Tuesday, March 29, 2011

कालेधन की तह तक पहुंचे सरकार


सर्वोच्च न्यायालय ने काले धन की जांच सिर्फ हसन अली तक सीमित रखने और स्विस बैंक के अन्य खातेदारों के नामों का खुलासा करने में गुरेज पर सोमवार को फिर सरकार को आड़े हाथों लिया। अदालत ने न सिर्फ जांच में राष्ट्रीय सुरक्षा का पहलू ध्यान रखने की नसीहत दी, बल्कि धन के स्रोत का भी पता लगाने को कहा है। कोर्ट ने यहां तक कह दिया कि देश की जनता को पता चलना चाहिए कि जांच में क्या हो रहा है। काले धन की जांच का दायरा बढ़ाने की बात कह कर न्यायालय ने सरकार के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है, क्योंकि इससे कई विशिष्ट और रसूख वालों पर जांच का फंदा कस सकता है। न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी व एसएस निज्जर की पीठ ने सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की पैरवी कर रहे सॉलिसिटर जनरल गोपाल सुब्रमण्यम से पूछा कि जांच सिर्फ हसन अली तक ही सीमित क्यों है। सरकार के पास तो और लोगों के भी नाम हैं। उनके खिलाफ क्या कार्यवाही हो रही है। कोर्ट ने ईडी की ओर से पेश स्थिति रिपोर्ट देखने के बाद कहा, रिपोर्ट देखकर चुपचाप नहीं बैठा जा सकता। स्विस बैंक के खातेदारों का नाम उजागर करने में सरकार के संकोच पर अदालत ने कहा, देश की जनता को पता लगना चाहिए कि यहां क्या हो रहा है। शीर्ष अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से कहा कि वे नामों को सार्वजनिक करने में परहेज पर पीठ को संतुष्ट करें। अभी तक हुई जांच पर असंतोष जताते हुए पीठ ने कहा, इसमें कहीं पर भी धन का स्रोत जानने की कोशिश नहीं की गई है। धन का स्रोत महत्वपूर्ण है। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा का पहलू शामिल है, जिस पर ध्यान देने की जरूरत है। पीठ ने कहा कि क्यों न इस मामले की जांच में आईबी, रॉ और सीबीआई आदि सरकारी एजेंसियों को भी शामिल किया जाए और उसकी निगरानी के लिए सेवानिवृत्त या अन्य अधिकारी की अध्यक्षता में एसआइटी गठित की जाए। पीठ के सवाल पर सुब्रमण्यम ने कहा, मामले में बहुत से कानून और पहलू शामिल हैं। जांच की जा रही है। उन्हें एक और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का समय दिया जाए। सुब्रमण्यम ने कहा कि हसन ने ईडी को पत्र लिखकर अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताया है और सुरक्षा की मांग की है। जिस पर ईडी ध्यान दे रहा है, लेकिन इस मामले की जांच कर रहे ईडी के अधिकारियों को भी सुरक्षा और संरक्षण दिए जाने की जरूरत है|

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