Friday, March 11, 2011

कलमाड़ी के जाल में फंसे अफसर बने ढाल


खेल मंत्रालय, दिल्ली सरकार व वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों को बचाने के चक्कर में सीबीआइ राष्ट्रमंडल खेल आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी के खिलाफ शिकंजा नहीं कर कस पा रही है। सीबीआइ के अनुसार कलमाड़ी ने सारी हेराफेरी इन वरिष्ठ अधिकारियों की आड़ में इस तरह छुपाकर की है कि सीधे उन पर हाथ डालना मुश्किल है। सीबीआइ के एक अति वरिष्ठ अधिकारी ने जांच में आ रही मुश्किलों की चर्चा करते हुए कहा कि कलमाड़ी को गिरफ्तार करने की स्थिति में इन सभी निर्दोष अधिकारियों को भी गिरफ्तार करना पड़ेगा। जांच से जुड़े सीबीआइ अधिकारियों के अनुसार आयोजन समिति के अध्यक्ष के रूप में सुरेश कलमाड़ी ने भले ही सारे ठेकों के वितरण और खर्च पर सीधा नियंत्रण रखा हो, लेकिन इन पर अपनी मुहर लगाने से पहले केंद्र और दिल्ली सरकार के संयुक्त सचिव व सचिव स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की भागीदारी वाली समितियों की हरी झंडी लेना नहीं भूले थे। कलमाड़ी की यही चालाकी जांच अधिकारियों की सबसे बड़ी मुश्किल साबित हो रही है। कलमाड़ी ने जानबूझकर तमाम ठेकों को मंजूरी देने में देरी की। अंतिम समय में इन वरिष्ठ अधिकारियों के लिए इन ठेकों की बारीकियों को समझना मुश्किल था। सीबीआइ का मानना है कि ये सभी अधिकारी कलमाड़ी के साथ घोटाले में बराबर के भागीदार नहीं हो सकते हैं, लेकिन कलमाड़ी पर कार्रवाई की स्थिति में गेहूं के साथ घुन की तरह इन सभी का पिसना तय है। जांच एजेंसी इससे बचना चाहती है। वैसे जांच से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि देर-सबेर वे सुरेश कलमाड़ी के काले कारनामे की कलई खोलने में जरूर कामयाब होंगे। उनके अनुसार पिछले पांच महीने की जांच के बाद कुछ मामलों में कलमाड़ी तक रिश्वत की रकम पहुंचने के संकेत मिलने लगे हैं और जल्द ही इनसे जुड़े सबूत भी मिल जाएंगे। जाहिर है कि कलमाड़ी के खिलाफ सीधे सबूत मिलने के बाद जांच एजेंसी उन पर हाथ डालने की स्थिति में होगी। वाधवा की हिरासत बढ़ी: दिल्ली की एक कोर्ट ने भारतीय-स्विस फर्म के प्रबंध निदेशक संदीप वाधवा को चार दिन की सीबीआइ हिरासत में भेजने का आदेश दिया। वाधवा को खेल उपकरणों की आपूर्ति से जुड़े भ्रष्टाचार में कथित भूमिका के चलते गिरफ्तार किया गया था।


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