Tuesday, December 21, 2010

घूसखोरी की शिकायतें दबाए रखते हैं विभाग

केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने केंद्र सरकार के विभागों द्वारा रिश्वतखोरी से जुड़े मामलों की जांच में हो रही देरी पर चिंता जताई है। भ्रष्टाचार निरोधक आयोग का कहना है कि डेढ़ हजार से भी अधिक मामले विभागों में जांच के लिए लटके हुए हैं। इनमें कई तो 3 साल से भी अधिक समय से लंबित हैं। सीवीसी ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि इनमें सर्वाधिक 117 शिकायतें रेल मंत्रालय से हैं जबकि 97 केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की हैं। दिल्ली सरकार के खिलाफ 86, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के खिलाफ 68 और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के 58 मामले हैं। इनके अलावा माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग के भ्रष्टाचार से जुड़ीं 52 शिकायतें हैं। रक्षा मंत्रालय की 40, स्वास्थ्य मंत्रालय की 39, भारतीय जीवन बीमा की 28 ऐसी शिकायतें हैं, जिनकी सुनवाई अभी बाकी है। सीवीसी ने रिपोर्ट में कहा, ऐसा नहीं है कि मामलों या शिकायतों को निपटाने के विभिन्न स्तरों पर ही विलंब किया जा रहा हो। विलंब उस स्तर पर भी देखा गया है जहां शिकायतों पर वरिष्ठ अधिकारी के स्तर पर निर्णय लिया जाना है। यह पाया गया है कि कई बार अधिकारी ऐसे मामलों में पूरी तरह से उदासीनता बरतते हैं। पिछले एक साल से जांच और रिपोर्ट के लिए लंबित शिकायतों की संख्या 877 हैं। 598 मामले एक से 3 साल तक पुराने हैं जबकि 39 मामले 3 साल से भी अधिक समय से लंबित हैं।

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