सरकारी कामकाज ऐसे ही होता है। योजनाएं बनती हैं। बजट आते हैं, फाइलें दौड़ती रहती हैं। बाकी सब कुछ यथावत रहता है। मनरेगा को ही लें तो, अलीगढ़ जिले के लिए आई करोड़ों की धनराशि खर्च ही नहीं हुई। इसके बावजूद अफसरों ने केंद्र से इस साल के लिए एक अरब रुपये मांगे गये हैं। जिले को वित्त वर्ष 09-10 में मनरेगा के तहत 40 करोड़ रुपये मिले थे। इसमें से सबसे अधिक दस करोड़ सिंचाई विभाग को नहरों की सफाई के लिए दिए गए। विभाग सिर्फ तीन करोड़ रुपये ही खर्च किये। नहरों की सफाई का काम पंद्रह नवंबर तक पूरा करना था लेकिन यह पंद्रह दिसंबर तक भी पूरा नहीं हुआ। चूंकि किसानों को पानी भी देना था, इसलिये सीडीओ जेबी सिंह ने काम रुकवा कर नहर में पानी छुड़वा दिया। इसके अलावा जिले के बारह ब्लाकों में मनरेगा की धनराशि खर्च नहीं हुई है। इसमें सबसे बुरी स्थिति टप्पल, धनीपुर और अकराबाद ब्लाक की है। वित्तीय वर्ष खत्म होने वाला है और अभी तक योजना की पैसा पूरा खर्च नहीं हुआ है। पैसा खर्च न होने की स्थिति में केंद्र बजट में कटौती कर सकती है। अपनी गर्दन बचाने के लिये अफसरों ने नये वित्त वर्ष के लिए एक अरब रुपये का बजट तैयार कर लिया है। इस बारे में पूछे जाने पर जेबी सिंह ने कहा, बजट मार्च तक खर्च कर लिया जाएगा। काम में तेजी लाई जा रही है।
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