भोपाल किसानों की जमीनें गिरवी रखने के मामले में जब दैनिक जागरण ने तहकीकात की तो कई सनसनीखेज जानकारियां सामने आई। सूत्रों ने बताया कि अपेक्स बैंक सीधे विदेश से कर्ज नहीं ले सकता। उसके पास ऐसा करने का लाइसेंस भी नहीं है। लिहाजा उसने बिचौलिए के जरिए किसानों की जमीन गिरवी रखने का तानाबाना इतनी होशियारी से बुना कि बैंक के आला अधिकारियों को भी इसकी भनक नहीं लग पाई। बैंक के संचालक मंडल में भी इसका प्रस्ताव एक्स एजेंडा विषय के तौर रखा गया। यह प्रस्ताव 30 नवंबर 2009 की संचालक मंडल की बैठक में पारित किया गया। बिचौलिए को क्या होगा फायदा बैंक द्वारा जिस स्टार एजेंसीज प्राइवेट लिमिटेड से कर्ज लेने और किसानों की जमीन गिरवी रखने की कार्यवाही पूरी कर ली गई है, वह कोलकाता में पंजीकृत है। इस कंपनी को भोपाल में सालों तक मेडिकल रिप्रजेंटेटिव का काम करने वाले एस.के. पंडित ने खरीद लिया। पंडित 2008 से वित्तीय संस्था का कामकाज देख रहे हैं। कंपनी की नेटवर्थ कुछ लाख रुपये की है। अपेक्स बैंक को विदेशी संस्था से 6500 करोड़ का कर्ज दिलाने के एवज में पंडित को दो प्रतिशत कमीशन मिलना है। वर्ल्ड केपिटल स्टेटजी कार्पोरेशन के वाइस प्रेसीडेंट रार्बड कोहने और पंडित के बीच हुए पत्राचार में इस कमीशन का उल्लेख है। कैसे हासिल होगा बैंक को लोन अपेक्स बैंक ने 16 दिसंबर 2009 को कृषकों की गिरवी रखी जमीन अचल संपत्ति और 1699.09 करोड़ की नगद प्रतिभूतियों का प्रमाण पत्र दिया है। इसके आधार पर महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड द्वारा 688.42 करोड़ रुपये मूल्य का एसजीएल खाते का प्रमाण पत्र जारी किया गया। संपत्ति ब्लाक करने का आश्र्वासन भी बैंक द्वारा लिखित में दिया गया। सूत्रों ने बताया कि कर्ज लेने वाला बैंक किसी वित्तीय संस्थान पर स्वयं बैंक गारंटी जारी नहीं कर सकता। इस कारण वचन पत्र जारी किया गया। अपेक्स बैंक द्वारा 19 अप्रैल 2010 को स्पीड स्टार एजेंसीज प्राइवेट लिमिटेड के पक्ष में 6500 करोड़ रुपये मूल्य का अखंडनीय टर्म प्रामिसरी नोट (एक ऐसा दस्तावेज जो लोन के सबूत के तौर पर लिखित रूप में सौंपा जाता है) भी जारी कर दिया गया। स्पीड स्टार एजेंसी प्राइवेट लिमिटेड दस साल बाद महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से बैंक आफ इंडिया, लंदन में इस नोट को प्रस्तुत कर 6500 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त कर सकती है। क्या है सब्सिडियरी जनरल लेजर अकाउंट (एसजीएल) आरबीआइ द्वारा बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों को दी जाने वाली वह सुविधा जिसके जरिए वे सरकारी बांडों और ट्रेजरी बिल को इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रख सकते हैं। एसजीएल खाते के जरिए इन सिक्योरिटीज की डिलीवरी देकर भुगतान प्राप्त किया जा सकता है।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment