केंद्र और उत्तर प्रदेश के अफसरों में तालमेल की कमी और व्यवस्था में बदलाव के कारण भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के गोदामों से खाद्यान्न की पूरी उठान नहीं हो रही है। इससे तमाम गरीबों के हिस्से का राशन सस्ते गल्ले की दुकानों तक नहीं पहुंच रहा है। खाद्य एवं रसद विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, गत अक्टूबर में आजमगढ़ में अन्त्योदय कार्ड धारकों को 1056 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटन के स्थान पर 155 मीट्रिक टन व बीपीएल कार्ड धारकों के लिए 2560 मीट्रिक टन के स्थान पर 145 मीट्रिक टन खाद्यान्न की उठान हुई। बागपत में अन्त्योदय कार्ड धारकों के लिए 153 मीट्रिक टन खाद्यान्न के स्थान पर 39 मीट्रिक टन की उठान हुई। यह स्थिति कई और जिलों की भी है। समाज के निचले तबके की कमजोर क्रय शक्ति को देखते हुए केंद्र सरकार ने अन्त्योदय कार्ड धारकों के लिए गेहूं की दर दो रुपये व चावल की दर तीन रुपये प्रति किलो तथा बीपीएल कार्ड धारकों के लिए क्रमश: 4.65 रुपये किलो तथा 6.15 रुपये किलो निर्धारित की है। इसके समय पर वितरण के आदेश भी हैं लेकिन तालमेल का अभाव जरूरतमंदों पर भारी पड़ रहा है। पिछले दिनों मामला एफसीआइ के सीएमडी तक पहुंचा। राज्य सरकार ने जवाब दिया,आगरा, एटा, फिरोजाबाद, बांदा, महोबा व चित्रकूट में चावल की कमी है। स्टाक के अभाव में यहां लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली का कार्य प्रभावित है। शाहजहांपुर, गोंडा, झांसी, प्रतापगढ़, उरई, महोबा, बांदा, देवरिया, एटा, सुल्तानपुर व फिरोजाबाद डिपो पर खाद्यान्न प्राप्ति एवं निकासी का कार्य मजदूरों की व्यवस्था के अभाव में अवरुद्ध है। निगम के महाप्रबंधक आरके चतुर्वेदी कई जिलों में डिपो की समस्या स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा, अब ठेकेदारी व्यवस्था खत्म करने के श्रम मंत्रालय के आदेश के कारण यह समस्या है। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत, राज्य भंडारागार निगम के गोदामों से उठान के लिए राज्य के अफसरों से कहा गया है। स्टाक की कहीं कोई कमी नहीं है।
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