बजट सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस की गैरमौजूदगी का फायदा उठा राज्य की नरेंद्र मोदी सरकार ने कैग (महालेखा नियंत्रक) , मानवाधिकार एवं जहरीली शराब कांड की रिपोर्ट पेश कर दी। इससे सरकार फिलवक्त इन मुद्दों पर सदन में चर्चा से तो बच गई, लेकिन हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गई है। कैग रिपोर्ट में अकेले जीएसपीसी को पांच हजार करोड़ की चपत लगने का अनुमान व्यक्त किया गया है। कांग्रेस महज एक साल में 16 हजार 707 करोड़ रुपयों के भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है। नेता विपक्ष शक्तिसिंह गोहिल ने कैग रिपोर्ट में हुए खुलासे को गुजरात का अब तक के सबसे बड़े भ्रष्टाचार बताया है। उन्होंने कहा कि इसी के चलते इस पर सरकार बहस से बचती रही। बजट सत्र के आखिरी दिन कैग की रिपोर्ट को पेश किया गया ताकि विपक्ष इन मुद्दों पर चर्चा नहीं कर सके। कांग्रेस ने जीएसपीसी को भ्रष्टाचार को प्लेटफॉर्म कहा है। गोहिल का आरोप है कि जीएसपीसी ने जेवी पार्टनर तथा जियो ग्लोबल रिसार्स इंक कनाड़ा के साथ बिना विशेषज्ञों व तकनीकी राय तथा केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना तेल व गैस निकालने का काम शुरू किया जिससे वर्ष 2007-11 के बीच करीब 104 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इसके अलावा वर्ष 2006-09 के बीच जीएसपीसी ने महंगे दाम पर गैस की खरीद कर अदाणी समूह को सस्ते दाम पर गैस उपलब्ध कराई जिससे सरकारी तिजारी को 70.54 करोड़ रुपयों का नुकसान उठाना पड़ा। जीएसपीसी में हुई वित्तीय गड़बडि़यों को लेकर उठ रहे सवालों पर गुजरात सरकार के प्रवक्ता जयनारायण व्यास का कहना है कि यह कैग का आकलन है, सरकार इस मुद्दे को पब्लिक अकाउंट कमेटी के समक्ष लेकर जाएगी। पीएससी का अध्यक्ष कांग्रेस का है, विपक्ष को वहां अपने इन तथ्यों को रखना चाहिए। जबकि अदाणी को सस्ते दाम पर दी गई गैस के संबंध में व्यास ने साफ किया कि तेल व गैस की खरीद व्यापारिक एवं घरेलू इकाईयों से की जाती है। खुले बाजार में गैस खरीद व बिक्री के लिए सरकारों को एक पैकेज देना होता है। इसके चलते सरकार को एक औसत भाव रखना पड़ता है। पैकेज में कई बार खरीद मूल्य से कम दाम पर भी गैस का वितरण करना पड़ता है। गुजरात में सरकारी विभागों के बेहताशा तथा अनियमित खर्च के चलते खुद राज्य सरकार बचाव की मुद्रा में है। कैग की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड तकनीकी तथाा वित्तीय आंकलन के बिना वर्ष 2006 से 2011 के बीच केजी बेसिन में तेल व गैस निकालने पर 19 हजार 245 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की, जबकि कंपनी को इसके सामने 15 सौ 63 करोड़ रुपये के ही तेल व गैस का उत्पादन हो सका। सरकार को इसके ड्रिलिंग खर्च में भारी हर्जाना उठाना पड़ा है। केजी बेसिन में 102.23 मिलियन यूएस डॉलर के बजाए इस योजना पर एक हजार 302 मिलियन यूएस डॉलर अर्थात 5920 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े जो वास्तविक खर्च का दस गुना है।
Tuesday, April 3, 2012
विपक्ष की गैरमौजूदगी में विस में पेश की कैग रिपोर्ट
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