Saturday, January 8, 2011

वतन वापसी की राह में भ्रष्टाचार बाधक

वतन वापसी के लिए निवेश को भारतवंशी भले ही अच्छा तरीका मान रहे हैं लेकिन भ्रष्टाचार और राजनीतिक प्रक्रिया में बाधा जैसे मुद्दे उनके पैरों में बेड़ियों का काम कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्रियों ने भारत को निवेश के लिहाज से बेहतर जगह साबित करने की कोशिश शुरू की है लेकिन वहीं कॉमनवेल्थ गेम्स व स्पेक्ट्रम घोटाले और संसद में गतिरोध जैसे मुद्दों पर भारतवंशियों के सवाल भी जस के तस बने हुए हैं। मलयेशिया से आए एस वेणुगोपाल ने अमर उजाला से बात में सवाल भी उठा दिया निवेशकों की पूंजी यहां कितनी महफूज है? एक भारतवंशी ने तो कपिल सिब्बल से सवाल भी पूछ लिया कि संसद तो चलती नहीं और आप शिक्षा सेक्टर को खोलने की बात कह रहे हैं।
संसद तो चलती ही नहीं कि संबद्ध बिल पारित कराया जा सके। सिब्ब्ल ने ऐसी स्थिति हमेशा नहीं होने का आश्वासन दिया, लेकिन सवाल करने वाले कितने संतुष्ट हुए यह तो समय ही बताएगा। सम्मेलन में पूरे उत्साह से भाग ले रहे नॉर्थ अमेरिकन मणिपुर ऐसोसिएशन के एक सदस्य लुखोई शौगाईजाम ने भी कहा कि निवेशकों की पूंजी की सुरक्षा और उनके काम को जल्द से जल्द कराने की गारंटी तो होनी चाहिए। तकरीबन 150 सदस्यीय मलयेशियाई भारतीय प्रतिनिधिमंडल के एक पदाधिकारी वेलू तो इस तरह के सम्मेलन को अच्छी कवायद मानते हैं। उनका कहना है कि भारत में निवेश की दृष्टि से अहम क्षेत्रों को लेकर तस्वीर साफ होती है।



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