Thursday, January 13, 2011

कुशल कारीगर बनाने की योजना घोटाले में फंसी

केंद्र सरकार द्वारा 2008 में शुरू हुई एक करोड़ कुशल कारीगर बनाने की महत्वाकांक्षी योजना घोटाले में फंसकर बंद हो गयी है। इसी परिपेक्ष्य में प्रदेश के सभी वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोवाइडर (वीपीटी) की जांच की जा रही है। केंद्र सरकार ने स्किल डेवलपमेंट स्कीम के अंतर्गत 1500 ट्रेड्स में अवस्थापना सुविधाओं से युक्त प्रशिक्षण केंद्रों को छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षित करने की अनुमति दी थी। इसके लिए 800 रुपया प्रति छात्र शुल्क जमा कराने और परीक्षा उत्तीर्ण छात्रों को शुल्क वापस करने को कहा गया था। 2008 में कानपुर जिले के 80 केंद्रों सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में हजारों सरकारी-गैर सरकारी केंद्र खुल गये, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण लेकर उत्तीर्ण हो गए। छात्रों के शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान की बारी आयी तो पता चला कि केंद्रों ने प्रशिक्षण और प्रवेश में मानकों की अनदेखी की है। एक संस्था ऐसी भी मिली जिसने 60 लाख रुपये से अधिक शुल्क प्रतिपूर्ति की मांग की थी। इतना ही नहीं फर्जी छात्रों के माध्यम से धन खाने के भी प्रमाण मिले तो केंद्र ने जांच शुरू करा दी। योजना में अनियमितता मिलने पर आइटीआइ का संचालन करने वाले विभाग प्रशिक्षण एवं सेवायोजन के निदेशक को जांच का काम सौंपा। निदेशक ने सूबे के सभी जिलों के आइटीआइ प्रधानाचार्यो से पड़ताल कराई। जांच में जो नतीजे मिले, उसके मुताबिक कानपुर के 80 केंद्रों से 12,988 छात्रों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिनसे 800 रुपया प्रति छात्र की दर से एक करोड़ 3 लाख 90 हजार 400 रुपया वसूला गया। शुल्क बैंक ड्राफ्ट से जमा कराना था परंतु मनमानी हुई। यहां आइटीआइ प्रधानाचार्य केके लाल की ओर से कराई जांच में 80 प्रतिशत से अधिक केंद्र ऐसे मिले हैं जो शुल्क जमा कराने की विधि प्रमाणित नहीं कर पाए हैं। छात्रों की संख्या भी संदिग्ध मिली है। कई केंद्रों के पास तो अवस्थापना सुविधाएं ही नहीं मिली।

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