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
Tuesday, April 3, 2012
बंदरबांट के लिए मुर्दो का भी कल्याण
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