धीरे-धीरे ही सही जांच एजेंसियों के सामने राष्ट्रमंडल खेलों में फैले भ्रष्टाचार का सच सामने आने लगा है। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पर खेलों के दौरान साफ-सफाई रखने का ठेका देने के एवज में दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। फिलहाल केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) इसकी जांच कर रहा है, लेकिन जल्द ही सीबीआई इस मामले एफआइआर दर्ज कर जांच शुरू कर सकती है। सीवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस मामले में विस्तृत शिकायत मिली है और उसकी पड़ताल की जा रही है। उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच में आरोप में सच्चाई नजर आ रही है। इसीलिए इसे सीबीआई को भेजने का फैसला लिया गया। सीवीसी को मिली शिकायत के अनुसार सुरेश कलमाड़ी ने राष्ट्रमंडल खेल परिसरों की साफ-सफाई का ठेका देने के लिए दो करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। सीवीसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार खेलों के दौरान खेल परिसरों की साफ-सफाई के लिए अक्टूबर 2009 में टेंडर की प्रक्रिया शुरू हुई थी। इसके तहत 23 कंपनियों को प्री बिड (टेंडर होने से पहले कंपनी की सक्षमता की जांच) में इस काम के योग्य पाया गया था, लेकिन बाद में टेक्निकल और कामर्शियल बिड के दौरान नए नियम डाल दिए गए और अंतत सारा ठेका ए2जेड नाम की कंपनी को दे दिया। कंपनी को यह पूरा ठेका 19 करोड़ रुपये में मिला। 19 करोड़ रुपये के बदले ए2जेड कंपनी को खेल परिसरों की साफ-सफाई के लिए 5000 कर्मचारियों को तैनात करना था, लेकिन कंपनी ने केवल आधे कर्मचारी ही तैनात किये। आयोजन समिति के दस्तावेज भी इसकी पुष्टि करते हैं। इस तरह आयोजन समिति को करोड़ों रुपये का चूना लगा। सीवीसी को भेजी शिकायत में कहा गया है कि इस कंपनी को ठेका देने के लिए आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी ने दो करोड़ रुपये की रिश्वत ली थी। शिकायत के साथ संबंधित दस्तावेजों की प्रति भी सीवीसी को भेजी गई है। सीवीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस शिकायत की प्रति सीबीआई को आगे की कार्रवाई के लिए भेज दी गई है।
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