2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले, एंट्रिक्स-देवास के बीच संदिग्ध समझौते और दागदार पीजे थॉमस को सीवीसी बनाने के मामले में अपनी किरकिरी करा चुके प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए मुश्किल का नया इंतजाम हो गया है। राष्ट्रमंडल खेल घोटाले की जांच भी पीएमओ की दहलीज पर पहुंच गई है। खेलों के ऑडिट के आधार पर नियंत्रक व महालेखा परीक्षक(कैग) ने सवालों की एक लंबी फेहरिस्त कैबिनेट सचिवालय और पीएमओ को भेजी है। चूंकि इन खेलों की प्रशासनिक कमान प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय के हाथ में थी इसलिए ऑडिट एजेंसी जानना चाहती है कि इतने शीर्ष स्तर से प्रशासनिक नियंत्रण के बाद भी घोटाला कैसे हुआ? राष्ट्रमंडल खेलों का प्रशासनिक ढांचा ही इस तरह का है कि सरकार के शीर्ष नेतृत्व का जांच के दायरे से बाहर रह पाना मुश्किल है। खेलों की नीतिगत कमान केंद्रीय मंत्रिसमूह के हाथ थी, जबकि प्रशासनिक मॉनीटरिंग कैबिनेट सचिवालय कर रहा था। दोनों ही पीएमओ के मातहत थीं। आयोजन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल के बाद कैग ने खेल के प्रशासनिक पक्ष को लेकर तमाम सवाल पूछे हैं, जिनमें आयोजन समिति के गठन से लेकर खेलों के आयोजन के लिए बने केंद्रीय मंत्रियों के समूह के कामकाज तक के मुद्दे शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक कैग के सवालों को लेकर कैबिनेट सचिवालय में खासी हलचल है। शीर्ष स्तर पर कुछ बैठकें भी हुई हैं अलबत्ता कैग को अभी तक जवाब नहीं मिले हैं। खेलों के खर्च और घोटाले की पड़ताल के साथ ही कैग प्रशासनिक ढांचे की भी छानबीन कर रहा है। इस सिलसिले में ऑडिट टीम ने आयोजन समिति के गठन को लेकर पीएमओ कई अहम सवाल पूछे हैं। ज्ञात हो कि आयोजन समिति का गठन प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय की जानकारी में हुआ था और केंद्रीय मंत्रियों के समूह के निर्णय को बदलते हुए तत्कालीन खेल मंत्री सुनील दत्त को हटाकर सुरेश कलमाड़ी को आयोजन समिति का मुखिया बना दिया गया था। सरकार में शीर्ष स्तर पर सबको इसकी जानकारी थी। इस पूरे प्रकरण का रहस्योद्घाटन दैनिक जागरण कर चुका है। राष्ट्रमंडल खेलों का संचालन संभालने वाली समिति भी पीएमओ व कैबिनेट सचिवालय के तहत काम कर रही थी। यह समिति खेलों की मेजबानी मिलने के साथ ही बन गई थी, जिसके पहले अध्यक्ष दिवंगत अर्जुन सिंह थे। खेलों के आयोजन के समय तत्कालीन शहरी विकास मंत्री जयपाल रेड्डी इस समिति के मुखिया थे। इस समिति का कामकाज और खेलों में भ्रष्टाचार रोकने में उसके प्रयास भी जांच का हिस्सा बन रहे हैं। ध्यान रहे कि पूरे आयोजन के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय ने कई बार तैयारियों की समीक्षा भी की थी और सीधा हस्तक्षेप भी किया था। तैयारियों में देरी और विवादों को देखते हुए पीएमओ ने खेल इंतजामों की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया था। इन समीक्षाओं को लेकर भी ऑडिट एजेंसी सूचनाएं चाहती है|
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