Monday, April 9, 2012

7 अरब की घूस देकर लगाई 1.76 लाख करोड़ की चपत

सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ का चूना लगाने वाले 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले के लिए केवल 700 करोड़ रुपये की रिश्वत दी गई थी। साढ़े तीन साल की जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) इस निष्कर्ष पर पहुंची है। इसमें से एजेंसियां अभी तक भारत में दी गई 200 करोड़ रुपये की रिश्वत की पहचान कर उसे जब्त करने में सफल हो पाई हैं। जबकि विदेश में दी गई 500 करोड़ रुपये की रिश्वत की तलाश अब भी जारी है। स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में दी गई रिश्वत का विवरण पेश करते हुए जांच से जुड़े सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्पेक्ट्रम आवंटन में मनमाफिक गड़बडि़यों के लिए शाहिद बलवा की कंपनी डीबी रियलिटी ने 200 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। यह तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री करुणानिधि के परिवार की कंपनी कलैंगनार टीवी में असुरक्षित निवेश के रूप में दी गई थी। डीबी रियलिटी ने यह रकम करीम मोरानी के सिनेयुग के मार्फत दी थी। सारे सबूत मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने यह रकम जब्त कर ली है। इसके साथ ही 2जी स्पेक्ट्रम पाने वाली यूनिटेक ने भी 240 करोड़ रुपये की रिश्वत दी थी। यह रिश्वत मॉरीशस की कंपनी प्यूरिटी इमर्जिग में निवेश की रूप में यूनिटेक ओवरसीज लिमिटेड के मार्फत दी गई थी। अभी तक प्यूरिटी इमर्जिग के मालिक का पता नहीं चला है और इसका पता लगाने के लिए सीबीआइ संजय चंद्रा से नए सिरे से पूछताछ कर रही है। साथ-साथ मॉरिशस और आइल ऑफ मैन को लेटर रेगोटरी भी भेज दिया है। सीबीआइ के अनुसार, स्वान टेलीकॉम में रिलायंस टेलीकॉम के 9.1 फीसदी हिस्से को रिश्वत के रूप में मॉरीशस की कंपनी डेल्फी को बेचा गया था। माना जा रहा है कि स्वान को 2जी स्पेक्ट्रम का लाइसेंस मिलने के पहले उसके 9.1 फीसदी हिस्से का मूल्य भी लगभग 240 करोड़ रुपये ही होगा। जांच के दौरान पता चला कि डेल्फी खुद मावी इंवेस्टमेंट नाम की कंपनी की सहायिका है। मजेदार बात यह है कि मावी इंवेस्टमेंट के मालिक का भी अभी तक पता नहीं चल सका है। मॉरीशस गए सीबीआइ अधिकारियों को पता चला कि मावी इंवेस्टमेंट स्विटजरलैंड स्थित किसी कंपनी की सहायक कंपनी है। सीबीआइ ने स्विटजरलैंड को एलआर भेजकर इस कंपनी के मालिकों की जानकारी मांगी है। सीबीआइ अधिकारी ने दावा किया है कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले की पूरी साजिश से पर्दा उठ चुका है। इसमें दी गई रिश्वत की रकम की पहचान भी कर ली गई है। विदेशों में लगभग 500 करोड़ रुपये की रिश्वत लेने वालों तक पहुंचना जांच अधिकारियों के लिए असली चुनौती होगी।

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