जम्मू-कश्मीर में पुरस्कारों के फेर में कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर सेना के मध्यम स्तर के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी आइईडी लगाने के मामलों का खुलासा हुआ है। सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि कुछ लोग, जिनमें सेना के पूर्व कर्मचारी भी शामिल हैं, कथित तौर पर उत्तरी और पश्चिमी कमान के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर आइईडी में काले रंग की रेत भर देते हैं और पुरस्कार पाने के चक्कर में उसे आरडीएक्स भरी आइईडी के तौर पर प्रचारित करते हैं। उन्होंने बताया कि महबूब डार और सेना के पूर्व कर्मचारी राम प्रसाद समेत कई आरोपियों से पूछताछ में सेना के पूर्व कर्मचारियों और मौजूदा अधिकारियों के बीच साठगांठ का खुलासा हुआ है। इसमें खास तौर पर ऐसे अधिकारी शामिल हैं जो आतंकवादी खुफिया जानकारी से जुड़े हैं। पुलिस को 8 अक्टूबर को जम्मू के एमएलए होस्टल के पास से सेवों के बॉक्स मिले थे, जिनमें काले रंग का एक पदार्थ एकत्रित करने के लिए एक छेद किया गया था, जिसे विस्फोटक के तौर पर पेश किया गया। बॉक्स को डिटोनेटर से जोड़ा गया, जिससे अफरा-तफरी मचे। पुलिस को ये बॉक्स मिलने के बाद ही इस सांठगांठ का खुलासा हुआ। सूत्रों के मुताबिक, विस्तृत फारेंसिंक जांच के बाद पता चला कि काले विस्फोटक वास्तव में रेत हैं, जिन्हें तारों और डेटोनेटरों से जोड़ा गया था, जिसे आइईडी का वास्तविक रूप देने के लिए पत्थर की खदानों से लाया गया था। उन्होंने बताया कि ऐसा लगता है कि यह एक सुनियोजित रैकेट है, जिसमें लोग सीमा पर खुफिया जानकारी देने के बदले में मिलने वाले इनाम के फेर में ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि डार ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसने फरवरी 2009 से अक्टूबर 2010 के दौरान कम से कम 50 बार ऐसे नकली आइईडी रखे और इसके बदले में उसे 30 से 50 हजार रुपये मिलते थे। जांचकर्ताओं के लिए यह खुलासा आंखे खोलने वाला था क्योंकि डार ने फर्जी आइईडी के बारे में जो जानकारी दी, वह आधिकारिक रिकार्ड से मेल खाती थी। ऐसे सभी मामलों में, यह पता चला कि ऐसे विस्फोटकों को सेना ने आइईडी मिलने वाले वाले स्थल पर नष्ट किया जाना बताया। जम्मू में रक्षा प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल विप्लव नाथ ने बताया, दस दिन पूर्व मीडिया में जब पहले पहल इस बारे में रिपोर्ट आई थी तभी इस संबंध में प्राथमिक जांच करा ली गई थी। अब तक सेना के किसी जवान की भागीदारी प्रकाश में नहीं आई है। इस मामले में सेना के खुफिया जानकारी से जुड़े लोगों की भूमिका पुलिस अधिकारियों को समय से जानकारी देने तक ही सीमित है। रक्षा प्रवक्ता के वक्तव्यों से सहमति न जताते हुए प्रदेश और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने कहा कि डार और राम प्रसाद की भूमिका विस्फोटक लगाने तक सीमित थी। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, कमान का कोई न कोई अधिकारी निश्चित ही साजिश रचने और उसे अंजाम देने में शामिल था। उन्होंने कहा कि जांच जारी है और सेना के कुछ जवानों से जल्दी ही पूछताछ की जाएगी। डार ने बताया कि उसे शुरुआत में सेना के साथ काम करने वाले खुफिया कर्मचारी सतनाम सिंह ने रेत, टूटे पत्थर और सीमेंट लाने एवं डेटोनेटर लाकर उनके बदले में पत्थरों की खदान वालों को पैसे देने का आदेश दिया था। इन सभी को एकत्रित करके डोडा में एक पुल के पास जिलेटिन की छड़ों के साथ लगा दिया गया।
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