Wednesday, January 26, 2011

काले धन पर लेचेस्टाइन ने किया मदद से इंकार


यूरोपीय संघ के छोटे लेकिन सर्वाधिक धनी देशों में शुमार लेचेस्टाइन ने काले धन के मामले में भारत के मदद के आग्रह को ठुकरा दिया है। दोनों देशों के बीच इस संबंध में कोई द्विपक्षीय समझौता नहीं होने को उसने इसका कारण बताया है। विपक्षी दलों के साथ ही सुप्रीम कोर्ट से भी भारत सरकार पर विदेशी बैंकों में काला धन रखने वाले भारतीयों के खिलाफ कार्रवाई का दबाव है। खासकर जो धन भारतीयों ने स्विटजरलैंड, लेचेस्टाइन और कैमन द्वीपों में छुपाकर रखा है। लेचेस्टाइन सरकार ने पुष्टि की है कि भारत सरकार ने उससे प्रशासनिक सहयोग और कुछ भारतीय ग्राहकों के एलजीटी बैंक में खातों का ब्योरा मांगा था। लेचेस्टाइन के प्रवक्ता ने कहा, अभी हम भारत के आग्रह का जवाब नहीं दे सकते। इसके लिए कोई कानूनी आधार नहीं है। दोनों देशों में इस संबंध में कोई समझौता नहीं हुआ है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि लेचेस्टाइन सरकार ने भारत के साथ कर समझौते पर वार्ता की पेशकश की है। समझौते के बाद भविष्य में संदिग्ध कर चोरों के बारे में सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा सकेगा। भारत सरकार को पिछले साल जर्मनी की सरकार से एलजीटी बैंक में भारतीयों के गुप्त खातों की जानकारी मिली थी। लेचेस्टाइन की आबादी महज पैंतीस हजार है लेकिन यह दुनिया के सबसे धनी देशों में शामिल है। इस देश का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद दुनिया में सबसे अधिक है।


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