ऑस्ट्रेलिया की स्मैम और लंदन की एएम फिल्म्स के बाद अब राष्ट्रमंडल खेलों के घोटालों में एक और विदेशी कंपनी का नाम जोड़ लीजिए। यह कंपनी थी ऑस्ट्रेलिया की मैक्सम। इसने रानी की बेटन के कार्यक्रम में कंसल्टेंसी सेवा दी थी। मैक्सम का खेल सबसे अनोखा था, इस कंपनी को अनुबंध मिलने से पहले ही मोटा भुगतान कर दिया गया। सिर्फ यही नहीं इस कंपनी को प्रतिस्पर्धी कंपनियों से आठ गुना महंगी कीमत पर अनुबंध मिला था। यह तथ्य अब किसी से छिपा नहीं है कि राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजकों ने सबसे बड़ा खेल विदेशी कंसल्टेंट्स नियुक्त करने में किया था। पूरे आयोजन में कंसल्टेंट्स पूरी तरह अपारदर्शी ढंग से चुने गए और उन्हें मोटा पैसा दिया गया। मगर क्वींस बेटन आयोजन की कंसल्टेंट कंपनी मैक्सम इनमें सबसे अनोखी थी। इसके साथ आयोजन समिति का अनुबंध फरवरी 2008 में हुआ था, लेकिन कंपनी को दिसंबर 2007 में करीब 12 हजार डॉलर का भुगतान कर दिया गया। यह शायद अपनी तरह का पहला अनुबंध होगा जिसमें किसी कंपनी को काम का ठेका मिलने से पहले ही पैसा मिल गया हो। मैक्सम के साथ अनुबंध करने में जबर्दस्त अपारदर्शिता बरती गई और अब जांच एजेंसियों के सवालों का आयोजकों के पास कोई जवाब नहीं है कि आखिर मैक्सम पर इतनी कृपा क्यों की गई? बात सिर्फ ठेके से पहले भुगतान की ही नहीं है बल्कि यह कंसल्टेंसी के लिए बोली लगाने वाली तीन कंपनियों में भी सबसे महंगी थी। दैनिक जागरण के पास मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि क्वींस बेटन रिले के लिए ब्रिलियंट इंटरप्राइज नेटवर्क, प्राइसवाटर हाउस कूपर्स और मैक्सम ने बोली लगाई थी। पहली दो कंपनियों की बोली क्रमश: 1.85 और 1.91 करोड़ रुपये की थीं जबकि मैक्सम ने इसी काम के लिए आठ करोड़ रुपये मांगे। आयोजकों को सबसे महंगी मैक्सम पसंद आई और इसको ठेका मिल गया। सिर्फ इस वजह से कि इसने कुछ ज्यादा काम किया था, हालांकि सूत्र बताते हैं कि मैक्सम के ज्यादा काम संबंधी कोई दस्तावेजी प्रमाण जांच एजेंसियों को नहीं मिले हैं। यह कंपनी आयोजकों की इतनी चहेती थी कि अनुबंध की शर्तो को ताख पर रखकर आयोजन समिति ने इसके सेवा कर भुगतान की जिम्मेदारी भी उठाई। अनुबंध के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया में सेवा कर का भुगतान कंपनी को खुद करना था, लेकिन भुगतान किया आयोजकों ने और वह भी करीब 2.42 लाख डॉलर का। मैक्सम पर की गई इस कृपा ने जांच एजेंसियों को हैरत में डाल दिया है।
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