ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग ने दो साल में शहर को हरा-भरा बनाने के नाम पर सवा दो सौ करोड़ रुपये खर्च कर दिए। इतनी बड़ी रकम महज दो लाख पौधे लगाने में खर्च हुई है। दो साल पहले तक 18 लाख पौधे लगाने में मात्र 80 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। दो साल में पौधे लगाने के नाम पर सवा दो सौ करोड़ रुपये कहां खर्च हुए? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। इससे भी ज्यादा आश्चर्यजनक यह है कि प्राधिकरण की स्थापना से अब तक लगाए गए कुल 20 लाख पौधों में से नौ लाख पौधे गायब हैं। इसका खुलासा प्राधिकरण की सर्वे रिपोर्ट में हुआ है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के उद्यान विभाग के दस्तावेज, दो साल में पौधारोपण के नाम पर हुए खेल की तरफ इशारा करते हैं। इनके मुताबिक बाजार में जिस पौधे की कीमत 250 से 300 रुपये है, उसे उद्यान विभाग ने दस हजार रुपये से लेकर 32 हजार रुपये तक में खरीदा है। एनएच-24 लिंक रोड पर पौधे की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाने पर वर्ष 2009 में 1,71,72,480 रुपये खर्च किए गए। इन्हीं जगहों पर फरवरी 2012 में 1800 ट्री गार्ड लगाकर उसका दोबारा भुगतान करा लिया गया। ग्रेटर नोएडा की पहचान उसके हरे-भरे पार्क, ग्रीन बेल्ट व चौड़ी सड़कों के लिए प्रदेश भर और देश भर में है। यह परिदृश्य तब था जब प्राधिकरण के उद्यान विभाग का बजट सात से आठ करोड़ रुपये वार्षिक हुआ करता था। उद्यान विभाग साल भर में पौधारोपण पर इतना रुपया भी खर्च नहीं कर पाता था। उद्यान विभाग के दस्तावेज बताते हैं कि 1991 से लेकर सितंबर 2010 तक पौधारोपण पर 80 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इस दौरान कुल 18 लाख पौधे लगाए गए थे। सितंबर 2010 से लेकर फरवरी 2012 तक उद्यान विभाग ने दो लाख पौधे लगाए, इन पर कुल सवा दो सौ करोड़ रुपये खर्च हुए। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद प्राधिकरण में भी उलट फेर हुआ। उद्यान विभाग के नए अधिकारियों ने जब पौधरोपण की फाइल टटोली तो उनकी आंखें फटी की फटी रह गई। सर्वे कराने पर पता चला कि फाइलों में लगे 20 लाख पौधों में से नौ लाख पौधों का जमीन पर कोई अस्तित्व नहीं है। नोएडा एक्सटेंशन से लेकर 130 मीटर रोड, नॉलेज पार्क व ओमीक्रान सेक्टर में पौधे लगाने का दावा कागजों में किया गया है। कागजों में ऐसे पौधे लगाने का उल्लेख है जो यहां की जलवायु के अनुकूल नहीं हैं। पौधे लगाने का जिम्मा ज्यादातर ऐसी फार्मो को दिया गया जिनके मालिक उद्यान विभाग में तैनात रहे कुछ अधिकारियों के सगे संबंधी हैं। नोएडा एक्सटेंशन में पुराने खजूर के पेड़ लगाकर प्रति पेड़ 32 हजार रुपये का भुगतान करा लिया गया, जबकि ग्रेटर नोएडा के ही सूरजपुर पक्षी विहार में इनकी भरमार है। अलेस्टोनिया के दस फीट ऊंचे एक वृक्ष के लिए छह हजार रुपये का भुगतान किया गया, जिसकी बाजार में कीमत महज 400 से 500 रुपये है। दस्तावेजों के मुताबिक नोएडा एक्सटेंशन में अलेस्टोनिया के 150 वृक्ष लगाए गए हैं, जबकि मौके पर एक भी वृक्ष नहीं है। नोएडा एक्सटेंशन में उद्यान विभाग ने डी पार्क के नाम से एक साल में पार्क विकसित किया। पार्क का बजट आठ करोड़ रुपये था, जिस पर उद्यान विभाग करीब छह करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। बावजूद डी पार्क में कुछ नहीं है। एक दशक पहले प्राधिकरण ने सिटी पार्क विकसित किया था, इस पर मात्र एक करोड़ रुपये अब तक खर्च हुए हैं। सिटी पार्क अभी तक ग्रेटर नोएडा की शान बना हुआ है।
Monday, April 16, 2012
कागजों में लगे सवा दो सौ करोड़ के पौधे
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment