भारत सरकार के उपक्रम राइट्स लिमिटेड में कर्मचारियों के पीएफ में 1.39 करोड़ रुपये का घोटाला उजागर हुआ है। इसका खुलासा सीबीआइ ने अदालत के समक्ष पेश की गई चार्जशीट रिपोर्ट में किया है। सीबीआइ ने इस मामले में राइट्स के सहायक प्रबंधक समेत दो लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। कड़कड़डूमा स्थित विशेष सीबीआइ जज पीएस तेजी की अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 14 फरवरी की तिथि मुकर्रर की है। पेश मामले में सीबीआई ने 21 अगस्त, 2009 को राइट्स लिमिटेड के विजिलेंस विभाग के जनरल मैनेजर राजेश अग्रवाल की शिकायत पर राइट्स के सहायक मैनेजर रविंद्र कुमार और उनके साथी राजेश कुमार शर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। राजेश अग्रवाल का कहना था कि बैंगलोर के एक सरकारी विभाग के सिविल मैनेजर एमएस धनंजय मूर्ति ने वर्ष 2006 में पीएफ अकाउंट से 2 लाख 20 हजार रुपये निकालने के लिये आवेदन किया। जब जांच की गई तो पाया कि उनके पीएफ अकाउंट से एक चेक के माध्यम से 19 जुलाई, 2006 को भुगतान कर दिया गया है। यह राशि रविंद्र कुमार ने राजेश कुमार के नाम जारी की थी। राजेश ने इसे चांदनी चौक स्थित एचडीएफसी बैंक के खाते में कैश कराया। राइट्स के विजिलेंस विभाग ने विभिन्न सरकारी कर्मचारियों के पीएफ खाते चेक किए और पाया कि सहायक प्रबंधक रविंद्र कुमार ने राजेश कुमार शर्मा के माध्यम से करीब 35 सरकारी कर्मचारियों के खाते से रुपये निकालते हुए लगभग एक करोड़ 39 लाख रुपये का घोटाला किया है। सीबीआइ ने राजेश अग्रवाल की शिकायत पर इस मामले की जांच की और विभाग के आरोपों को सही पाया। सीबीआइ ने चार्जशीट रिपोर्ट में रविंद्र कुमार और राजेश कुमार शर्मा को धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में दोषी पाते हुए उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट रिपोर्ट दाखिल की है।
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