Sunday, January 30, 2011

काले धन की जानकारी को करना होगा इंतजार


बैंक खातों का स्वर्ग माने जाने वाले स्विट्जरलैंड से वहां जमा काले धन से संबंधित जानकारी जनता तक आने में अभी और वक्त लगेगा। स्विस बैंक के खातों की जानकारी पाने के लिए सरकार इस देश के साथ जो कानूनी व्यवस्था कायम कर रही है उसे अंजाम तक पहुंचने में अभी कम से कम आठ-नौ महीने लगेंगे। हालांकि इसके बाद भी इस देश से सिर्फ कर चोरी से संबंधित मामलों की जानकारी ही प्राप्त हो सकेगी। अन्य देशों की तरह स्विस बैंकों से भी सरकार कर संबंधी सूचना के आदान-प्रदान के जरिए ही जानकारी पाने की व्यवस्था कर रही है। चूंकि अभी स्विट्जरलैंड के साथ दोहरे कर से बचने वाली संधि तो है, लेकिन उसके तहत स्विट्जरलैंड से बैंकिंग सूचनाओं से संबंधित जानकारी पाने का कोई जरिया नहीं है। यही वजह है कि सरकार अब स्विट्जरलैंड के साथ भी कर सूचना के आदान-प्रदान संबंधी समझौते की बातचीत कर रही है। स्विट्जरलैंड से यह समझौता इस साल सितंबर तक होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने अपने मंत्रालय से संबंधित स्थायी समिति को बताया है कि स्विट्जरलैंड के साथ बातचीत चल रही है और सात-आठ महीने में इस समझौते की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। वैसे सरकार ने करीब 65 देशों के साथ इस तरह की व्यवस्था कायम करने की कवायद शुरू की है, लेकिन अभी तक कर संबंधी सूचना के आदान-प्रदान को लेकर सिर्फ 10 देशों के साथ ही बातचीत को अंतिम रूप दिया जा सका है। विदेशों में जमा काले धन के मामले में सुप्रीमकोर्ट की फटकार के बाद सरकार के प्रयासों में और तेजी आई है। जिन देशों के साथ दोहरे कर से बचने की संधि है उनमें से ही 10 देशों के साथ कर सूचनाओं के आदान-प्रदान का समझौता हुआ है। इन समझौतों में इस बात का खास ध्यान रखा गया है कि अन्य देशों के साथ बैंकिंग सूचनाओं का आदान-प्रदान तो हो ही, साथ ही जो करदाता दोहरे कर से बचाव की संधि के दायरे में नहीं आते उनके बारे में भी जानकारी एकत्रित की जा सके। अभी तक के प्रयासों से वित्त मंत्रालय विदेशों में 48,784 करोड़ रुपये की आमदनी का पता लगा चुका है जिस पर टैक्स वसूली की प्रक्रिया जारी है। हालांकि सरकार के पास अभी विदेशों में जमा काले धन के सही आंकड़े का कोई अनुमान नहीं है, लेकिन वित्त मंत्रालय के मुताबिक हाल में हुए अध्ययन में करीब 462 अरब डॉलर की ऐसी राशि का अनुमान सामने आया है। जबकि भाजपा के एक कार्यदल ने 500 से 1400 अरब डॉलर के काले धन का अनुमान लगाया था।


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