Monday, January 10, 2011

300 करोड़ का काम, दिया 630 करोड़ का ठेका

कॉमनवेल्थ खेलों में भ्रष्टाचार की जांच करे रहे सीबीआइ के अधिकारी ओवरले (अस्थायी निर्माण व साज-सज्जा) में मची लूट को देखकर हैरान हैं। ओवरले के लिए मनमाने तरीके से चुने गए चारों कंसोर्टियम में 1500 करोड़ रुपये में पूरा काम करने का टेंडर भरा, लेकिन बाद में 630 करोड़ रुपये में काम करने पर राजी हो गए। फिर भी इन कंपनियों से काम केवल 500 करोड़ रुपये का ही लिया गया। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ओवरले के पूरे काम का टेंडर केंद्रीय सतर्कता आयोग के निर्देशों का खुला उल्लंघन है। इस काम के लिए कुल 10 कंपनियों ने आवेदन किया था। इनमें से छह कंपनियों को तकनीकी आधार पर काम करने के लिए ठीक पाया गया, लेकिन ठेका केवल चार कंपनियों को मिला। आयोजन समिति के महानिदेशक वीके वर्मा समेत किसी भी अधिकारी के पास अन्य दो कंपनियों को ठेका नहीं दिए जाने का जवाब नहीं है। उन्होंने कहा कि कंसोर्टियम बनाने वाली चार कंपनियों को मनमाने तरीके से ओवरले का काम करने के लिए चुन लिया गया। विडंबवा यह है कि लगभग 40 तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं लेने वाली आयोजन समिति को मालूम ही नहीं था कि ओवरले में किन-किन चीजों की कितनी जरूरत है। इसीलिए ठेका दिए जाने के बाद चारों कंपनियों से मोल-भाव शुरू हुआ। शुरू में इन कंपनियों ने पूरे काम के लिए 1500 करोड़ रुपये का टेंडर दिया, लेकिन मोलभाव के बाद 630 करोड़ रुपये पर राजी हो गए। सीबीआइ का मानना है कि जांच एजेंसियों को बरगलाने के लिए ही यह सब किया गया है। असल में ओवरले का काम तो केवल 500 करोड़ रुपये का ही हुआ था। जबकि आयोजन समिति बिना काम कराए ही बाकी के 130 करोड़ रुपये इन कंपनियों को और देना चाहती थी। दूसरी ओर, इन कंपनियों के दफ्तर से मिले दस्तावेजों के अनुसार इन्होंने औसतन 40 फीसदी मुनाफा लेकर ओवरले का काम किया था। सीबीआइ अधिकारियों का मानना है कि यदि ठेके की प्रक्रिया को पारदर्शी रखा जाता तो ओवरले पर 300 करोड़ रुपये से भी कम लागत आती।

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