Wednesday, January 19, 2011

कपास निर्यात परमिट बांटने में बंदरबांट!

तमाम घोटालों के राज खुलने के इस मौसम की जद में अब विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) भी आ गया है। महानिदेशालय पर आरोप लग रहे हैं कि उसने मौजूदा कपास सत्र की बची अवधि के लिए कपास निर्यात के जो परमिट जारी किए हैं उनमें से ज्यादा ऐसी फर्मो को दे दिए गए हैं जिन्हें इनके निर्यात का अनुभव ही नहीं है। सरकार ने मौजूदा कपास सत्र (अक्टूबर 2010- सितंबर 2011) के दौरान कुल 55 लाख गांठ (एक गांठ में 170 किलो) कपास निर्यात की अनुमति दी है। इसके निर्यात की अवधि पहले एक नवंबर से 15 दिसंबर तक ही थी। मगर इस दौरान केवल 30 लाख गांठों का ही निर्यात हो सका। बाद में सरकार ने शेष मात्रा के निर्यात के लिए निर्यात सुविधा फिर शुरू करने की घोषणा की। डीजीएफटी को 31 दिसंबर से छह जनवरी के बीच कपास निर्यात के लिए 930 आवेदन मिले और उसने 11 जनवरी से परमिट जारी किए। सूत्रों का कहना है कि दूसरे चरण में लगभग 75 प्रतिशत निर्यात कोटा ऐसे व्यापारियों को दिया गया है जिनका अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कोई अनुभव नहीं है। उनके अनुसार 20 व्यापारियों को एक-एक लाख गांठ के निर्यात का परमिट दिया गया है। इनमें से 15 इस क्षेत्र में नए हैं। मुंबई के एक व्यापारी ने कहा कि अनुभवी कंपनियों को केवल 500-500 गांठ का परमिट दिया गया है। डीजीएफटी के अधिकारियों से इस बारे में संपर्क नहीं हो सका। व्यापारियों के अनुसार निर्यातकों के संगठन फियो की मुंबई में हाल ही की एक बैठक में भी यह मुद्दा उठा था। हालांकि डीजीएफटी के अधिकारियों ने इसमें सुधार का आश्वासन दिया था मगर इस बारे में अभी तक कुछ भी नहीं किया गया।

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