Thursday, January 13, 2011

थॉमस और सरकार के लिए नई मुसीबत

पामोलिन घोटाले में आरोपी मुख्य सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) पीजे. थामस सरकार के गले में फिर फंसने वाले हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तीन साल से स्थगितइस घोटाले की सुनवाई का रास्ता खोल दिया है। सुनवाई पर रोक केरल के पूर्व मुख्यमंत्री करुणाकरन की अपील पर लगी थी जो उनके निधन के बाद समाप्त हो गई है। इसके साथ ही ट्रायल पर रोक लगाने वाला सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी समाप्त हो गया है। पामोलिन आयात प्रकरण के चलते सीवीसी पद पर थॉमस की नियुक्ति सवालों के घेरे में आई थी और उन्हें पद से हटाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जवाब तलब किया है। इसी मामले के कारण उन्हें सीवीसी होते हुए भी 2जी स्पेक्ट्रम मामले की निगरानी से खुद को अलग करना पड़ा था। न्यायमूर्ति आफताब आलम व आरएम लोधा की पीठ ने अपील पर सुनवाई समाप्त करने का आदेश तब पारित किया जब केरल सरकार और करुणाकरन के वकील ने पीठ को करुणाकरन के निधन के बारे में सूचित किया। इस मामले में केरल के पूर्व मुख्य मंत्री करुणाकरन और थामस समेत आठ लोग अभियुक्त हैं जिनके खिलाफ विशेष अदालत में आरोप-पत्र दाखिल हो चुका है। 3 अगस्त 2007 को सुप्रीम कोर्ट ने करुणाकरन की अपीलीय याचिका पर विशेष अदालत में लंबित सुनवाई पर रोक लगा दी थी। करुणाकरन ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए सक्षम अथारिटी से मंजूरी न लिये जाने के आधार पर ट्रायल को चुनौती दी थी। कथित घोटाले के समय करुणाकरन केरल के मुख्यमंत्री थे। थॉमस के खिलाफ मुकदमें की मंजूरी की फाइल अब सरकार को फिर परेशान करने वाली है। इस स्वीकृति के बिना थामस के खिलाफ ट्रायल शुरु नहीं हो सकेगा, लेकिन अगर अन्य लोगों के खिलाफ भी सुनवाई शुरू हुई तो भी थॉमस और सरकार किरकिरी होती रहेगी क्योंकि यह फैसला थॉमस के खाद्य सचिव रहते हुए हुआ था। 27 जनवरी को थॉमस की सीवीसी पद पर नियुक्ति का मामला सुप्रीम कोर्ट में आने वाला है। इस नियुक्ति पर कोर्ट ने सरकार से ही नहीं थामस से भी जवाब तलब किया है। थामस को अदालत में जवाब दाखिल कर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। सरकार को भी बताना पड़ेगा कि एक दागी व्यक्ति सीवीसी पद पर कैसे काम कर सकता है। उल्लेखनीय है कि 1991-92 में केरल की करुणाकरन सरकार ने सिंगापुर की एक कंपनी से पाम आयल आयात किया था। आरोप है कि राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में पामोलिन की मौजूदा कीमत से ज्यादा कीमत पर पामोलीन आयात किया था और इससे सरकार को करीब 2.32 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था।

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