Wednesday, December 22, 2010

पौने चार लाख अपात्रों को बांटी पेंशन

लखनऊ। प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन देने के नाम पर लंबा खेल हुआ। पात्रों के स्थान पर अपात्रों को पेंशन दे दी गई। विभागीय जांच में एक दो नहीं, बल्कि दो लाख अपात्रों को तथा एक लाख 72 हजार मृत लोगों को पेंशन दिए जाने का खुलासा हुआ है। इस घोटाले में सरकार को कुल कितने का चूना लगा, अब इसका आकलन कराया जा रहा है। मामला खुलने के बाद निदेशालय ने 14 करोड़ 94 लाख 22 हजार रुपये की रिकवरी कराई है। साथ ही रिपोर्ट दर्ज कराकर दोषियों पर कार्रवाई शुरू की है।
समाज कल्याण विभाग गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले बुजुर्गों को 300 रुपये प्रतिमाह पेंशन देता है। यह पेंशन साल में दो बार छह-छह माह की किस्त में दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधान व सचिव तथा शहरी क्षेत्रों में तहसीलदार की रिपोर्ट पर सिटी मजिस्ट्रेट की संस्तुति पर जिला समाज कल्याण अधिकारी पेंशन स्वीकृत करता है।
पेंशन के लिए पात्रता
वृद्धावस्था पेंशन बीपीएल सूची के आधार पर दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बीपीएल सूची में शामिल वृद्धों को पेंशन देने की संस्तुति ग्राम प्रधान व सचिव करता है। शहरी क्षेत्रों में पेंशन के लिए बीपीएल कार्ड के आधार पर तहसीलदार की रिपोर्ट पर सिटी मजिस्ट्रेट पेंशन देने की संस्तुति करता है। पेंशन 60 साल से अधिक उम्र वालों को मिलती है।


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