Sunday, January 23, 2011

टीम कलमाड़ी ने अध्ययन पर फूंके आठ करोड़


राष्ट्रमंडल खेल के नाम पर सरकारी खजाने की लूट ने जांच एजेंसियों को हैरत में डाल दिया है। 2008 में हुए बीजिंग ओलंपिक के अध्ययन के नाम पर साढ़े आठ करोड़ रुपये उड़ा दिए गए। हैरानी की बात यह है कि आयोजन समिति के पास न तो बीजिंग जाने वालों की पूरी सूची है और न ही अध्ययन रिपोर्ट। बीजिंग दौरे को सही ठहराने के लिए बाद में फर्जी दस्तावेज बनाए गए थे। राष्ट्रमंडल खेल घोटाले की जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 22 जुलाई 2008 को आयोजन समिति ने 166 लोगों के बीजिंग दौरे को आधिकारिक रूप से मंजूरी दी थी। इसके लिए बीजिंग के होटलों में 18 दिनों के लिए कुल 18 कमरे बुक कराए गए थे। आयोजन समिति ने होटलों को 4.71 करोड़ रुपये का भुगतान किया। इसके अलावा हवाई जहाज के टिकट पर 86 लाख और खेलों के टिकट खरीदने पर 74 लाख रुपये खर्च किए गए। यही नहीं, बीजिंग गए अधिकारियों को जेब खर्च के रूप में 1.73 करोड़ रुपये भी दिए गए। होटल को किए गए भुगतान में खाने-पीने पर हुए खर्च शामिल थे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आयोजन समिति के कार्यालय से बीजिंग जाने वाले अधिकारियों व राजनेताओं की एक सूची तो मिली है, लेकिन यह अधूरी है। दस्तावेजों से स्पष्ट है कि इस सूची के बाहर के कई लोगों को बीजिंग भेजा गया था। हैरानी की बात यह है कि बीजिंग दौरे से लौटकर प्रतिनिधियों ने कोई रिपोर्ट नहीं दी और न ही आयोजन समिति ने उनसे इस संबंध में कोई जानकारी मांगी। साफ है बीजिंग दौरे के नाम पर साढ़े आठ करोड़ रुपये उड़ा दिए गए। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बीजिंग दौरे को मंजूरी देने से संबंधित आयोजन समिति की बैठक के दस्तावेजों में हेरफेर की गई है। दस्तावेज में दर्ज बैठक की तारीख भी बाद में बदली गई है। आशंका है कि 22 जुलाई 2009 को बाद में 22 जुलाई 2008 कर दिया गया। यदि ऐसा है तो बीजिंग दौरे के एक साल बाद उसे सही ठहराने के लिए यह किया गया था।


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