दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल भले ही अपनी दलीलों से 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले की बात को नकारने और राजा को बेदाग बताने में जुटे हैं, लेकिन नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) ने दो टूक कहा है कि स्पेक्ट्रम आवंटन में 1.76 लाख करोड़ के राजस्व नुकसान की अपनी रिपोर्ट पर वह पूरी तरह से कायम है। ज्ञात हो, सिब्बल ने स्पेक्ट्रम आवंटन में 1.76 लाख करोड़ के अनुमानित घाटे संबंधी कैग की रिपोर्ट को पूरी तरह भ्रामक बताया था। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा, कैग 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए नुकसान के बारे में दी गई अपनी रिपोर्ट पर शत प्रतिशत कायम है। नवंबर 2010 में संसद में पेश 77 पेज की अपनी रिपोर्ट में सरकारी आडिटर ने कहा है कि सरकार ने 2001 की कीमत पर 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन (दूससंचार क्षेत्र में काम करने के लिए 122 कंपनियों को लाइसेंस और 35 ड्यूल टेक्नालाजी लाइसेंस) किए। जिससे सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। इतना ही नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि लाइसेंस आवंटन में जांच पड़ताल का काम ठीक से नहीं किया गया और यहां तक कि दूरसंचार नियामक (ट्राई) की सिफारिशों को भी नजरंदाज किया गया। कैग प्रवक्ता ने संसदीय प्रक्रिया और व्यवहार का हवाला देते हुए कहा, यह प्रक्रिया संसद की लोक लेखा समिति( पीएसी) के विचाराधीन किसी भी विषय पर किसी भी अधिकारी, सांसद और पीएसी के किसी भी सदस्य को टिप्पणी करने से रोकती हैं। प्रवक्ता ने कहा, यही कारण है कि कैग की ओर से सिब्बल के बयान पर कोई टिप्पणी नहीं की गई। गत सप्ताह सिब्बल ने कैग की 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में 1.76 लाख करोड़ रुपए के नुकसान के अनुमान को भ्रामक करार दिया था। मंत्री ने यहां तक कह दिया था कि इस मामले में सरकार को कोई नुकसान नहीं हुआ। सिब्बल ने कहा था कि मेरा विश्वास है कि (कैग) प्रक्रिया में कोई गंभीर खामी रह गई जिससे एक तरह की सनसनी फैल गई और विपक्ष को जनता के बीच इस झूठ को फैलाने का हथियार मिल गया,हम इसका विरोध करते हैं।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment