Sunday, December 26, 2010

सिर्फ दिखावा हैं भ्रष्टाचार

दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में पिछड़ता जा रहा है। यह स्थिति तब है, जब भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए कानूनों से लैस तमाम एजेंसियां मौजूद हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाले अंतरराष्ट्रीय एनजीओ ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के ताजा आंकड़ों मुताबिक भ्रष्टतम देशों की सूची में भारत 87वें स्थान पर है। यानी 86 देश भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में भारत से आगे हैं। भारत में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक अनुपमा झा की माने तो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में भारत में न तो कानून की कमी है या न ही भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों की। समस्या इन कानूनों के कड़ाई से लागू करने और एजेंसियों को ज्यादा ताकतवर बनाने की है। भ्रष्टाचार के खिलाफ भारत में नोडल एजेंसी केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दांत सिर्फ दिखाने के लिए हैं और वह केवल भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है। जबकि न्यूजीलैंड, डेनमार्क और सिंगापुर जैसे सबसे ईमानदार देशों में भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियां भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ज्यादा स्वतंत्र हैं। वहीं सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआइ की हालत यह है कि वह सुखराम को छोड़कर किसी बड़े राजनेता को सजा तक नहीं दिलवा सकी है। दूसरे इन्हें संयुक्त सचिव और उससे उच्च स्तर के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार नहीं है। जबकि अमेरिका में एफबीआई वहां के गर्वनर तक के खिलाफ सीधे कार्रवाई के लिए स्वतंत्र हैं। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में जनता में जागरूकता का अभाव भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में एक बड़ी बाधा है। इससे भ्रष्ट राजनीतिज्ञों को भी जनता का समर्थन मिलता रहता है। जापान जैसे देश में भी भ्रष्टाचार के आरोप में एक बार घिरने के बाद राजनेताओं के लिए जनता का समर्थन पाना मुश्किल हो जाता है। अमेरिका, जापान, आस्टे्रलिया या यूरोपीय देशों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई के लिए कामकाज को ज्यादा से ज्यादा पारदर्शी बना रहे हैं और भ्रष्टाचार की सूचना जुटाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं। इंग्लैंड की ऑफिस और फेयर ट्रेडिंग कंपनियों के कारटेल का पता लगाने के लिए हर साल करोड़ों पौंड खर्च करता है। अमेरिका में भ्रष्टाचार की झूठी शिकायतों की भी पड़ताल की जाती है और इसे बढ़ावा देने के लिए बाकायदा कानून तक बनाया गया है। भारत में भी काले धन की सूचना देने वालों के लिए इनाम का प्रावधान है, लेकिन इसे मिलने में 25-30 साल लग जाते हैं। 

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