संप्रग की पिछली सरकार बचाने के लिए सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोपों पर विकिलीक्स के ताजा खुलासे ने मुहर लगा दी है और सरकार के संकटमोचकों को जवाब देते नहीं बन रहा है। इस खुलासे के अनुसार 2008 में परमाणु करार के मुद्दे पर लाए गए विश्वास प्रस्ताव पर सरकार बचाने के लिए संासदों को तगड़ी घूस दी गई थी। विकिलीक्स ने यह खुलासा कांग्रेस नेता सतीश शर्मा के सहयोगी रहे नचिकेता कपूर के हवाले से किया है। इसके मुताबिक कपूर ने अमेरिकी अधिकारी को रुपये से भरी दो पेटियां दिखाते हुए कहा था कि इनका इस्तेमाल सांसदों को घूस देने के लिए किया जा रहा है। यह रहस्योद्घाटन पहले से परेशान मनमोहन सरकार के सिर बम की तरह फटा और विपक्ष ने सरकार से इस्तीफा मांगते हुए संसद ठप कर दी। दुनिया में तहलका मचाने वाली वेबसाइट विकीलीक्स के माध्यम से सामने आई जानकारी के बाद सरकार सकते में थी और बचाव के रास्ते तलाश रही थी, लेकिन दोपहर बाद माहौल तब बदला जब संख्याबल से लाचार विपक्ष खुद ही ठंडा पड़ गया। फिलहाल सरकार की स्थिरता को कोई खतरा नहीं दिख रहा है, लेकिन उसकी और फजीहत होना तय है। लोकसभा में नोटों की नुमाइश देख चुके देश को सफाई देने के लिए सरकार के पास कोई मजबूत तर्क नहीं था। सरकार के संकटमोचक और वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी विकिलीक्स की विश्वसनीयता और वैधता के कानूनी और तकनीकी मसले उठाते रहे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह 14वीं लोकसभा का मामला था और अब 15वीं चल रही है, लिहाजा उसका कोई मतलब नहीं। बावजूद इसके वह इस तथ्य को नकार नहीं सके कि समर्थन खरीदा गया था और इसकी जानकारी कांगे्रसी नेताओं ने अमेरिकी अधिकारियों को दी थी। भाजपा और वामदलों ने इसे नैतिक पाप बताते हुए दोनों सदनों में प्रधानमंत्री पर जबर्दस्त हमला बोला और उनसे इस्तीफा मांगा। दोनों सदन बार-बार स्थगित हुए और लोकसभा में देर शाम हंगामे बीच अनुदान मांगे मंजूर करा ली गई। विपक्ष सदन के भीतर काफी उत्तेजित और कुछ कर गुजरने के मूड में दिख रहा था, लेकिन सदन से बाहर निकलने के बाद उसने सरकार को संकट में डालने के बजाय उसकी साख को संकटग्रस्त बनाए रखने की रणनीति को ज्यादा बेहतर समझा। राजग अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने प्रधानमंत्री का इस्तीफा तो मांगा, लेकिन अविश्वास प्रस्ताव लाने के सवाल पर वह पीछे हट गए। वाम मोर्चा जांच और प्रधानमंत्री से सफाई की मांग से आगे जाने को तैयार नहंी दिखा। सपा ने संकेत दिए कि वह इस प्रकरण पर सरकार को मुश्किल में नहीं डालेगी। संप्रग के दूसरे घटक भी फिलहाल सरकार की स्थिरता को कोई खतरा नहीं बता रहे हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में विकीलीक्स का रेडिएशन कुछ दिनों तक जरुर रहेगा। इस प्रकरण में जिन लोगों के नाम आए हैं उनमें कमलनाथ, सतीश शर्मा व उनके कथित सहयोगी नचिकेता कपूर, रालोद अध्यक्ष अजित सिंह, भारतीय मूल के अमेरिकी उद्योगपति संतसिंह चटवाल ने सरकार को समर्थन के लिए किसी तरह के लेनदेन को नकार दिया है|
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