कॉमनवेल्थ खेल घोटाले में आयोजन समिति के वरिष्ठ अधिकारियों के बाद ठेकेदारों पर भी शिकंजा कसने का सिलसिला शुरू हो गया है। सीबीआइ ने खेल परिसरों के आसपास ओवरले (अस्थायी निर्माण व साज-सज्जा) का काम करने वाली कंपनी जीएल इवेंट्स के मालिक बीनू नानू को गिरफ्तार कर लिया है। जीएल इवेंट्स ने मेरोफार्म इंडिया के साथ कंसोर्टियम बनाकर कॉमनवेल्थ खेलों को दौरान ओवरले का काम करने के लिए करोड़ों रुपये का ठेका लिया था। सीबीआइ की एफआईआर के अनुसार नानू ने यह ठेका लेने के लिए आयोजन समिति के अधिकारियों को 15 फीसदी रिश्वत दी थी। वैसे एफआईआर यह स्पष्ट नहीं है कि रिश्वत की यह रकम किन-किन अधिकारियों को मिली थी। सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूछताछ के दौरान सहयोग नहीं करने के कारण बीनू नानू को गिरफ्तार कर हिरासत में पूछताछ करने का फैसला किया गया। सीबीआइ ने नानू को स्थानीय अदालत में पेश कर चार दिन के लिए पुलिस रिमांड पर ले लिया है। गौरतलब है कि सीबीआइ ने 630 करोड़ रुपये के ओवरले का काम करने वाली चारों कंसोर्टियम के मालिकों समेत आयोजन समिति के महानिदेशक वीके वर्मा के खिलाफ पिछले हफ्ते एफआइआर दर्ज किया था। ओवरले घोटाले को छुपाने के लिए आयोजन समिति के अधिकारियों ने भरसक कोशिश की। इन कंसोर्टियमों ने पहले तो ओवरले के काम के लिए 1500 करोड़ रुपये का टेंडर भरा और बाद में सौदेबाजी कर 630 करोड़ रुपये में पूरा काम करने के लिए तैयार हो गए। मजेदार बात यह है कि कॉमनवेल्थ के दौरान ओवरले का काम केवल 500 करोड़ रुपये का ही हुआ। जबकि इन कंसोर्टियमों ने आयोजन समिति को बाजार से 40 फीसदी अधिक कीमत पर ओवरले के सामानों की आपूर्ति की।
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