Sunday, December 26, 2010

लोकपाल विधेयक और आदर्श बिल की तुलना

विषय-राजनेता, नौकरशाह और न्यायपालिका पर अधिकार क्षेत्र
सरकारी विधेयक-सीवीसी का अधिकार क्षेत्र नौकरशाहों और लोकपाल का राजनेताओं पर अधिकार क्षेत्र होगा। न्यायपालिका के लिए कोई कानून नहीं
आदर्श विधेयक-राजनेता, नौकरशाह व न्यायपालिका लोकपाल के दायरे में
क्यों? भ्रष्टाचार राजनेता और नौकरशाहों की मिलीभगत से ही होता है। ऐसे में सीवीसी और लोकपाल को अलग अधिकार क्षेत्र देने से इन मामलों को व्यवहारिक दृष्टि से निपटाने में दिक्कतें पेश आएंगी। यदि किसी केस में दोनों संस्थाओं के अलग निष्कर्ष निकलते हैं तो कोर्ट में आरोपी के बचने की आशंका ज्यादा होगी
विषय-लोकपाल की शक्तियां
सरकारी विधेयक- सलाहकारी निकाय होना चाहिए
आदर्श विधेयक-लोकपाल को किसी की अनुमति के बगैर ही जांच प्रक्ति्रया की शुरुआत करने का अधिकार होना चाहिए
क्यों?-सलाहकारी भूमिका के रूप में यह सीवीसी की तरह अप्रभावी होगा
विषय-व्हिशल ब्लोअर संरक्षण
सरकारी विधेयक-इनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने हाल में एक बिल प्रस्तुत किया है जिसमें सीवीसी को इनकी सुरक्षा का उत्तरदायित्व दिया गया है
आदर्श विधेयक-लोकपाल को इनकी सुरक्षा का अधिकार दिया जाना चाहिए
क्यों?-सीवीसी के पास न तो शक्तियां हैं और न ही संसाधन, जो यह व्हिशल ब्लोअर की सुरक्षा कर सके
विषय-लोकपाल का चयन और नियुक्ति
सरकारी विधेयक-एक कमेटी द्वारा इनका चयन किया जाएगा जिसमें प्रमुख रूप से सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्य शामिल होंगे
आदर्श विधेयक-गैर राजनीतिक व्यक्तियों की एक कमेटी द्वारा चयन किया जाना चाहिए
क्यों?-चयन प्रक्ति्रया में राजनीतिक दलों का नियंत्रण नहीं होना चाहिए। सत्ता दल या विपक्षी चाहे कोई भी राजनीतिक पार्टी हो वह सशक्त और स्वतंत्र लोकपाल नहीं चाहती
विषय-लोकपाल की पारदर्शिता और जवाबदेही
सरकारी विधेयक- कोई प्रावधान नहीं
आदर्श विधेयक-लोकपाल की कार्यप्रणाली पारदर्शी होनी चाहिए। किसी लोकपाल कर्मचारी के खिलाफ यदि कोई शिकायत हो तो उसका निस्तारण एक महीने के भीतर होना चाहिए और दोषी पाए जाने पर उसको बर्खास्त किया जाना चाहिए
विषय-भ्रष्टाचार मामलों में सरकार को हुए धन की क्षतिपूर्ति
सरकारी विधेयक-कोई प्रावधान नहीं
आदर्श विधेयक-भ्रष्टाचार के कारण सरकार की हुई क्षति का आकलन ट्रायल कोर्ट करेगी और इसकी वसूली दोषियों से की जाएगी

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