निगरानी ब्यूरो ने झारखंड राज्य लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित पहली संयुक्त प्रवेश परीक्षा की जांच पूरी कर ली है। निगरानी ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में परीक्षा में भारी धांधली की पुष्टि की गई है। अगर निगरानी ब्यूरो की जांच पर सरकार ने अपनी मुहर लगा दी तो कई डिप्टी कलेक्टरों की नौकरी खतरे में पड़ी सकती है। इस परीक्षा से कुल 64 अफसर विभिन्न सेवाओं के लिए चयनित हुए थे। अस्तित्व में आने के बाद जेपीएससी ने विज्ञापन संख्या 11/2002-03 के तहत इस परीक्षा का संचालन किया था। इसके तहत पुलिस सेवा को छोड़कर सभी सेवाओं के लिए 64 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। निगरानी ने इस मामले को जेपीएससी द्वारा संचालित द्वितीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा की जांच के दौरान जांच के दायरे में लिया था। निगरानी ब्यूरो के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जांच में पाया गया है कि कई अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में नंबर में हेरफेर किया गया था। कई जगह नंबर तक बदल दिए गए। यही नहीं, कई उत्तर पुस्तिकाओं में परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर तक नहीं हैं। इन तमाम तथ्यों के मद्देनजर इस परीक्षा के परिणाम को भी संदिग्ध माना जा रहा है। मालूम हो कि निगरानी ब्यूरो जेपीएससी द्वारा संचालित द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा की भी जांच कर रहा है, जो अभी पूरी नहीं हुई है। द्वितीय परीक्षा से सौ अफसरों की नियुक्ति हुई थी।
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