रिश्वतखोरी में राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अधिकारियों ने ठेके की लागत की 15 फीसदी रिश्वत लेकर बड़े-बड़े रिश्वतखोरों को भी पीछे छोड़ दिया है। सीबीआइ ने अपनी चौथी एफआइआर में इस बात की जानकारी दी है। यह एफआइआर ओवरले (अस्थायी निर्माण और साज-सज्जा) के दिए गए ठेके से संबधित है। सीबीआइ की एफआइआर के अनुसार राष्ट्रमंडल खेल परिसरों के आसपास ओवरले का ठेका देने के लिए आयोजन समिति के अधिकारियों ने ठेके की रकम का 15 प्रतिशत रिश्वत के रूप में लिया था। एफआइआर में कहा गया है कि जीएल इवेंट्स-मेराफोर्म इंडिया कंसोर्टियम के निदेशक बीनू नानू और रूपना बीनू ने ठेका लेने के लिए आयोजन समिति के अधिकारियों को यह रिश्वत दी थी। एफआइआर में रिश्वत लेने वाले अधिकारियों का उल्लेख नहीं है। वैसे पूरे ओवरले घोटाले के लिए सीबीआइ ने ठेका लेने वाले चारों कंसोर्टियम के साथ ही आयोजन समिति के महानिदेशक वी.के. वर्मा को आरोपी बनाया है। पूरी एफआइआर में विस्तार से बताया गया है कि किस तरह नियमों का उल्लंघन कर इन चारों कंसोर्टियम को 300 करोड़ रुपये के काम का ठेका 680 करोड़ रुपये में दे दिया। यही नहीं, ओवरले के काम में लगे सामानों की आपूर्ति 40 फीसदी अधिक दामों पर करने के बावजूद पूरा काम केवल 500 करोड़ रुपये का ही हुआ। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बीनू नानू द्वारा 15 फीसदी रिश्वत देना इस बात की ओर साफ संकेत है कि तीन अन्य कंसोर्टियम ने भी इसी दर पर रिश्वत दी थी। इस तरह 680 करोड़ रुपये के ओवरले का ठेका देने के लिए 100 करोड़ रुपये की रिश्वत दिए जाने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि रिश्वत की सही रकम के साथ ही इसे लेने वाले अधिकारियों का पता लगाया जा रहा है।
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