राष्ट्रमंडल के आयोजकों ने क्वींस बेटन रिले समारोह में राष्ट्रपति की मौजूदगी को भी अपने भ्रष्ट खेल में इस्तेमाल कर लिया। अक्टूबर 2009 में लंदन में हुए आयोजन का बजट राष्ट्रपति के दौरे के बहाने न केवल छह गुना बढ़ा लिया गया, बल्कि चहेती कंपनियों को अतिरिक्त भुगतान भी कर दिया गया। राष्ट्रपति भवन के सूत्रों का कहना है कि महामहिम की लंदन यात्रा आधिकारिक यात्रा थी और क्वींस बेटन रिले में हुए खर्च का उनके दौरे से कोई लेना देना नहीं। इसी आयोजन में भ्रष्टाचार को लेकर सीबीआइ ने आयोजन समिति के चेयरमैन सुरेश कलमाड़ी सहित अन्य अफसरों के यहां छापे मारे हैं और अब कलमाड़ी सीबीआइ की पूछताछ का सामना करने वाले हैं। यह शायद पहला मौका है जब राष्ट्रपति के कार्यक्रम को इस तरह इस्तेमाल किया गया है। जाहिर है कि जांच रिपोर्ट जब भी संसद और सरकार के सामने होगी, राष्ट्रपति भवन के लिए असहज स्थिति पैदा करेगी। राष्ट्रमंडल खेलों की परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति ने 29 अकटूबर 2009 को लंदन में ब्रिटेन की महारानी से बेटन ली थी जो बाद में सभी राष्ट्रमंडल देशों में घूमती हुई दिल्ली पहुंची। दैनिक जागरण के पास मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि आयोजकों ने महामहिम की लंदन यात्रा को आधार बनाकर मई 2009 में क्वींस बेटन रिले का खर्च 2.20 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 12.77 करोड़ रुपये कर दिया। यही नहीं क्वींस बेटन रिले की इवेंट प्रबंधन कंपनी और ए एम कार एंड वैन हायर्स को भी राष्ट्रपति की यात्रा का तर्क देते हुए अतिरिक्त भुगतान किए गए। जागरण के पूछने पर राष्ट्रपति भवन इन फैसलों पर हैरत जताई। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि राष्ट्रपति की यात्राओं का कार्यक्रम महीनों पहले बनता है और इसकी सूचना सबके पास होती है। कई अन्य कार्यक्रमों के साथ क्वींस बेटन रिले की शुरुआत भी उनकी लंदन यात्रा का हिस्सा थे। आयोजन समिति को क्वींस बेटन रिले समारोह का बजट तय करते समय यानी मई 2009 में ही यह पता चल गया था कि राष्ट्रपति इस समारोह में मौजूद होंगी। इस आयोजन के लिए इवेंट मैनेजमेंट कंपनी मे. जैक मॉर्टन वर्ल्ड वाइड को भी मई के अंत में ही ठेका दिया गया, लेकिन अक्टूबर में राष्ट्रपति के दौरे के नाम पर काम का दायरा बढ़कर कंपनी को 12,719 पौंड अतिरिक्त दिए गए। इसी तरह ए एम कार एंड वैन हायर्स लिमिटेड को 36000 पौंड का विवादित भुगतान भी राष्ट्रपति के दौरे को आधार बनाकर किया गया। दरअसल क्वींस बेटन रिले के आयोजन में ए एम फिल्म्स को हुआ भुगतान तो घोटालों की बानगी भर है। यह आयोजन कई घोटालों और मनमाने फैसलों का पिटारा है जो जांच एजेंसियों की छानबीन में एक-एक कर सामने आ रहे हैं।
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