काम घटाकर पैसा बढ़ाने का काम केवल टीम कलमाड़ी ही कर सकती थी। क्वींस बेटन रिले के आयोजन में यह घोटाला भी हुआ है। राष्ट्रमंडल खेल आयोजकों ने इस समारोह की इवेंट मैनेजमेंट कंपनी जैक मॉर्टन पर आश्चर्यजनक मेहरबानी दिखाई है। इस कंपनी को दिया गया काम आयोजकों ने घटा दिया, लेकिन इसकी फीस करीब 50 हजार डॉलर बढ़ा दी गई। इस कंपनी को ठेका देने के लिए पारित किए गए प्रस्ताव व मूल्यांकन के दस्तावेजों में भी गड़बड़झाला पकड़ा गया है। जैक मॉर्टन और मैक्सम की तरफदारी और अनुबंधों में अपारदर्शिता उजागर होने के साथ ही यह साफ हो गया है कि क्वींस बेटन रिले का पूरा समारोह भ्रष्टाचार से भरपूर रहा है। इसमें आयोजकों के साथ काम करने वाली तीनों कंपनियां (एएम फिल्म्स, जैक मॉर्टन और मैक्सम) पर आयोजकों ने हर नियम तोड़कर मेहरबानी दिखाई। जैक मॉर्टन का मामला दिलचस्प ढंग से रहस्यमय है। इस कंपनी को चुनने वाली तकनीकी मूल्यांकन समिति के फैसले पर राष्ट्रमंडल खेल महासंघ (सीजीएफ) के सीईओ माइक हूपर ने पहले अचरज जताया मगर बाद में इसकी तरफदारी कर दी। जैक मॉर्टन को सितंबर 2009 में करीब 1.99 लाख डॉलर में इवेंट मैनेजमेंट का काम मिला था। हैरत की बात है कि आयोजकों ने एक माह बाद ही अक्टूबर में इस कंपनी के कामकाज की सूची संशोधित कर दी, जिसमें इसका काम घटा दिया गया था मगर इसे किया जाने वाला भुगतान बढ़ाकर 2.49 लाख डॉलर कर दिया गया। जांच एजेंसियां इस मेहरबानी का सबब तलाशने की कोशिश में लगी हैं। सूत्र बताते हैं कि जैक मॉर्टन की निविदा के मूल्यांकन से संबंधित जो दस्तावेज जांच एजेंसियों को मिले हैं वह पूरी दाल ही काली होने की तरफ इशारा करते हैं। दिलचस्प है कि तकनीकी मूल्यांकन समिति के दस्तावेजों पर प्रकाशन की तारीख 23 और 24 जून 2009 दर्ज है लेकिन समिति के सदस्यों ने इस पर दस्तखत 22 जून की तारीख में किए हैं। इसी तरह वाणिज्यिक मूल्यांकन समिति के ब्योरे का प्रकाशन 21 जुलाई 2009 को हुआ मगर सदस्यों ने इस पर दस्तखत तीन दिन पहले ही कर दिए थे।
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