गुड़गांव फर्जीवाड़ा कर निवेशकों को करोड़ों का चूना लगाने के आरोपी निजी बैंक अधिकारी शिवराज पुरी अभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। खुलासा हुआ कि वह देश-विदेश के विभिन्न बैंकों में रिश्तेदारों के नाम डेढ़ दर्जन खातों में करोड़ों रुपये जमा करा चुका है। इस समय उनमें से चार खातों में हजार से दो हजार रुपये जमा है। अन्य चौदह खातों में 3 करोड़ 85 लाख रुपये जमा हंै। उन्हें पुलिस ने रिजर्व बैंक से अनुरोध कर सीज करा दिया है। पुलिस ने अब तक 78 खातों को सील कर दिया है, जिन पर शक है कि इन खातों से लेन-देन हुआ है। पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि इस घोटाले में सात निवेशक भी लाभांवित हुए और उन्होंने जमा रकम की दोगुनी रकम निकाली। यह भी सामने आया है कि नौ खाते ब्रोकरों के हैं। ऐसे में निवेशकों द्वारा लगाया गया धन शेयर बाजार में लगाया गया। गुड़गांव में हुए इस महाघोटाले में अभी तक 40 से अधिक निवेशकों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। सिटी बैंक के सहायक उपाध्यक्ष बीनू सोमन ने मंगलवार को थाना डीएलएफ फेज टू में मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि डीएलएफ फेज टू स्थित सिटी बैंक की कारपोरेट शाखा में तैनात रहे शिवराज पुरी ने सेबी (नियामक) की ओर से एक फर्जी मंजूरी पत्र दिखा बैंक के लेटर हेड पर फर्जी निवेश स्कीम की जानकारी दे सितंबर, 2009 में संपर्क किया। उसने निवेशकों (नामी-गिरामी कंपनियां) को यकीन दिलाया कि एक साल की अवधि में बैंक रकम को दो गुना कर देगा। उसके झांसे में आकर करीब चालीस निवेशकों ने उसके बताए खाते में करोड़ों की रकम जमा कर दी थी। वह खाता शिवराज ने नाना प्रेमनाथ के नाम से खोल रखा था, जिसमें रकम जमा होते ही वह अन्य बैंकों में खुले परिजन के खातों में जमा करा देता था। उसके इस कारनामे का खुलासा तब हुआ बैंक अधिकारियों को पता चला कि एक ही खाते से करोड़ों की रकम (सौ से चार सौ करोड़) कई खातों में डाली गई। इसके बाद अमेरिकन मूल की इस बैंकिग कंपनी में हड़कंप मच गया। अमेरिका से बैंक का उच्चस्तरीय जांच दल गुड़गांव आया और जांच की तो महाघोटाले का नायक शिवराज निकला जिसे बैंक ने कारपोरेट घरानों से बेहतर संबंध बनाने के लिए रखा था। पुलिस अधिकारी की मानें तो शिवराज की शेयर दलालों से भी मिलीभगत हो सकती है। कयास है कि नाना के खाते में निवेश कराई गई करोड़ों की रकम दलालों के खाते में डाल दी गई हो। पर्दे के पीछे भी कई खिलाड़ी : अभी भले ही मामले में मुख्य आरोपी शिवराज हो और उसकी मदद नाना प्रेमनाथ, नानी शीला और रिश्तेदार दीक्षा पुरी ने जाने-अनजाने में की हो, पर पूरे खेल में बैंक के कुछ अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस आयुक्त एसएस देसवाल ने कहा कि आरोपी की गिरफ्तारी के पहले कुछ नहीं कह सकते। उसे दबोचने के लिए लुकआउट सरकुलर जारी कर एयरपोर्ट पर भी पुलिस टीम लगा दी गई है। निवेशकों के रिकार्ड देखने के बाद ही रकम की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी। पता गलत दिया, घर से गायब : बैंक कर्मचारियों के मुताबिक आरोपी दिल्ली में रहता था। पुलिस ने वहां छापेमारी की तो पता चला कि वह डीएलएफ फेज-4 स्थित हेमिल्टन कोर्ट स्थित उसके 425-ए नंबर के फ्लैट में रहता है। पुलिस टीम ने वहां छापेमारी की तो पता चला कि उसका परिवार फ्लैट में सात दिन से नहीं आया। फ्लैट में ताला लगा था। पड़ोसी पुलिस को कुछ अधिक बता नहीं सके। पुलिस यह जानने में लगी की फ्लैट किराये का है या फिर उसका अपना। अंदेशा है कि मामला प्रकाश में आते ही उसने ठिकाना बदल लिया।
निवेशक नहीं आए सामने : अभी तक 40 निवेशकों (कई कारपोरेट कंपनियां) द्वारा फर्जी स्कीम में काफी धन लगाने का खुलासा हुआ है, लेकिन किसी निवेशक ने पुलिस थाने में मामला दर्ज नहीं कराया है। पुलिस आयुक्त कह चुके हैं कि निवेशक पुलिस से संपर्क करे। बैंक प्रवक्ता ने अपील भी जारी की थी।

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